
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में इमरान खान की पार्टी पीटीआई की सरकार को पाकिस्तान सरकार ने बर्खास्त कर दिया है। साथ ही राज्य में इमरजेंसी लगा दी है। ऐसा इमरान खान के समर्थन में होने जा रहे एक मार्च से पहले किया गया है
पाकिस्तान में बढ़ते राजनीतिक तनाव के बीच उत्तरी पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा राज्य के मुख्यमंत्री सोहैल अफरीदी को गिरफ्तार कर लिया गया है। उनके साथ ही राज्य में उनकी पार्टी पीटीआई के प्रमुख को भी गिरफ्तार किया गया है। साथ ही वहां की सरकार को बर्खास्त कर दिया है। यह दावा पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी की ओर से किया गया है। खैबर पख्तूनख्वा में पीटीआई की सरकार है। जिसके संस्थापक और पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान लंबे समय से जेल में बंद है। इमरान खान को रिहा किए जाने को लेकर उनकी पार्टी देशभर में आंदोलन चला रही है।
यह कदम पाकिस्तान की केंद्र सरकार ने रविवार को खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में आपातकाल लागू करने के बाद उठाया है। राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने संविधान के दो सुरक्षा संबंधी अनुच्छेदों के तहत इस आदेश पर हस्ताक्षर किए। राष्ट्रपति कार्यालय के अनुसार यह फैसला प्रदेश में बिगड़ती कानून-व्यवस्था, सरकार और विपक्ष के बीच बातचीत में विफलता तथा सुरक्षा हालात को देखते हुए उठाया गया।
पीटीआई के प्रदर्शनों के बाद कदम
खैबर पख्तूनख्वा, पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) का सबसे मजबूत राजनीतिक गढ़ माना जाता है। पिछले कई दिनों से इमरान खान के समर्थक प्रांत के विभिन्न शहरों और कस्बों में बड़े मार्च निकाल रहे थे। प्रदर्शनकारी इमरान खान की रिहाई की मांग कर रहे हैं और केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। आर्थिक कठिनाइयों, बढ़ती महंगाई और राजनीतिक असंतोष ने भी इन प्रदर्शनों को बल दिया है। हजारों समर्थक सड़कों पर उतर रहे हैं और कई स्थानों पर रैलियां और विरोध मार्च आयोजित किए जा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों और पार्टी समर्थकों की योजना इस्लमाबाद तक मार्च करने की थी लेकिन मार्च से पहले की सरकार ने इस्लमाबाद को कंटेनरों से सीलबंद कर दिया था।
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के कार्यालय ने कहा कि खैबर पख्तूनख्वा में कानून-व्यवस्था की स्थिति लगातार खराब हो रही थी। केंद्र सरकार ने आरोप लगाया कि प्रांतीय प्रशासन आतंकवाद के खिलाफ अभियान में पर्याप्त सहयोग नहीं कर रहा था और इस मामले में जानबूझकर उदासीन रवैया अपनाया गया। सरकार का कहना है कि सुरक्षा हालात को नियंत्रित करने और संभावित अस्थिरता को रोकने के लिए असाधारण संवैधानिक कदम उठाना आवश्यक हो गया था।
पीटीआई ने लगाया विपक्ष को दबाने का आरोप
दूसरी ओर पीटीआई ने इस फैसले की कड़ी आलोचना की है। पार्टी के अध्यक्ष गौहर अली खान ने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था पर हमला बताते हुए गंभीर राजनीतिक भूल करार दिया है। उन्होंने कहा कि जनता अपने अधिकारों के खिलाफ ऐसे कदमों को कभी स्वीकार नहीं करेगी। पीटीआई का आरोप है कि केंद्र सरकार राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को कमजोर करने और विपक्ष की ताकत को सीमित करने के लिए ऐसी संवैधानिक शक्तियों का इस्तेमाल कर रही है।
प्रांतीय राजधानी पेशावर में रविवार को सुरक्षा बलों की अतिरिक्त तैनाती देखी गई। कई शहरों में सड़कों को बंद किया गया और संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी गई। प्रशासन को आशंका है कि प्रदर्शन और तेज हो सकते हैं और आपातकालीन व्यवस्था के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी हो सकते हैं। बीते एक सप्ताह से पीटीआई समर्थकों का विशाल मार्च अलग-अलग शहरों से गुजर रहा था। यह मार्च 4 अक्टूबर को सरकार और विपक्ष के बीच वार्ता टूटने के बाद शुरू हुआ था।
इमरान खान से जुड़ी मांग पर खत्म हुई थी बातचीत
इमरान खान अगस्त 2023 से जेल में बंद हैं। पूर्व क्रिकेटर और पाकिस्तान के सबसे लोकप्रिय नेताओं में गिने जानेवाले खान के खिलाफ भ्रष्टाचार, देशद्रोह और हिंसा भड़काने समेत अनेक मामले दर्ज हैं। उनपर ये आरोप मई, 2023 में हुए व्यापक विरोध प्रदर्शनों और सरकारी प्रतिष्ठानों पर हमलों के बाद लगाए गए थे। खान और उनके वकीलों का कहना है कि सभी मामले राजनीतिक रूप से प्रेरित हैं और उनका उद्देश्य उनकी लोकप्रियता को खत्म करना है।
सरकार और पीटीआई के बीच वार्ता के दौरान कई मुद्दों पर चर्चा हुई थी। प्रदर्शनकारियों की मांगों में इमरान खान को उनके निजी डॉक्टरों से मिलने की अनुमति देना भी शामिल था। हालांकि दोनों पक्ष किसी सहमति पर नहीं पहुंच सके और बातचीत समाप्त हो गई। इसके बाद विरोध प्रदर्शनों का नया दौर शुरू हो गया, जिसने केंद्र सरकार को कठोर कदम उठाने की दिशा में बढ़ने के लिए प्रेरित किया। इमरान खान के परिवार ने भी उनकी बिगड़ती सेहत को लेकर विरोध जताया है और कहा है कि खान की एक आंख की रोशनी जा चुकी है।
राजनीतिक संकट के साथ सुरक्षा चुनौतियां भी
राजनीतिक संकट के साथ ही पाकिस्तान सुरक्षा चुनौतियों से भी जूझ रहा है। खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में हाल के महीनों में उग्रवादी हमलों में बढ़ोतरी हुई है। पाकिस्तान का आरोप है कि कई हमलों की योजना अफगानिस्तान की सीमा के उस पार से बनाई जा रही है। दूसरी तरफ अफगानिस्तान की तालिबान सरकार इन आरोपों को खारिज करती है और पाकिस्तान पर अफगानिस्तान की संप्रभुता का उल्लंघन करने तथा नागरिकों को निशाना बनाने का आरोप लगाती है।
दोनों पड़ोसी देशों के बीच तनाव पिछले महीनों में गंभीर स्तर तक पहुंच गया था। फरवरी में दोनों देशों के बीच सैन्य संघर्ष भी हुआ था। मार्च में युद्धविराम पर सहमति बनी, लेकिन स्थायी सुरक्षा समाधान नहीं निकल सका। इसके बाद से छिटपुट हमले और सीमा पर तनाव जारी है। ऐसे समय में खैबर पख्तूनख्वा में आपातकालीन शासन का फैसला पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति, संघीय ढांचे और क्षेत्रीय सुरक्षा पर दूरगामी प्रभाव डाल सकता है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि यह कदम स्थिति को स्थिर करेगा या फिर राजनीतिक टकराव को और गहरा बनाएगा।


