मेरठ नीला ड्रम हत्याकांड में फैसला, साहिल और मुस्कान को कोर्ट ने सुनाई मौत की सजा

मेरठ नीला ड्रम हत्याकांड में फैसला, साहिल और मुस्कान को कोर्ट ने सुनाई मौत की सजा

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मेरठ नीला ड्रम हत्याकांड में बड़ा फैसला आ गया गया है। सौरभ हत्याकांड मामले में साहिल और मुस्कान को कोर्ट ने फांसी की सजा का ऐलान किया  गया है। एडवोकेट किशन कुमार दुबे ने कहा कि अदालत में आज मुस्कान और साहिल को उनके अपराध के लिए मृत्यु दंड की सजा दी गई है। 30 सितंबर 2026 को मेरठ की जिला अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को सौरभ राजपूत की हत्या और साक्ष्य मिटाने के मामले में दोषी ठहराया था।

मेरठ नीला ड्रम हत्याकांड। क्या है पूरा मामला? सौरभ राजपूत की हत्या से लेकर अदालत के फैसले तक की पूरी कहानी

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उत्तर प्रदेश के मेरठ का चर्चित नीला ड्रम हत्याकांड मार्च 2025 में सामने आया था। इस मामले में मर्चेंट नेवी के पूर्व अधिकारी सौरभ राजपूत की हत्या का आरोप उनकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और मुस्कान के साथी साहिल शुक्ला पर लगा। पुलिस को सौरभ का शव टुकड़ों में एक नीले ड्रम के अंदर मिला था, जिसे सीमेंट से बंद किया गया था। इस घटना ने पूरे देश का ध्यान खींचा था। 

3 मार्च 2025 को क्या हुआ था?

अभियोजन पक्ष के अनुसार, 3 मार्च 2025 को मेरठ में सौरभ राजपूत की हत्या की गई। आरोप है कि उनकी पत्नी मुस्कान ने उन्हें नींद की दवा दी और इसके बाद साहिल को घर बुलाया गया। दोनों ने कथित तौर पर सौरभ की हत्या की और शव के टुकड़े कर दिए। इसके बाद शव के टुकड़ों को एक नीले प्लास्टिक के ड्रम में रखा गया और ड्रम में सीमेंट तथा अन्य सामग्री भरकर उसे बंद कर दिया गया। ये घटनाक्रम अभियोजन पक्ष के आरोपों पर आधारित हैं, जिन्हें अदालत में पेश किए गए साक्ष्यों के आधार पर परखा गया। 

17 मार्च को कैसे खुला हत्याकांड?

पुलिस के अनुसार, 17 मार्च 2025 को मामले का खुलासा हुआ। घर में रखे नीले ड्रम से दुर्गंध आने के बाद जांच की गई और उसके अंदर सौरभ के शव के टुकड़े बरामद हुए। इसके बाद पुलिस ने मुस्कान और साहिल को गिरफ्तार कर लिया। जांच में पुलिस ने ड्रम, सीमेंट, हत्या में इस्तेमाल किए जाने के आरोप वाले हथियारों और अन्य सामान की खरीद से जुड़े लोगों के बयान भी दर्ज किए। पुलिस ने मोबाइल फोन के रिकॉर्ड, यात्रा और होटल से संबंधित जानकारियों को भी जांच का हिस्सा बनाया।

जुलाई 2025 में शुरू हुआ ट्रायल

मामले की सुनवाई मेरठ की जिला अदालत में चली। अभियोजन पक्ष ने अदालत में 22 गवाहों के बयान पेश किए। करीब 13 महीने तक चली सुनवाई में कुल 126 तारीखें पड़ीं। 17 सितंबर 2026 को मामले में अंतिम बहस पूरी हुई। अभियोजन पक्ष ने अपराध की गंभीरता और साक्ष्यों का हवाला देते हुए दोनों दोषियों के लिए मृत्युदंड की मांग की।