पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) ने 100 लाख करोड़ रुपये के पेंशन कॉर्पस का लक्ष्य 2040 से काफी पहले हासिल करने का इरादा जताया है। PFRDA के चेयरमैन एस रमन ने बुधवार को मुंबई में ‘लीडरशिप इवेंट ऑन NPS Tatkal’ के मौके पर मीडिया से बातचीत में ये बात कही।
उन्होंने बताया कि NPS Tatkal के जरिए बैंक के KYC रिकॉर्ड की मदद से 3 क्लिक में पेंशन खाता खुल जाएगा और UPI से 10 रुपये जितनी छोटी रकम भी NPS में जमा की जा सकेगी। रेगुलेटर को उम्मीद है कि अगले 2 से 3 साल में 4 से 5 करोड़ ग्राहक जुड़ जाएंगे।
2040 का इंतजार नहीं, उससे पहले 100 लाख करोड़ का लक्ष्य
न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक एस रमन ने बताया कि मौजूदा रफ्तार से पेंशन कॉर्पस 2040 तक 100 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच जाएगा। लेकिन रेगुलेटर इस मुकाम को इससे काफी पहले छूना चाहता है। उन्होंने कहा, “NPS जिस तरह बढ़ रहा है, 100 लाख करोड़ रुपये तो अपने आप आ जाएंगे।”
उनके मुताबिक PFRDA जो डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार कर रहा है और लोगों में जो जागरूकता बढ़ा रहा है, उसके दम पर ये लक्ष्य पहले हासिल किया जा सकता है। रमन ने ये भी साफ किया कि ये कोशिशें हर साल जारी रखनी होंगी। ऐसा नहीं चल सकता कि एक साल कोशिश की जाए और फिर उसके बाद कुछ न किया जाए।
पेंशन का पैसा, देश के इंफ्रास्ट्रक्चर की ताकत
एस रमन ने बढ़ते पेंशन कॉर्पस को देश के इंफ्रास्ट्रक्चर और आर्थिक विकास से भी जोड़ा। उन्होंने बताया कि कई दूसरे देशों में इंफ्रास्ट्रक्चर में होने वाले निवेश का बहुत बड़ा हिस्सा पेंशन फंड से आता है।
इसी वजह से उनका कहना है कि NPS के पैसे से जो निवेश होता है, वो देश निर्माण में भी योगदान देता है। मतलब किसी कामगार की जमा की गई छोटी-छोटी रकम एक तरफ उसके बुढ़ापे का सहारा बनती है, तो दूसरी तरफ देश की सड़कों और प्रोजेक्ट्स जैसे निवेश तक पहुंचती है। रमन के मुताबिक इन दोनों लक्ष्यों को साथ लेकर चलना होगा।
गिग वर्कर्स और असंगठित क्षेत्र के लिए सबसे आसान बचत का ठिकाना
PFRDA चेयरमैन ने कम आमदनी वाले लोगों, असंगठित क्षेत्र के कामगारों और गिग वर्कर्स तक पेंशन पहुंचाने पर खास जोर दिया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों की तय सैलरी नहीं होती, उनके लिए हाथ में पैसा होना बेहद अहम होता है और उन्हें बचत करने में मुश्किल आती है।
ऐसे लोगों के लिए पैसे जमा करने की आसानी और लचीलापन ही रिटायरमेंट के लिए बचत की आदत डाल सकता है। रमन ने कहा, “कम आमदनी वाले लोगों, असंगठित क्षेत्र और गिग वर्कर्स के लिए हम NPS को बचत की सबसे आसान जगह बनाएंगे।”
UPI से 10 रुपये, खाता खोलते वक्त 250 रुपये
PFRDA चेयरमैन एस रमन ने बताया कि UPI के जरिए रोज 10 रुपये या चाहें तो हर घंटे भी 10 रुपये NPS में भेजे जा सकते हैं। ये पूरी तरह जमा करने वाले की मर्जी पर है, क्योंकि अब NPS में कोई ट्रांजैक्शन चार्ज नहीं लगता। अगर कोई रोज 10 रुपये भी डाले, तो 30 दिन में 300 रुपये उसके पेंशन खाते में जुड़ जाएंगे।
उन्होंने साफ किया कि 10 रुपये न्यूनतम योगदान की रकम है, जबकि NPS खाता खोलते वक्त न्यूनतम 250 रुपये का योगदान लिया जाएगा। रमन के मुताबिक रकम से भी ज्यादा जरूरी बात ये है कि लोगों में पैसे बचाने का अनुशासन पैदा किया जाए।
तीन क्लिक में NPS अपना, 10 सेकंड में खाता तैयार
NPS Tatkal में खाता खोलने का तरीका काफी आसान बनाया गया है। रमन के मुताबिक ग्राहक अपने मौजूदा बैंकिंग और UPI सिस्टम के जरिए पेंशन खाता खोल सकेंगे और उन्हें अपनी निजी जानकारी दोबारा भरने की जरूरत नहीं पड़ेगी। उन्होंने बताया कि इसका मोटो है, “तीन क्लिक में NPS अपना।”
रमन ने समझाया कि ये पूरा काम 3 क्लिक में हो जाता है, क्योंकि ग्राहक की लगभग सारी जानकारी पहले से बैंकों के पास KYC रिकॉर्ड में मौजूद होती है। उनके मुताबिक PFRDA NPS Tatkal की ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया 10 सेकंड में पूरी हो जाती है।
इस डिजिटल पहल को उन्होंने सरकार के वित्तीय समावेशन के बड़े लक्ष्य से भी जोड़ा। रमन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने एक संबोधन में कहा था कि अब UPI के ढांचे का इस्तेमाल करने का वक्त है, ताकि पेंशन भी उसी तरह बढ़े जैसे UPI ने पेमेंट सिस्टम को बदल दिया।
दुनिया का सबसे सस्ता प्रोडक्ट, बैंकों के लिए भी फायदे का सौदा
लागत के मामले में रमन ने NPS को दुनिया के सबसे सस्ते रिटायरमेंट प्रोडक्ट्स में बताया। उनके मुताबिक NPS में कुल कमीशन AUM का सालाना 0.2% है और इसी वजह से ये दुनिया में कहीं भी सबसे कम लागत वाला प्रोडक्ट है। आसान हिसाब लगाएं तो 1 लाख रुपये के फंड पर साल भर में कुल 200 रुपये का कमीशन बनता है।
NPS Tatkal को इस तरह डिजाइन किया गया है कि बैंक कम लागत में पेंशन ग्राहक जोड़ सकें। इसमें बैंकों को 100 रुपये की ऑनबोर्डिंग फीस और AUM पर सालाना 0.2% कमीशन मिलेगा। रमन के मुताबिक बैंकों को ग्राहकों के साथ लंबे रिश्ते का फायदा भी मिलेगा, क्योंकि पेंशन ग्राहक आमतौर पर कई दशकों तक इस सिस्टम से जुड़े रहते हैं।
25% से ज्यादा नहीं निकलेगा पैसा, बुढ़ापे के लिए 75% सुरक्षित
रमन ने बताया कि NPS को इस तरह बनाया गया है कि इसमें से आसानी से पैसा नहीं निकाला जा सकता। खाते से ज्यादा से ज्यादा 25% रकम ही निकाली जा सकती है। मसलन, अगर किसी के खाते में 1 लाख रुपये जमा हैं, तो वो 25,000 रुपये से ज्यादा नहीं निकाल पाएगा।
उनके मुताबिक इस नियम से ये भरोसा रहता है कि पैसे बचाने वाले के पास बुढ़ापे में कम से कम 75% कॉर्पस मौजूद रहेगा। यानी NPS का असली मकसद रिटायरमेंट के बाद की जिंदगी के लिए पैसा बचाकर रखना है।
60 करोड़ कामगार, NPS और APY में करीब 10 करोड़ सब्सक्राइबर
रमन ने देश में पेंशन कवरेज की बड़ी खाई की तरफ भी ध्यान दिलाया। उन्होंने बताया कि भारत की वर्कफोर्स करीब 60 करोड़ लोगों की है, जबकि NPS और अटल पेंशन योजना (APY) को मिलाकर करीब 10 करोड़ सब्सक्राइबर हैं। मोटे तौर पर देखें तो हर 6 कामगारों में से करीब 1 ही इन योजनाओं से जुड़ा है। NPS में करीब 1.5 करोड़ सरकारी और 1 करोड़ गैर-सरकारी सब्सक्राइबर हैं।
रमन ने कहा कि 60 करोड़ लोगों को जोड़ने का कोई तय लक्ष्य नहीं है, क्योंकि ये आंकड़ा लगातार बदलता रहता है। उनके मुताबिक संभावित सब्सक्राइबर का दायरा आज के मुकाबले कहीं बड़ा है और NPS Tatkal से वो पैमाना हासिल होगा। उन्हें उम्मीद है कि 2 से 3 साल में आसानी से 4 से 5 करोड़ ग्राहक जुड़ जाएंगे और ये आंकड़ा इससे काफी ज्यादा भी हो सकता है। रमन ने कहा, “हम चाहते हैं कि भारत एक पेंशन सोसाइटी बने।”

