
इजराइल में आम चुनाव के बाद सरकार गठन को लेकर राजनीतिक खींचतान तेज हो गई है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुड पार्टी ने अरब दलों पर चुनाव में धांधली के आरोप लगाते हुए व्यापक जांच की मांग की है। वहीं, अरब बहुल जॉइंट लिस्ट गठबंधन के प्रमुख यूसुफ जबरीन ने नेतन्याहू सरकार को सत्ता से हटाने के लिए यहूदी और अरब दलों के बीच साझेदारी की वकालत की है। इस बीच, इजराइल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने राजनीतिक दलों से खुले मन से बातचीत करने और देश को दोबारा चुनाव की स्थिति में जाने से बचाने की अपील की है।
नेतन्याहू की पार्टी ने चुनाव में धांधली का आरोप लगाया
लिकुड पार्टी ने आरोप लगाया है कि अरब दलों ने चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित किया। पार्टी ने इजराइल की पुलिस, आंतरिक सुरक्षा एजेंसी शिन बेट और केंद्रीय चुनाव समिति से मामले की गहन जांच कराने की मांग की है। पार्टी का दावा है कि उसके पास कथित गड़बड़ियों से संबंधित सैकड़ों गवाहियां और अन्य साक्ष्य हैं। आरोपों में मतदाताओं को धमकाने, हिंसा, रिश्वत, जालसाजी, एक से अधिक बार मतदान और मतदाता जुटाने के लिए कथित तौर पर अवैध सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल जैसी शिकायतें शामिल हैं।
हालांकि, ये आरोप हैं और इन्हें स्वतंत्र रूप से साबित किया जाना बाकी है। टाइम्स ऑफ इजराइल की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय चुनाव समिति के एक अधिकारी ने पहले ही चुनाव में धांधली के दावों को खारिज किया था। ऐसे में जांच और संबंधित साक्ष्यों के आधार पर ही इन आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी।
अरब दलों को इस चुनाव में मजबूत समर्थन मिला है। शुरुआती नतीजों के अनुसार, नेतन्याहू के नेतृत्व वाला गठबंधन और उनके विरोधी यहूदी दलों का गठबंधन, दोनों ही अपने दम पर सरकार बनाने के लिए आवश्यक 61 सीटों के बहुमत से पीछे नजर आ रहे हैं।
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नेतन्याहू को सत्ता से हटाने के लिए यहूदी-अरब साझेदारी पर जोर
जॉइंट लिस्ट गठबंधन के प्रमुख यूसुफ जबरीन ने चुनाव के बाद कहा कि उनकी पार्टी नेतन्याहू सरकार को सत्ता से हटाने का रास्ता तैयार करने के लिए काम करने को तैयार है। उन्होंने मौजूदा सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि देश को ऐसी राजनीति के विकल्प की जरूरत है, जिसमें वर्चस्व, नस्लवाद और बहिष्कार के बजाय समानता को महत्व मिले।
जबरीन ने यहूदी और अरब समुदायों के बीच वास्तविक और समान साझेदारी को राजनीतिक बदलाव का रास्ता बताया। उनके मुताबिक, नेतन्याहू सरकार के विकल्प के रूप में एक ऐसा गठबंधन खड़ा होना चाहिए, जो इजराइल के सभी नागरिकों के हितों का प्रतिनिधित्व करे।
चुनाव में अरब दलों के बेहतर प्रदर्शन ने सरकार गठन की संभावनाओं में उनकी भूमिका को महत्वपूर्ण बना दिया है। हालांकि, नेतन्याहू के विरोधी यहूदी दलों के बीच अरब पार्टियों के साथ मिलकर सरकार बनाने को लेकर मतभेद रहे हैं। ऐसे में नए गठबंधन का गठन राजनीतिक बातचीत और दलों के आपसी सहमति बनाने पर निर्भर करेगा।
राष्ट्रपति हर्जोग की अपील- खुले मन से करें बातचीत
इजराइल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने राजनीतिक दलों के नेताओं से सरकार गठन की बातचीत में खुले मन के साथ शामिल होने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सभी दलों को हरसंभव प्रयास करना चाहिए, ताकि देश को फिर से चुनाव का सामना न करना पड़े। हर्जोग ने बताया कि उन्हें अगले सप्ताह चुनाव के आधिकारिक नतीजे मिलने की उम्मीद है। इसके बाद वह संसद में प्रतिनिधित्व रखने वाले प्रत्येक दल से परामर्श करेंगे, उनकी बात सुनेंगे और सरकार गठन की संभावनाओं पर चर्चा करेंगे।
राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि राजनीतिक नेताओं को बातचीत के दौरान खुले दृष्टिकोण के साथ आना चाहिए। उनका जोर इस बात पर है कि राजनीतिक गतिरोध को बातचीत के जरिए दूर किया जाए और देश में एक और चुनाव कराने की नौबत न आए।
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सरकार गठन पर टिकी निगाहें
इजराइल के चुनाव नतीजों ने सरकार गठन की प्रक्रिया को चुनौतीपूर्ण बना दिया है। नेतन्याहू की लिकुड पार्टी सबसे बड़ी पार्टियों में शामिल है, लेकिन किसी भी राजनीतिक खेमे के पास स्पष्ट बहुमत नहीं है। ऐसे में अरब दलों का समर्थन और विपक्षी दलों के बीच संभावित समझौता सत्ता की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है। अब सभी की निगाहें चुनाव के आधिकारिक परिणामों और राष्ट्रपति की ओर से शुरू की जाने वाली परामर्श प्रक्रिया पर हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि इजराइल में नई सरकार बनाने के लिए कौन-से राजनीतिक दल साथ आते हैं।


