अक्टूबर के अंत तक आ सकता है परिसीमन बिल? दक्षिण के दल बदल रहे हैं सुर

अक्टूबर के अंत तक आ सकता है परिसीमन बिल? दक्षिण के दल बदल रहे हैं सुर

Delimitation Bill October 2026

Delimitation Bill October 2026: अक्टूबर के अंत तक परिसीमन बिल आने की चर्चा जोरों पर है। लेकिन केंद्र सरकार के पास अभी संख्या नहीं है। करीब 36 सांसदों की जरूरत है। और यहीं से खेल शुरू होता है। डीएमके अभी भी भाजपा या एनडीए को समर्थन देने के कोई संकेत नहीं दे रही। वाईएसआरसीपी के जगन मोहन रेड्डी के सुर अब साफ भाजपा और एनडीए के खिलाफ हो चुके हैं। बयानबाजी शुरू हो गई है।

 

तमिलनाडु की राजनीति में एक पुरानी गाथा दोहराई जा रही है। डीएमके को कांग्रेस से तकलीफ है। वजह? कांग्रेस ने टीवीके को समर्थन देकर विजय को मुख्यमंत्री बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया। डीएमके का पुराना दर्द फिर उभर आया है। ALSO READ: क्या बिना संसद में परिसीमन बिल पास हुए बदल जाएंगी लोकसभा की सीटें? जानिए संविधान का वो नियम जो कोई नहीं बताता

 

60 साल की राजनीति में कांग्रेस के पास कभी-कभी 35 विधायक भी रहे, लेकिन डीएमके ने तमिलनाडु सरकार में कांग्रेस को कभी मंत्री पद नहीं दिया। केंद्र में कांग्रेस का समर्थन किया, लेकिन राज्य में कांग्रेस को मजबूत करने की कोई पहल नहीं की। स्टालिन जरूर राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनाने की बात करते रहे। ALSO READ: परिसीमन पर तमिलनाडु CM विजय ने PM मोदी को लिखा पत्र, लोकसभा सीटों की संख्या 543 पर स्थायी रूप से तय करने की मांग

मोदी सरकार की राह आसान नहीं

लेकिन, अब तस्वीर बदल रही है। अखिलेश यादव, ममता बनर्जी, तेजस्वी यादव और विजय थलपति सभी राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनाने की बात कह रहे हैं। विपक्ष में एक नई एकजुटता का स्वर सुनाई दे रहा है। 

 

परिसीमन बिल पर सरकार के पक्ष में अभी नंबर नहीं जुट रहे। करीब 36 सांसदों की कमी है। वाईएसआरसीपी और बीजेडी के विपक्ष के साथ जाने की संभावना बढ़ गई है। जगन के सुर बदल चुके हैं। बीजेडी भी दूरी बना सकती है।

अप्रैल में पास नहीं हो पाया था परिसीमन बिल

उल्लेखनीय है कि अप्रैल 2026 में सरकार द्वारा ‘परिसीमन विधेयक 2026’ और उससे जुड़ा संविधान (131वां संशोधन) विधेयक लोकसभा में पेश किया गया था, लेकिन दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता के कारण यह विधेयक 17 अप्रैल 2026 को लोकसभा में पारित नहीं हो पाया। इस माना जा रहा है कि केंद्र सरकार दक्षिण भारतीय राज्यों की चिंताओं (जैसे सीटों का अनुपात न घटने देने) को ध्यान में रखते हुए एक नया संशोधित ड्राफ्ट तैयार कर रही है। माना जा रहा है कि विशेष सत्र बुलाकर अक्टूबर के अंत में सरकार एक बार फिर इस बिल को पेश कर सकती है।