Janmashtami Laddu Gopal Puja Vidhi: भगवान विष्णु के सभी अवतारों में कृष्णावतार सबसे लोकप्रिय और मोहक माना जाता है। यही वजह है कि भगवान के इस अवतार के जन्मोत्सव का पर्व भी अत्यंत उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु ने भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को श्रीकृष्ण ने देवकी और वासुदेव के आठवें पुत्र के रूप में जन्म लिया था। माना जाता है कि श्रीकृष्ण का जन्म मध्यरात्रि को रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इसलिए भगवान के भक्त हर साल भाद्रपद कृष्ण अष्टमी तिथि को मध्यरात्रि में श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव मनाते हैं। इस साल जन्माष्टमी का पर्व कल यानी 4 सितंबर को मनाया जाएगा। इस दिन भगवान कृष्ण के बाल रूप लड्डू गोपाल का श्रृंगार किया जाता है और निशिता काल में विशेष पूजा की जाती है। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर निशिता काल में लड्डू गोपाल के जन्म, अभिषेक और श्रृंगार की प्रामाणिक पूजा विधि निम्न प्रकार है:
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की तैयारी
पूजा स्थान : चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं और उस पर फूलों व मोर पंख से झूला या आसन सजाएं।
सामग्री : पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल), खीरा (डंठल व पत्ती वाला), नए वस्त्र, आभूषण, चंदन, अक्षत, तुलसी दल, माखन-मिश्री, धनिया पंजीरी और आरती की थाली तैयार रखें।
जन्मोत्सव और खीरा चीरने की विधि
- मध्यरात्रि में खीरे के ऊपरी हिस्से को सिक्के या चाकू से काटकर बाल गोपाल का ‘नाल छेदन’ (जन्म का प्रतीक) करें।
- ‘नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की’ के जयकारों के साथ शंख और घंटी बजाकर कान्हा के प्राकट्य का स्वागत करें।
पंचामृत और शुद्ध जल से अभिषेक
- लड्डू गोपाल को एक बड़े पात्र (परात) में विराजमान करें।
- सबसे पहले गंगाजल अर्पित करें, फिर क्रम से दूध, दही, शुद्ध देसी घी, शहद और शक्कर (या पंचामृत मिश्रण) से “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करते हुए स्नान कराएं।
- अंत में हल्के गुनगुने या साफ जल से इत्र मिलाकर अच्छी तरह स्नान कराएं और साफ तौलिए से पोंछें।
इस तरह करें लड्डू गोपाल का श्रृंगार
- कान्हा को नए सुंदर पीले या रंगीन वस्त्र (पीतांबर) पहनाएं।
- माथे पर चंदन और रोली का तिलक लगाएं तथा अक्षत (चावल) चढ़ाएं।
- मुकुट, वैजयंती माला, बाजूबंद, कड़े, कुंडल और कमरधनी पहनाएं।
- उनके हाथ में बांसुरी सजाएं और मुकुट में मोर पंख अवश्य लगाएं।
भोग और आरती
- कान्हा को प्रिय माखन-मिश्री, धनिया पंजीरी, ऋतु फल और मिठाइयों का भोग लगाएं।
- प्रत्येक भोग सामग्री में तुलसी दल (तुलसी का पत्ता) जरूर रखें, क्योंकि इसके बिना भगवान भोग स्वीकार नहीं करते।
- कपूर और घी का दीपक जलाकर बाल गोपाल की आरती गाएं।
- पूजा और आरती के बाद लड्डू गोपाल को प्रेमपूर्वक सजाए गए झूले पर विराजमान करें।
- भक्ति भाव से उन्हें झूला झुलाएं, क्षमा प्रार्थना करें और परिवार के सुख-समृद्धि की कामना करते हुए सभी में प्रसाद बांटें।

