सरकार की स्मॉल सेविंग्स स्कीम में सुकन्या समृद्धि ऐसी योजना है, जिसमें हर माता-पिता को इनवेस्ट करना चाहिए। इस स्कीम के कई फायदे हैं। इस स्कीम में निवेश से बेटी के ब़ड़े होने तक अच्छा फंड तैयार हो जाता है, उसके हायर एजुकेशन में काम आ सकता है। टैक्स बेनेफिट इस स्कीम का अट्रैक्शन और बढ़ा देता है।
आप अपनी क्षमता के हिसाब से कर सकते हैं इनवेस्ट
इस स्कीम की खासियत यह है कि इसमें माता-पिता अपनी क्षमता के हिसाब से इनवेस्ट कर सकते हैं। हर महीने निवेश करने की बाध्यता भी नहीं है। मात-पिता चाहें तो हर महीने 1,000, 2,000, 3000, 4000, 5000 या इससे ज्यादा पैसा इनवेस्ट कर सकते हैं। आप जितना ज्यादा पैसा इनवेस्ट करेंगे, बेटी के लिए उतना बड़ा फंड तैयार होगा। सालाना मिनिमम इनवेस्टमेंट सिर्प 250 रुपये है, जबकि एक बेटी के लिए मैक्सिमम सालाना 1.50 लाख निवेश किया जा सकता है।
10 साल तक की 2 बेटियों के लिए खोल सकते हैं अकाउंट
सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) का फायदा उठाने के लिए कुछ नियम और शर्तें हैं। यह स्कीम सिर्फ बेटियों के लिए है। माता-पिता मैक्सिमम दो बेटियों के लिए सुकन्या समृद्धि योजना में अकाउंट ओपन कर सकते हैं। बेटी या बेटियों की उम्र 10 साल से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। बेटी के जन्म के ठीक बाद अकाउंट ओपन करने पर बेटी के 21 साल तक के होने पर उसके लिए बड़ा फंड तैयार हो जाता है।
स्कीम में सिर्फ 15 साल तक करना होगा निवेश
इस स्कीम में सिर्फ 15 साल तक निवेश करना है। लेकिन, स्कीम 21 साल में मैच्योर होती है। इसका मतलब है कि अगर बेटी के जन्म के ठीक बाद अकाउंट ओपन किया जाए तो बेटी के 21 साल के होने पर उसके लिए एक बड़ा फंड तैयार हो जाएगा। यह पैसा उसके हायर एजुकेशन या शादी-विवाह के काम आ सकता है। हमारे देश में बेटी की शादी में काफी पैसा खर्च हो जाता है। इस खर्च का इंतजाम करने में यह स्कीम मददगार साबित होती है।
स्मॉल सेविंग्स स्कीम में सबसे ज्यादा इंटरेस्ट रेट वाली स्कीम
SSY का इंटरेस्ट रेट 8.2 फीसदी है, जो स्मॉल सेविंग्स स्कीम में सबसे ज्यादा है। इस स्कीम की एक खासियत यह है कि बेटी के 18 साल के होने या 10वीं पास करने पर स्कीम में जमा आधा पैसे निकाले जा सकते हैं। अगर बेटी की शादी 18 साल की उम्र के बाद हो जाती है तो इस स्कीम को तय समय से पहले बंद किया जा सकता है।
मैच्योरिटी पर मिलने वाले पैसे पर कोई टैक्स नहीं लगता है
टैक्स बेनेफिट की वजह से यह स्कीम और अट्रैक्टिव हो जाती है। पीपीएफ की तरह यह स्कीम भी एग्जेम्प्ट-एग्जेम्प्ट-एग्जेम्प्ट यानी EES कैटेगरी में आती है। इसका मतलब है कि इस स्कीम में कंट्रिब्यूशन अमाउंट पर किसी तरह का टैक्स नहीं लगता है। स्कीम में जमा पैसे पर जो इंटरेस्ट मिलता है, उस पर कोई टैक्स नहीं लगता है। अकाउंट ओपन करने के 21 साल बाद मैच्योरिटी पर जो पैसा मिलता है वह भी पूरी तरह से टैक्स-फ्री होता है। इसके अलावा इनकम टैक्स की ओल्ड रीजीम का इस्तेमाल करने वाले लोगों के सेक्शन 80सी के तहत डिडक्शन का फायदा भी मिलता है।
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मंथली 2000 रुपये कंट्रिब्यूशन से 11 लाख से बड़ा फंड हो जाएगा तैयार
एसएसवाय में हर महीने 2000 रुपये कंट्रिब्यूशन से भी मैच्योरिटी तक अच्छा फंड तैयार हो जाता है। हर महीने 2,000 रुपये यानी सालाना 24,000 रुपये निवेश करने पर बेटी के लिए 11,08,412 रुपये का फंड तैयार हो जाता है। इसमें आप कुल 3,60,000 रुपये निवेश करते हैं। इस पर आपको 7,48,412 रुपये इंटरेस्ट मिलता है। इस योजना की शुरुआत सरकार ने 2015 में की थी।

