मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) में कथित अनियमितताओं और बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने के मामले में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक के अन्य नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। खबरों के अनुसार हालांकि याचिका में सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने 14 खामियां बताई हैं। इनमें कुछ प्रतिवादियों के नामों में विसंगति, आवश्यक दस्तावेजों की कमी और कोर्ट फीस में 220 रुपए की कमी शामिल है।
मार्च फॉर डेमोक्रेसी
चुनावों में कथित ‘वोट चोरी’ और मतदाता सूची में गड़बड़ियों के आरोपों को लेकर विपक्ष का विरोध प्रदर्शन सोमवार को सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया। INDIA bloc के कई प्रमुख नेताओं ने कार्यकर्ताओं, सामाजिक संगठनों के सदस्यों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों के साथ दिल्ली में ‘मार्च फॉर डेमोक्रेसी’ निकाला। इस दौरान विपक्षी नेताओं ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और कथित चुनावी अनियमितताओं के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में संयुक्त याचिका दाखिल की।

मार्च में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी भी शामिल
भगवान दास रोड पर पुलिस बैरिकेडिंग के दौरान राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, तेजस्वी यादव और अखिलेश यादव समेत कुछ नेता एक वाहन के ऊपर चढ़ गए। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड पार किए और मार्च आगे बढ़ा। प्रदर्शन के दौरान सरकार, मुख्य चुनाव आयुक्त और SIR के खिलाफ नारे लगाए गए।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी भी मार्च में शामिल हुए। कांग्रेस सांसद शशि थरूर, सचिन पायलट और मुकुल वासनिक के अलावा टीएमसी नेता सागरिका घोष तथा सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव और नंदिता नारायण भी प्रदर्शन में मौजूद थे।
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राहुल गांधी की याचिका में कौन-कौन सी खामियां?
सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने याचिका में कुल 14 कमियां चिह्नित की हैं। इनमें कुछ प्रतिवादियों के नामों में अंतर और निजी व्यक्तियों को प्रतिवादी बनाने का पर्याप्त स्पष्टीकरण नहीं दिया जाना शामिल है। इसके अलावा, याचिका के साथ पहले के एक फैसले की प्रति संलग्न नहीं की गई है। राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे को छोड़कर नौ याचिकाकर्ताओं के वकालतनामे भी नहीं मिले हैं। वकालतनामा वह दस्तावेज होता है, जिसके जरिए कोई पक्षकार अपने मामले की पैरवी के लिए वकील को अधिकृत करता है। रजिस्ट्री ने मल्लिकार्जुन खरगे के पहचान पत्र की प्रति धुंधली होने और जमा की गई कोर्ट फीस में 220 रुपए की कमी की ओर भी ध्यान दिलाया है। दस्तावेजों की छपाई से जुड़ी कुछ कमियां भी बताई गई हैं।

SIR में कथित गड़बड़ियों की जांच के लिए स्वतंत्र समिति की मांग
INDIA ब्लॉक के नेताओं ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं और अन्य अनियमितताएं हुई हैं। याचिका में सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र समिति गठित करने की मांग की गई है।
इस समिति में तकनीकी विशेषज्ञों और अन्य प्रतिष्ठित नागरिकों को शामिल करने का प्रस्ताव है। याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि समिति एक निर्धारित समयसीमा के भीतर SIR के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए नामों और किए गए संशोधनों का स्वतंत्र ऑडिट करे, ताकि कथित अनियमितताओं की जांच की जा सके।
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SIR के तरीकों को चुनौती
इसमें चुनाव आयोग द्वारा वोटर लिस्ट के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न’ (SIR) से जुड़े फैसलों के तरीके को चुनौती दी गई है। इसमें विवादित फैसलों से जुड़ी EC की पूरी फाइलें, एजेंडा, बैठक का विवरण (मिनट्स), नोटिंग और आपत्तियों का खुलासा करने की मांग की गई है। इनमें SIR शुरू करने का 24 जून, 2025 का फैसला और ECINET व ERONET के एक्सेस लॉग भी शामिल हैं। इसमें इस बात की न्यायिक जांच की भी मांग की गई है कि क्या ये फैसले संविधान के अनुच्छेद 324, चुनाव आयोग को नियंत्रित करने वाले 2023 के कानून और ‘टी.एन. शेषन बनाम भारत संघ’ मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार लिए गए थे।
और क्या हैं मांगें
याचिका में मुख्य रूप से यह मांग की गई है कि कोर्ट यह सुनिश्चित करे कि किसी भी वोटर का नाम बिना नोटिस और सुनवाई का उचित मौका दिए न हटाया जाए। साथ ही, हटाए गए वोटरों की सूची बूथ-वार प्रकाशित करने और उसमें नाम हटाने के कारण व डेमोग्राफिक जानकारी शामिल करने का निर्देश देने की भी मांग की गई है। इसमें ECINET और ERONET सहित वोटर लिस्ट डेटाबेस में नाम हटाने और बदलावों की ऑडिट के लिए सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र समिति बनाने की भी मांग की गई है।
याचिका में विशेष रूप से कोर्ट से मांग की गई है कि वह ECI को निर्देश दे कि वह यह सुनिश्चित करे कि SIR से जुड़ा चुनाव आयोग का हर फैसला 2023 के कानून के अनुसार लिया जाए और उसका विधिवत रिकॉर्ड (मिनट्स) रखा जाए। इसमें यह निर्देश देने की भी मांग की गई है कि “कानून के अनुसार बिना नोटिस और सुनवाई का उचित मौका दिए वोटर लिस्ट से किसी भी वोटर का नाम न हटाया जाए।
SIR प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाने की मांग
याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि मामले में उठाए गए मुद्दों पर विचार और अंतिम निर्णय होने तक विभिन्न राज्यों में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाई जाए। याचिका के मुताबिक, इस कदम का उद्देश्य पात्र मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा करना और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता एवं विश्वसनीयता बनाए रखना है।


