
देश में चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच ब्राजील से आने वाली खेप राहत दे सकती है। राष्ट्रीय सहकारी चीनी कारखाना महासंघ (NFCSF) के प्रमुख प्रकाश नाइकनवारे ने आज कहा कि चीनी की कुछ खेप 15 अक्टूबर से पहले भारत पहुंच सकती हैं, लेकिन इस समय यह अनुमान लगाना मुश्किल है कि कितनी मात्रा में चीनी आएगी। उन्होंने कहा कि फिलहाल ब्राजील ही चीनी आयात का व्यावहारिक स्रोत है। नाईकनावारे ने कहा कि देश में हर महीने करीब 22 लाख टन चीनी की खपत होती है। नवंबर तक भी 15 से 20 लाख टन चीनी उपलब्ध रह सकती है।
देश में चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच ब्राजील से आने वाली खेप राहत दे सकती है। राष्ट्रीय सहकारी चीनी कारखाना महासंघ (NFCSF) के प्रमुख प्रकाश नाइकनवारे ने आज कहा कि चीनी की कुछ खेप 15 अक्टूबर से पहले भारत पहुंच सकती हैं, लेकिन इस समय यह अनुमान लगाना मुश्किल है कि कितनी मात्रा में चीनी आएगी। उन्होंने कहा कि फिलहाल ब्राजील ही चीनी आयात का व्यावहारिक स्रोत है।
नाईकनावारे ने कहा कि देश में हर महीने करीब 22 लाख टन चीनी की खपत होती है। नवंबर तक भी 15 से 20 लाख टन चीनी उपलब्ध रह सकती है। इसी दौरान शुरुआती पेराई से नई चीनी भी बाजार में आने लगेगी। उपलब्धता की स्थिति को देखते हुए चीनी की कमी को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है।
उन्होंने कहा कि मिल स्तर पर कीमतें माल एवं सेवा कर (जीएसटी) को छोड़कर 65-67 रुपए प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई थीं, जो शनिवार को हुई निविदाओं में 5 रुपए प्रति किलोग्राम घट गईं। उनका अनुमान है कि राज्यों में निगरानी बढ़ने के साथ अगले सप्ताह भी कीमतों में नरमी जारी रहेगी।
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सरकार ने 20 अगस्त को घरेलू बाजार में बढ़ती कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए 10 लाख टन तक कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी थी। ब्राजील से भारतीय बंदरगाहों तक चीनी पहुंचने में आमतौर पर 40-45 दिन लगते हैं। इसके बाद बंदरगाह से चीनी मिल तक माल पहुंचने में भी समय लगता है।
महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, गुजरात और आंध्र प्रदेश जैसे बंदरगाह वाले राज्यों को आयातित कच्ची चीनी उत्तरी राज्यों की तुलना में जल्दी मिलने की संभावना है। सरकार ने घरेलू उपलब्धता बढ़ाने और कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए 13 मई को 30 सितंबर तक चीनी के निर्यात पर रोक लगा दी थी।
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विपक्षी दल पेट्रोल में एथनॉल मिश्रण बढ़ाने की नीति को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साध रहे हैं। उनका आरोप है कि इस नीति के कारण चीनी की कीमतें बढ़ रही हैं और आम लोगों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ रहा है। सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कीमतें बढ़ाने के लिए चीनी उद्योग को जिम्मेदार ठहराया है।
सरकार के मुताबिक, वर्तमान में चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी कई कारकों के संयोजन के कारण हुई है। इनमें घरेलू उत्पादन का अनुमान से कम होना, त्योहारी मौसम से पहले मांग में बढ़ोतरी, मौसम संबंधी कारणों से गन्ने की फसल को नुकसान, ग्लोबल स्तर पर चीनी की आपूर्ति में कमी और उद्योग के कुछ वर्गों द्वारा सट्टेबाजी और जमाखोरी शामिल हैं।
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इस बीच चीनी की जमाखोरी और कीमतों में तेजी को लेकर सरकार की सख्ती का असर भी दिखने लगा है। अब नजर इस बात पर है कि आयातित चीनी कितनी जल्दी बाजार तक पहुंचती है और क्या इससे आम लोगों को महंगी चीनी से बड़ी राहत मिलेगी?


