
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में दशकों से राजनीतिक आंदोलनों और विरोध-प्रदर्शनों का गढ़ रहे ‘जंतर-मंतर’ को प्रदर्शन स्थलों की सूची से बाहर करने के केंद्र सरकार के फैसले पर कानूनी शिकंजा कसता नजर आ रहा है। इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सर्वोच्च अदालत ने गुरुवार को केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर उनका जवाब तलब किया है। ALSO READ: SIR को लेकर विपक्ष की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने EC से मांगा जवाब, SC मार्च पर कहा- हमें डरा नहीं सकते
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा, “हम केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर उनका जवाब मांग रहे हैं। उन्हें जवाब दाखिल करने दें, यदि उनका जवाब संतोषजनक नहीं हुआ, तो कानून अपना काम करेगा।”
इन 3 स्थानों पर प्रदर्शन की इजाजत
हाल ही में दिल्ली पुलिस ने एक आदेश जारी कर जंतर-मंतर को प्रदर्शनों की सूची से हटा दिया है। इसके स्थान पर विरोध-प्रदर्शनों के लिए अब केवल तीन जगहों—रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और सीबीडी ग्राउंड (शाहदरा)—को ही चिन्हित किया गया है। सरकार के इस कदम के खिलाफ कोर्ट में याचिका दाखिल कर इसे चुनौती दी गई है।
समिति की सिफारिश पर लिया फैसला
मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने का निर्णय किसी एक के कहने पर नहीं, बल्कि एक उच्च स्तरीय समिति की सिफारिशों के आधार पर लिया गया है। ALSO READ: हिंदू धर्म छोड़कर इस्लाम अपनाने पर नहीं मिलेगा आरक्षण का लाभ, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
जंतर-मंतर विरोध-प्रदर्शनों का सबसे प्रमुख केंद्र
गौरतलब है कि दिल्ली के दिल में स्थित जंतर-मंतर हमेशा से विरोध-प्रदर्शनों का सबसे प्रमुख और सुलभ केंद्र रहा है। बीते जुलाई महीने में नीट (NEET) पेपर लीक को लेकर यहां लंबे समय तक भारी विरोध-प्रदर्शन देखने को मिले थे।
इसके बाद से हालिया राजनीतिक मुद्दों और ‘वोट चोरी’ के आरोपों को लेकर भी विपक्ष व विभिन्न संगठनों ने यहां प्रदर्शन की योजना बनाई थी, लेकिन पुलिस की सख्त पाबंदियों और नए नियमों के चलते उन्हें अनुमति नहीं मिल सकी, जिसके बाद यह मामला अदालत की चौखट तक पहुंच गया है।


