
आमतौर पर आरोप लगाने का काम विपक्षी पार्टियां करती हैं। भारत संभवतः दुनिया का एकमात्र देश होगा, जहां प्रधानमंत्री भी आरोप ही लगाते हैं। सोचें, प्रधानमंत्री को आरोप लगाने की क्या जरुरत है? वह भी इतने गंभीर आरोप! प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने दो दिन के गुजरात दौरे से दूसरे दिन विपक्षी पार्टियों और नेता प्रतिपक्ष के ऊपर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा, विदेशों में कौन किसके मिल रहा है? भारत विरोधी ताकतें किसको समर्थन दे रही हैं? देश के दुश्मनों की भाषा कौन बोल रहा है’? सवालों के रूप में प्रधानमंत्री की ओर से लगाए गए आरोपों का जवाब तो विपक्ष को देना चाहिए लेकिन सवालों को देख कर यह तो लग रहा है कि प्रधानमंत्री इस बारे में जानते हैं।
प्रधानमंत्री जानते हैं कि विदेशों में कौन किससे मिल रहा है, किसको भारत विरोधी ताकतें समर्थन दे रही हैं और कौन दुश्मनों की भाषा बोल रहा है, फिर सवाल है कि उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है? क्या भारत विरोधी ताकतों के सक्रिय होने की बात का भी सिर्फ राजनीतिक इस्तेमाल होगा? राहुल गांधी कहां जा रहे हैं इस बात का राजनीतिक नैरेटिव बनाया जाता है वह समझ में आता है। हालांकि उसमें भी सरकार को सब पता होता है कि वे कहां गए हैं और किससे मिल रहे हैं। लेकिन राहुल गांधी की साख बिगाड़ने के लिए भाजपा के नेता उनकी यात्राओं को गुप्त बताते हैं। लेकिन अब तो देश के दुश्मनों की साजिश की बात भी सीधे प्रधानमंत्री के स्तर पर कही जा रही है और कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। प्रधानमंत्री जो सवाल पूछे रहे हैं अगर उनके जवाब वे जानते हैं और फिर भी कुछ नहीं कर रहे हैं तो उनकी भी बराबर की जिम्मेदारी बनती है और अगर नहीं जानते हैं तो देश की एजेंसियों पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

