
भाजपा की तथाकथित लोकतंत्र बचाओ यात्रा ने लोकतंत्र से ज्यादा भाजपा के अंदर चल रही खींचतान पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस मंच पर संगठन की बात होनी थी, वह मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के राजनीतिक प्रतिशोध और विरोधियों पर चुन-चुनकर तंज कसने का मंच बन गया।
विडंबना देखिए, मंत्री जी को अभिव्यक्ति की आजादी भी रास नहीं आ रही! अपने ही विभाग में हुए भ्रष्टाचार पर सवाल उठाने वाले आम नागरिक को पुलिस हिरासत तक पहुंचा दिया गया।
मुख्यमंत्री मोहन यादव और प्रभारी संगठन मंत्री के विलंब के बावजूद कैलाश विजयवर्गीय नहीं रुके। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और प्रशासन आग्रह करते रहे, लेकिन मंत्री जी ने यात्रा शुरू कर दी। आखिर संगठन बड़ा है या मंत्री जी की मर्जी? और सबसे दिलचस्प बात! भाजपा के इस आयोजन में शामिल Gen-Z युवाओं ने ही सरकार के भ्रष्टाचार पर सवाल उठाकर मंच से बाहर भाजपा की पोल खोल दी।
सबसे बड़ा सवाल जो पार्टी अपने संगठन में लोकतंत्र और अपनी सरकार में अभिव्यक्ति की आजादी नहीं संभाल पा रही, वह देश को लोकतंत्र बचाने का पाठ कैसे पढ़ाएगी? जिस लोकसभा कांग्रेस प्रत्याशी का अपहरण किया गया उसे भगोड़े को मंच पर नुमाइश के लिए क्यों खड़ा किया गया? भाजपा की इस यात्रा में लोकतंत्र कम, अंतर्कलह और सियासी अहंकार ज्यादा दिखाई दिया! प्रदेश प्रवक्ता मध्यप्रदेश कांग्रेस अमित चौरसिया ने यह जानकारी दी।


