
15 अगस्त भारत के लिए केवल एक पर्व नहीं, बल्कि देशभक्ति और बलिदान का प्रतीक है। हमारा राष्ट्रध्वज तिरंगा देश के गौरव और अखंडता का प्रतिनिधित्व करता है। इसके सम्मान, उपयोग और संरक्षण के लिए भारत सरकार ने 'भारतीय ध्वज संहिता 2002' बनाई है, जिसका पालन करना हर नागरिक का कर्तव्य है।
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स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के मुख्य अंतर
फहराने का तरीका: 15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस) को झंडे को नीचे से खींचकर ऊपर ले जाया जाता है और फिर फहराया जाता है, जिसे ध्वजारोहण (Flag Hoisting) कहते हैं। वहीं 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) को झंडा ऊपर ही बंधा रहता है और उसे खोलकर फहराया जाता है, जिसे झंडा फहराना (Flag Unfurling) कहते हैं।
मुख्य अतिथि: 15 अगस्त पर देश के प्रधानमंत्री (केंद्र सरकार के प्रमुख) लाल किले से ध्वजारोहण करते हैं। 26 जनवरी पर राष्ट्रपति (देश के संवैधानिक प्रमुख) कर्तव्य पथ (राजपथ) पर झंडा फहराते हैं।
समारोह का स्वरूप: गणतंत्र दिवस पर देश अपनी सैन्य ताकत और सांस्कृतिक विविधता का भव्य प्रदर्शन करता है, जिसमें मुख्य अतिथि भी शामिल होते हैं। स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री का संबोधन मुख्य आकर्षण होता है।

तिरंगे के रंग और उनका महत्व
केसरिया: साहस और बलिदान।
सफेद: शांति और सत्य।
हरा: समृद्धि और विकास।
अशोक चक्र: न्याय और निरंतर प्रगति (24 तीलियां)।
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ध्वज संहिता के अनुसार जरूरी नियम
आकार व अनुपात: ध्वज हमेशा आयताकार होना चाहिए और इसकी लंबाई व चौड़ाई का अनुपात 3:2 होना अनिवार्य है।
सामग्री: तिरंगा केवल कपड़े (सूती, रेशमी, खादी या पॉलिएस्टर) का होना चाहिए, प्लास्टिक का इस्तेमाल प्रतिबंधित है।
सही स्थिति: सबसे ऊपर केसरिया, बीच में सफेद और नीचे हरा रंग होना चाहिए। ध्वज कटा-फटा, गंदा या झुका हुआ नहीं होना चाहिए।
समय: ध्वज सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच फहराया जाता है। यदि रात में फहराना हो, तो उस पर पर्याप्त रोशनी का प्रबंध होना चाहिए।
स्थान व अन्य ध्वज: तिरंगा हमेशा अन्य झंडों से ऊपर और सम्मानजनक स्थान पर होना चाहिए।
इन गलतियों से बचें (अपमान पर सजा का प्रावधान)
- तिरंगे का उपयोग कपड़ों, सजावट, मेजपोश या किसी वस्तु/व्यक्ति को ढकने के लिए नहीं किया जा सकता।
- इसे कभी जमीन से नहीं छूने देना चाहिए और इस पर कुछ भी लिखना मना है।
नोट करें: 'राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम 1971' की धारा 2 के तहत तिरंगे का अनादर या अपमान करने पर 3 साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है।


