मध्यप्रदेश में सिस्टम के खिलाफ मुखर हो रहे जेन-जी से जेन-अल्फा तक, स्कूलों के मर्जर के खिलाफ खोला मोर्चा

मध्यप्रदेश में सिस्टम के खिलाफ मुखर हो रहे जेन-जी से जेन-अल्फा तक, स्कूलों के मर्जर के खिलाफ खोला मोर्चा

दिल्ली के जंतर-मंतर पर जेन-जी के आंदोलन के अब मध्यप्रदेश में जेन-जी और जेन-अल्फा सिस्टम के खिलाफ पूरी मुखरता के साथ अपनी आवाज बुलंद करने लगे है। इन दिनों मध्यप्रदेश में जेन-जी और जेन-अल्फा के विरोध का नया ट्रेंड दिख रहा है। स्कूली बच्चे आंदोलन कर नेतृत्व कर रहे है और सरकार की नीतियों और फैसलों पर सवाल उठा रहे है। ताजा मामला भोपाल में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए स्कूलों बच्चों के प्रदर्शन का है। राजधानी के नीलम पार्क में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए स्कूली बच्चों ने स्कूलों के मर्जर के खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन किया। इससे पहले उज्जैन में इसी तरह का प्रदर्शन देखने को मिल चुका है।
 
गांवों के स्कूलों के मर्जर का विरोध-प्रदेश में सरकारी स्कलों के मर्जर के खिलाफ रविवार को नीलम पार्क में जेन अल्फा का बड़ा प्रदर्शन देखने को मिला। नीलम पार्क में प्रदेश भर के अलग-अलग जिलों से स्कूली बच्चे मर्जर के खिलाफ धरना दिया और एक अलग ही अंदाज में अपना विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन करने पहुंचे बच्चों ने मांग की कि सरकार की तरफ से स्कूलों क मर्जर का जो फैसला लिया जा रहा है उसके चलते काफी परेशानियां हो रही है।

गांव-गांव में चल रहे स्कूलों का सांदीपनी स्कूल में मर्जर किया जा रहा है सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों का जबरन ट्रांसफर सांदीपनि स्कूलों में किया जा रहा है। बच्चों का कहना है कि संदीपनि स्कूल गांव से काफी दूर है और इसके लिए उन्हें कही-कही 10 से 15 किलोमीटर दूर पढ़ने  के लिए जाना पड़ा रहा है। बच्चों की मांग है कि स्कूलों को मर्जर करने का फैसला वापस लिया जाए और उन्हें गांव के स्कूलों में ही पढ़ने का मौका दिया जाए।
 
ऐसा नहीं स्कूलों के मर्जर के खिलाफ यह कोई पहला प्रदर्शन हुआ है। भोपाल में इसी माह 18 अगस्त को डीएमएस को केवी में मर्ज करने के खिलाफ बच्चों ने सड़क पर उतरकर अपना विरोध दर्ज कराया था। भोपाल में एनसीईआरटी के डेमोंस्ट्रेशन मल्टीपर्पज स्कूल (डीएमएस) को केंद्रीय विद्यालय में मर्ज करने के प्रस्ताव के खिलाफ विद्यार्थी सड़क पर उतरे। 'सेव डीएमएस' के पोस्टर लेकर स्कूल की अलग पहचान बचाने की मांग की और ज्ञापन सौंपा था। ।
 
वहीं दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शन के बाद उज्जैन में शासकीय सराफा कन्या हायर सेकेंडरी स्कूल को 6 किमी दूर दाउदखेड़ी शिफ्ट करने के प्रस्ताव के विरोध सैकड़ों छात्राएं कलेक्ट्रेट पहुंच कर अपना विरोध दर्ज जताया था। बच्चों के  प्रदर्शन के बाद प्रशासन ने स्कूलों की शिफ्टिंग रोक दी।
 
जेन-अल्फा के विरोध प्रदर्शन पर सियासत- भोपाल में स्कूलों के मर्जर के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शन पर अब सियासत भी गर्मा गई है। विपक्षी दल कांग्रेस ने बच्चों के साथ आते हुए स्कूलों के मर्जर पर सवाल उठा दिए। पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल ने कहा कि जिन हाथों में पढ़ने के लिए कॉपी किताब होनी चाहिए उनमें आंदोलन के बैनर पोस्टर हैं। यह मध्य प्रदेश और देश का दुर्भाग्य है। कांग्रेस ने टीला, गांव स्तर पर स्कूल बनाने का काम किया। भाजपा की सरकारे उन्हें खत्म कर रही हैं। शालाओं में इंफ्रास्ट्रक्चर और टीचर्स नहीं है। कांग्रेस ने हर जिले ब्लॉक और गांव में स्कूल खोलने का काम किया। भाजपा सरकार इन स्कूलों को बंद करने का काम कर रही है। यह देश और प्रदेश के भविष्य के लिए अच्छे संकेत नहीं है।
 
वहीं भाजपा प्रवक्ता हितेश वाजपेयी ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस के समय मजरे टोले में स्कूल इसलिए खोले जाते थे की कांग्रेस सरकार में सड़के नहीं थी अब सड़के गांव-गांव तक पहुंच चुकी है। परिवहन सुविधा काफी बेहतर है। गांव-गांव तक सरकार की तरफ से बस सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है बेहतर शिक्षा के लिए हम सीएम राइज और सांदीपनि स्कूल खोल रहे हैं जहां पर आधुनिक शिक्षा दी जा रही है।