इंदौर-उज्जैन सहित मध्यप्रदेश के 12 जिलों में सूखे की आहट, पश्चिमी रीजन में 20 से 59 फीसदी तक कम बारिश

इंदौर-उज्जैन सहित मध्यप्रदेश के 12 जिलों में सूखे की आहट, पश्चिमी रीजन में 20 से 59 फीसदी तक कम बारिश

मध्य प्रदेश में सामान्य से कम वर्षा से अब 12 जिलों में सूखे जैसे हालात और जल संकट की आशंका बढ़ गई है। प्रदेश के इंदौर, उज्जैन, आलीराजपुर, धार, झाबुआ, रतलाम, बैतूल, नर्मदापुरम, पांढुर्णा, छिंदवाड़ा, हरदा और शाजापुर में सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई है। मध्यप्रदेश में अब तक  सामान्य से 4 फीसदी कम बारिश दर्ज हुई है। वहीं अगर पश्चिमी मध्य प्रदेश की बात करें तो यहां पर इस सीजन में 12 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की है। प्रदेश के 12 जिलों में सामान्य से 20 से 59 फीसदी तक कम बारिश दर्ज की गई है।

इंदौर में जलसंकट का खतरा-प्रदेश की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले इंदौर में भी कम बारिश से सूखे के हालात पैदा हो गए है। सामान्य तौर पर इंदौर में सालाना लगभग 38 से 40 इंच बारिश होती है, लेकिन इस सीजन में  केवल 23.2 इंच बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य के काफी कम है। अल्प वर्षा से इंदौर में जलसंकट का खतरा भी मंडराने लगा है। इसकी बड़ी  वजह  इंदौर का दूसरा सबसे बड़ा ऐतिहासिक बिलावली तालाब पूरी तरह सूख चुका है। वहीं शहर की लाइफलाइन माना जाने वाला यशवंत सागर तालाब भी इस बार अपनी पूरी क्षमता तक नहीं भर पाया है।

इंदौर में जलसंकट को देखते हुए महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से 50 करोड़ का पैकेज मांगा है। महापौर ने कहा कि कम बारिश के चलते इंदौर में जलसंकट को देखते हुए भविष्य की चुनौती को देखते हुए तैयारी शुरु कर दी है। उन्होंने पानी की सप्लाई के लिए टैंकर को भरने की व्यवस्था के साथ सप्लाई के लिए जीपीएस टैंकर खरीदने की व्यवस्था के साथ, नर्मदा पाइपलाइन के लीकेज को सुधारने के साथ बिलावली तालाब और यशवंत सागर तालाब को दिसंबर के महीने में एनवीडीए से भरने की विशेष प्लानिंग की बात कही।   

महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने इंदौर के लोगों से अपील की है कि पानी का उपयोग आवश्यकता के अनुसार करें और जहां संभव हो, जल संरक्षण को अपनी आदत बनाएं। गौरतलब है कि 2008 में इंदौर में 20 इंच बारिश दर्ज की गई थी तब जिले में बड़ा पेयजल संकट खड़ा हो गया था।

रबी की फसल पर संकट-प्रदेश में इस सीजन में कम बारिश से रबी की फसल को लेकर बड़ा संकट खड़ा होता दिख रहा है। भारतीय किसान संघ ने सरकार से मांग की है कि कम बारिश से किसानों को सिंचाई की वैकल्पिक व्यवस्था का प्रबंध करने के साथ बीज की व्यवस्था की जाए।

मुख्यमंत्री ने की हालात की समीक्षा- प्रदेश में सामान्य से कम वर्षा को लेकर जलसंकट औऱ सूखे के संभावना को देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। मुख्यमंत्री ने इन जिलों में जल प्रबंधन विशेष पेयजल व्यवस्था के लिए सभी जरूरी दिशा निर्देश दिए है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने सूखे की संभावना को देखते हुए किसानों को कम पानी वाली फसलें लेने के लिए भी प्रेरित करने के लिए विशेष कैंप और जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने सामान्य से कम वर्षा वाले जिलों में इस स्थिति से निपटने के लिए वातावरण निर्मित करने में जल उपभोक्ता समितियां भी अपनी भूमिका निभाएं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन  यादव ने प्रदेश के प्रमुख बांधों, जलाशयों में जलभराव की स्थिति, कम वर्षा वाले जिलों और उनके जल स्त्रोतों की स्थिति की जानकारी लेने के साथ नदियों में जलप्रवाह, भू-जलस्तर, मृदा में नमी जैसे बिंदुओं पर भी विस्तार से चर्चा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सामान्य से कम वर्षा वाले जिलों में रोजगार के अवसर सृजित करने के उद्देश्य से जलगंगा अभियान के अंतर्गत गतिविधियां आरंभ करने के संबंध में भी निर्देश दिए।

नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र- वहीं प्रदेश में कम बारिश को देखते हुए  नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर प्रभावित जिलों को सूखा प्रभावित घोषित करने की मांग की है। उन्होंने खरीफ फसलों का सर्वे कराने और प्रभावित किसानों को राहत पैकेज देने की मांग की है। उमंग सिंघार ने अपने पत्र में लिखा है कि  धार में पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 42% कम बारिश हुई है। इससे खेतों में पर्याप्त नमी नहीं बची और रबी की बोनी के लिए सिंचाई का संकट गहराने की आशंका है। उमंग सिंघार ने धार के अलावा प्रदेश के दूसरे प्रभावित जिलों में भी सर्वे कराकर जरूरत के अनुसार राहत देने की मांग की है।