
अभ्यास मैच के बाद कोलंबो टेस्ट के तीसरे दिन सारांश जैन श्रीलंकाई विकेट निकालने में विफल रहे। कल शाम को पगबाधा का एक निर्णय उनके पक्ष में गया लेकिन रिव्यू ने बल्लेबाज को बचाया। आज सुबह भी ठीक ऐसा ही हुआ। इसके बाद उनके ओवर में सोनल दिनूशा ने 12 रन बटोरे और लाहिरू ने भी चौका जड़ा।
ऐसा लग रहा था कि फॉलोऑन बचाने के लिए जरूरी 14 रन श्रीलंका बना लेगी। लेकिन सारांश जैन ने लाहिरू को ध्रुव जुरेल के हाथों कैच आउट करा अपना पहला टेस्ट विकेट लिया और उसके बाद शतकवीर सोनल दिनूशा को भी आउट कर आत्मविश्वास पाया। उन्होंने 20 ओवर में 69 रन दिए। दूसरी पारी में भी उन्होंने डिकवेला को पगबाधा आउट किया।
– 33 years old.
– Came as a replacement.
– Worked hard for years in Domestics.Getting the Indian Cap, taking the maiden International wicket, A dream moment for Saransh Jain pic.twitter.com/ueBtAsk9Dj
— Johns. (@CricCrazyJohns) August 26, 2026
चंद्रकांत पंडित की कोचिंग में मध्य-प्रदेश की रणजी ट्रॉफी विजेता टीम के प्रमुख सदस्य रहे लंबे कद के Off-Spinner सारांश ने हाल ही में भारत A के श्रीलंका दौरे के दौरान शानदार प्रदर्शन करते हुए दो मैचों में छह विकेट लेने के साथ एक पारी में नाबाद 70 रन भी बनाए थे।
दिलचस्प बात यह है कि सारांश के पिता सुबोध भी मध्य प्रदेश के पूर्व ऑफ-स्पिनर रहे हैं और उनको यह बात सालती रही कि वह राष्ट्रीय टीम में जगह नहीं बना सके। लेकिन उन्होंने अपनी असफलता पर चिंतन करने से बेहतर बेटे की कुशलता पर मेहनत करना समझा। वह ही अपने बेटे के कोच है।
सारांश के पिता सुबोध ने 9 रणजी ट्रॉफी मैचों में 23 विकेट लिए थे। उन्होंने अपने बेटे को कोचिंग देनी शुरु की लेकिन भारतीय टेस्ट गेंदबाजी क्रम खासकर स्पिन गेंदबाजी का- इतना सुदृढ़ था कि इसका किला भेदना असंभव था। रविचंद्रन अश्विन, रविंद्र जड़ेजा ही टीम के लिए इतने विकेट निकाल देते थे कि कुलदीप यादव तक के 10 साल के करियर में 19 मैच हैं।
ऐसे में सारांज को 30 प्लस के बाद जाकर मौका मिला। अमूमन भारतीय चयनकर्ता इतनी उम्र के बाद किसी पर मेहरबान नहीं होते। लेकिन सारांश जैन का केस अलग था।


