मेसी जैसा कोई नहीं: अर्जेंटीना की जर्सी में जब जादू ने आखिरी बार रंग दिखाया

मेसी जैसा कोई नहीं: अर्जेंटीना की जर्सी में जब जादू ने आखिरी बार रंग दिखाया

मेसी जैसा कोई नहीं: अर्जेंटीना की जर्सी में जब जादू ने आखिरी बार रंग दिखाया

फुटबॉल में कुछ खिलाड़ी मैच खत्म होने के साथ मैदान छोड़ते हैं और कुछ खिलाड़ी मैदान छोड़ने के बाद भी खेल का हिस्सा बने रहते हैं। लियोनेल मेसी दूसरी श्रेणी के खिलाड़ी हैं।

 

ब्यूनस आयर्स के एस्टाडियो मोनुमेंटल में 6 अक्टूबर की रात अर्जेंटीना ने बेनिन को 3-0 से हराया। मेसी ने एक गोल किया और दो गोल में असिस्ट दिया। लेकिन उस रात स्कोर से ज्यादा महत्वपूर्ण था वह पल, जब दुनिया ने अर्जेंटीना की नीली-सफेद जर्सी में मेसी को आखिरी बार देखा। 39 साल की उम्र में उन्होंने 21 साल लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर पर विराम लगा दिया।

 

स्टेडियम में 85 हजार से ज्यादा लोग थे। 10वें मिनट में उनके नंबर 10 के सम्मान में तालियां बजीं। मैदान पर ‘Gracias’ लिखी विशाल जर्सी रखी गई। मैच खत्म होने के बाद आसमान में ड्रोन शो हुआ और हर तरफ एक ही भावना थी- धन्यवाद, लियो।

 

यह विदाई इसलिए भी भारी थी क्योंकि मेसी ने सिर्फ अर्जेंटीना के लिए फुटबॉल नहीं खेला। उन्होंने एक पूरी पीढ़ी की फुटबॉल की कल्पना को आकार दिया।

 

मेसी से दुनिया प्यार क्यों करती है?

इस सवाल का जवाब उनके गोल, ट्रॉफियों और रिकॉर्ड से कहीं बड़ा है। मेसी से प्यार करने के लिए अर्जेंटीना का होना जरूरी नहीं। उनके प्रशंसक दुनिया के लगभग हर कोने में हैं, क्योंकि उनके खेल में कुछ ऐसा था जो भाषा और देश की सीमाओं से बाहर चला जाता था।

 

गेंद उनके पास आती थी और अचानक खेल की रफ्तार बदल जाती थी। वह तीन खिलाड़ियों के बीच से निकल जाते थे। किसी को उम्मीद नहीं होती थी कि वह पास देंगे, लेकिन गेंद बिल्कुल सही जगह पहुंच जाती थी। कभी वह खुद गोल कर देते और कभी ऐसा पास देते कि साथी खिलाड़ी के लिए गोल करना सबसे आसान काम रह जाता।

 

उनका सबसे बड़ा हुनर शायद यही था कि वह उस चीज को पहले देख लेते थे, जिसे बाकी खिलाड़ी बाद में देख पाते थे।

 

मेसी ने फुटबॉल को जटिल नहीं बनाया। उन्होंने उसे आसान दिखाई देने वाला बना दिया। यही महान कलाकार की पहचान होती है।

 

उनके खेल में एक कलाकार क्यों नजर आता था?

मेसी को सिर्फ महान फुटबॉलर कहना उनके खेल के साथ थोड़ा अन्याय है। उनके पैरों में गेंद होती थी तो मैदान किसी कैनवास की तरह लगता था। डिफेंडर रंग थे, गेंद ब्रश और गोलपोस्ट अंतिम तस्वीर।

 

लेकिन इस कला में सबसे खूबसूरत बात उनकी सहजता थी। मेसी कभी-कभी ऐसे चलते हुए दिखाई देते थे जैसे खेल उनके लिए बहुत धीमा हो। फिर एक क्षण में वह गति बदलते और पूरी डिफेंस लाइन पीछे छूट जाती।

 

उनकी ड्रिब्लिंग में ताकत से ज्यादा संतुलन था। उनके पास में दिखावे से ज्यादा समझ थी। उनके गोल में सिर्फ शॉट नहीं, कोण और टाइमिंग की समझ थी। और उम्र बढ़ने के साथ यह कला खत्म नहीं हुई।

 

शरीर पहले जैसा तेज नहीं रहा, लेकिन दिमाग और बायां पैर अब भी खेल को पढ़ते रहे। 2026 विश्व कप में 39 की उम्र में भी वह अर्जेंटीना की टीम का हिस्सा रहे और छह विश्व कप खेलने वाले खिलाड़ियों में शामिल हुए। यही मेसी की सबसे बड़ी खूबी थी कि उन्होंने अपनी उम्र के साथ खेलना सीख लिया।

 

महानता की राह आसान नहीं थी

आज जिस मेसी को अर्जेंटीना में लगभग देवता जैसा सम्मान मिलता है, उनके लिए यह रिश्ता हमेशा इतना आसान नहीं था। एक समय था जब उन पर आरोप लगता था कि वह क्लब के लिए तो सब कुछ कर सकते हैं, लेकिन अर्जेंटीना के लिए नहीं।

 

2014 विश्व कप का फाइनल हारना, 2015 और 2016 में कोपा अमेरिका के फाइनल में हारना और लगातार बढ़ता दबाव, इन सबने मेसी को भीतर तक प्रभावित किया। 2016 में कोपा अमेरिका फाइनल हारने के बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल से संन्यास तक घोषित कर दिया था।

 

लेकिन वह लौटे। और फिर वही वापसी उनकी कहानी का सबसे खूबसूरत हिस्सा बन गई।

 

2021 में अर्जेंटीना ने कोपा अमेरिका जीता। मेसी ने पहली बड़ी सीनियर अंतरराष्ट्रीय ट्रॉफी उठाई। अगले साल कतर में विश्व कप मिला। 2024 में एक और कोपा अमेरिका खिताब आया।

 

जिस खिलाड़ी पर कभी सवाल उठते थे कि वह अर्जेंटीना को कुछ नहीं दे पाया, वही बाद में देश के सबसे बड़े फुटबॉल नायक बन गया।

 

शायद इसी वजह से उनकी कहानी इतनी मानवीय है। वह हमेशा जीतते हुए खिलाड़ी नहीं थे। वह हारकर वापस आने वाले खिलाड़ी थे।

 

विश्व कप ने कहानी पूरी कर दी

मेसी के करियर की सबसे बड़ी कमी लंबे समय तक यही कही जाती रही कि उनके पास विश्व कप नहीं है। उनकी तुलना बार-बार डिएगो माराडोना से होती थी। हर हार के बाद सवाल उठता था कि क्या मेसी कभी वह कर पाएंगे, जो माराडोना ने 1986 में किया था।

 

फिर 2022 आया। कतर के फाइनल में अर्जेंटीना और फ्रांस आमने-सामने थे। वह मैच आज फुटबॉल इतिहास के सबसे यादगार फाइनल में गिना जाता है। 

 

अर्जेंटीना विश्व चैंपियन बना। मेसी के हाथ में विश्व कप था। उस पल के बाद उनकी महानता को साबित करने के लिए किसी तर्क की जरूरत नहीं रह गई। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि विश्व कप जीतने के बाद भी उन्होंने खेलना बंद नहीं किया।

 

2026 में उन्होंने अपना छठा विश्व कप खेला। अर्जेंटीना फाइनल तक पहुंचा, लेकिन स्पेन से हार गया। पराजय के बावजूद मेसी की कहानी अधूरी नहीं हुई। क्योंकि उनके पास वह ट्रॉफी पहले से थी, जिसका इंतजार उनके करियर के सबसे कठिन वर्षों में हुआ था।

 

आखिरी मैच में भी वही मेसी

बेनिन के खिलाफ आखिरी मैच में शायद सबसे खूबसूरत बात यही थी कि मेसी ने विदाई को औपचारिकता नहीं बनने दिया। उन्होंने निकोलस ओटामेंडी के गोल में मदद की। फिर निको पाज के गोल के लिए असिस्ट दिया और 71वें मिनट में पेनल्टी पर खुद गोल किया।

 

यानी आखिरी बार भी उन्होंने वही किया, जो पूरी जिंदगी करते आए थे, खेल को अपने आसपास बेहतर बनाना।

 

एक गोल। दो असिस्ट। और 3-0 की जीत। उनका अर्जेंटीना करियर 208 मैचों और 126 अंतरराष्ट्रीय गोलों के साथ खत्म हुआ। वह देश के सबसे ज्यादा मैच खेलने वाले और सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी बनकर विदा हुए।

 

लेकिन आंकड़ों से ज्यादा महत्वपूर्ण वह दृश्य था, जब अंतिम सीटी के बाद मेसी भावुक होकर मैदान पर खड़े थे। उनकी आंखों में आंसू थे। शायद इसलिए कि इस बार वह जानते थे कि अब वापस आने का कोई अगला मैच नहीं है।

 

मेसी की सबसे बड़ी विरासत क्या है?

ट्रॉफियां? गोल? रिकॉर्ड? आठ बैलन डी’ओर? निश्चित तौर पर ये सब उनकी महानता का हिस्सा हैं। लेकिन मेसी की सबसे बड़ी विरासत शायद इससे आगे है।

 

उन्होंने दुनिया को बताया कि फुटबॉल सिर्फ ताकत और रफ्तार का खेल नहीं है। इसमें कल्पना भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने एक बच्चे को दुनिया का सबसे बड़ा फुटबॉल स्टार बनने की कहानी दी। उन्होंने लाखों बच्चों को यह सपना देखने की वजह दी कि गेंद को पैरों के करीब रखकर भी दुनिया जीती जा सकती है।

 

उन्होंने यह भी सिखाया कि महानता हमेशा शोर नहीं करती। मेसी मैदान पर बहुत कम बोलते थे। गेंद उनके लिए बोलती थी।

 

अब फुटबॉल कितना सूना होगा?

फुटबॉल खत्म नहीं होगा। नए खिलाड़ी आएंगे। नए सितारे बनेंगे। कोई अगला बड़ा गोल करेगा, कोई अगला रिकॉर्ड तोड़ेगा। लेकिन मेसी जैसा खिलाड़ी बार-बार नहीं आता। अब वह इंतजार नहीं होगा कि गेंद मेसी के पास कब आएगी।

 

वह क्षण नहीं होगा जब स्टेडियम में अचानक हजारों लोग एक साथ खड़े हो जाएं क्योंकि उन्हें पता है कि कुछ असाधारण होने वाला है।

 

कोई डिफेंडर उनके सामने खड़ा होगा, मेसी उसे देखेंगे, एक छोटा सा मूवमेंट होगा और अगले ही पल पूरा खेल बदल जाएगा। उस अनुभव का कोई विकल्प नहीं है।

 

अर्जेंटीना के लिए तो यह खालीपन और बड़ा है। मेसी अब सिर्फ टीम के कप्तान नहीं थे। वह उस टीम की पहचान बन चुके थे जिसने लंबे इंतजार और निराशाओं के बाद दुनिया को फिर अपने साथ खड़ा किया।

 

यह अंत नहीं, एक अध्याय का अंत है

मेसी ने अर्जेंटीना की जर्सी उतार दी है। फुटबॉल नहीं। वह क्लब फुटबॉल में इंटर मियामी के साथ खेलते रहेंगे। लेकिन अर्जेंटीना के नंबर 10 के रूप में उनकी कहानी अब पूरी हो चुकी है। और शायद यही इस विदाई की खूबसूरती है।

 

उन्होंने तब विदा ली, जब लोग यह नहीं पूछ रहे थे कि मेसी कब रिटायर होंगे? लोग पूछ रहे थे कि मेसी अभी क्यों रिटायर हों? क्योंकि उम्र ने उन्हें रोका नहीं था। आखिरी मैच में भी वह गोल कर रहे थे, असिस्ट दे रहे थे और खेल को अपनी शर्तों पर प्रभावित कर रहे थे।

 

लेकिन हर महान कहानी का एक अंतिम पन्ना होता है। मेसी का वह पन्ना ब्यूनस आयर्स में लिखा गया। आसमान में उनके नाम की रोशनी थी। स्टेडियम में हजारों आवाजें थीं। आंखों में आंसू थे। और अर्जेंटीना की नीली-सफेद जर्सी में एक आखिरी बार वही नंबर चमक रहा था- 10।

 

कुछ खिलाड़ी फुटबॉल खेलते हैं। कुछ खिलाड़ी फुटबॉल जीतते हैं। और कुछ ऐसे होते हैं, जिनके जाने पर लगता है कि फुटबॉल का एक हिस्सा अपने साथ चला गया। लियोनेल मेसी उसी आखिरी श्रेणी के खिलाड़ी हैं।