
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन पर मंगलवार को पहली बार प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें 2029 के लोकसभा चुनाव में एक बार फिर करारी हार का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए। शाह ने दावा किया कि देश की जनता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के साथ है।
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अमित शाह ने कांग्रेस की राजनीति को नकारात्मक बताते हुए कहा कि केवल मीडिया कार्यक्रमों और आरोपों के जरिए जनता का विश्वास नहीं जीता जा सकता। उनके मुताबिक, कांग्रेस को आत्ममंथन करने और लोगों से जुड़ने की जरूरत है। उन्होंने हाल के उपचुनावों और विभिन्न राज्यों के स्थानीय निकाय चुनावों में कांग्रेस के प्रदर्शन का भी जिक्र किया।
‘राहुल गांधी को आत्ममंथन करने की जरूरत’
अमित शाह ने कहा कि राहुल गांधी के कांग्रेस के प्रमुख नेता, पार्टी अध्यक्ष और अब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष बनने के बाद से पार्टी लगातार चुनाव हारती रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को यह समझने की जरूरत है कि जनता का भरोसा कैसे हासिल किया जाए।
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शाह ने SIR को लेकर राहुल गांधी के आरोपों पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह प्रक्रिया 2024 के बाद शुरू हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी और उनके सहयोगी घुसपैठियों के नाम मतदाता सूची में दर्ज कराने की कोशिशों से जुड़े मुद्दों पर जवाब दें। ये आरोप अमित शाह के बयान का हिस्सा हैं।
गृह मंत्री ने कहा कि 2029 के आम चुनाव में NDA को बड़े बहुमत से जीत मिलने की उम्मीद है और कांग्रेस को लगातार चौथी बार हार का सामना करना पड़ सकता है। यह शाह का राजनीतिक दावा है, चुनाव का परिणाम नहीं।
SIR के खिलाफ विपक्ष का प्रदर्शन, सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला
अमित शाह का यह बयान ऐसे समय आया है, जब SIR और कथित ‘वोट चोरी’ के आरोपों को लेकर विपक्षी दल और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। सोमवार को विपक्षी नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और नागरिक समाज के सदस्यों ने दिल्ली में ‘मार्च फॉर डेमोक्रेसी’ निकाला। मार्च के दौरान सुरक्षा के मद्देनजर रास्ते पर बैरिकेडिंग की गई। विपक्षी दलों ने SIR और कथित चुनावी अनियमितताओं को लेकर संयुक्त याचिका भी दायर की।
मार्च में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी, CPI नेता डी. राजा, CPI(M) नेता एम. ए. बेबी, RJD नेता तेजस्वी यादव और NCP-SCP नेता सुप्रिया सुले सहित कई नेता शामिल हुए।
मंगलवार को राहुल गांधी ने INDIA गठबंधन के नेताओं के साथ अपने आवास पर बैठक भी की। बैठक के बाद विपक्षी गठबंधन ने कहा कि वह अपना विरोध जारी रखेगा और ‘वोट चोरी’ के आरोपों को लेकर लड़ाई को उसके तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाएगा।
‘भीड़ जुटाने से कोई देश की आवाज नहीं बन जाता’
अमित शाह ने विपक्षी मार्च पर टिप्पणी करते हुए कहा कि 14 राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं का जुटना और करीब डेढ़ किलोमीटर के क्षेत्र में लगभग 8,000 लोगों की भीड़ इकट्ठा होना किसी नेता को पूरे देश की आवाज नहीं बना देता।
उन्होंने कहा कि देश की आवाज गांवों, खेतों, दूरदराज के पहाड़ी इलाकों, जंगलों और नदी किनारे बसे क्षेत्रों में भी है। शाह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस की वहां पहुंच कमजोर है। उन्होंने बिहार, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु सहित कई राज्यों में कांग्रेस के चुनावी प्रदर्शन का हवाला दिया।
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उपचुनावों और स्थानीय निकाय चुनावों का दिया हवाला
गृह मंत्री ने कांग्रेस की चुनावी हार का जिक्र करते हुए पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और पुडुचेरी के उपचुनावों के परिणामों का उल्लेख किया। उन्होंने असम की नगांव लोकसभा सीट के उपचुनाव में भाजपा उम्मीदवार की जीत और पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम विधानसभा सीट के परिणाम का भी हवाला दिया।
शाह के मुताबिक, गुजरात के स्थानीय निकाय चुनावों में भाजपा ने दो नगरपालिकाओं और एक नगर निगम की कुल 104 सीटों में से 90 सीटें जीतीं। उन्होंने गांधीनगर नगर निगम में भाजपा की 44 में से 38 सीटों पर जीत का भी उल्लेख किया। शाह ने दावा किया कि इन परिणामों से राज्य में भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति समर्थन का पता चलता है। उन्होंने राजस्थान के स्थानीय निकाय चुनावों और त्रिपुरा में ग्राम समिति चुनावों का भी जिक्र किया। शाह के अनुसार, त्रिपुरा में भाजपा को 77.5 प्रतिशत वोट मिले।
गृह मंत्री ने इन चुनावी नतीजों को कांग्रेस के लिए आत्ममंथन का संदेश बताया और कहा कि गुजरात में कांग्रेस 1985 के बाद से विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज नहीं कर सकी है। उन्होंने इस प्रदर्शन को SIR के बजाय भाजपा और प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता से जोड़ने का दावा किया।
गौरतलब है कि अमित शाह के बयान में विपक्ष की राजनीति और चुनावी प्रदर्शन पर भाजपा का पक्ष सामने आया है। SIR को लेकर विपक्ष की आपत्तियां और कथित चुनावी अनियमितताओं के आरोप अलग मुद्दे हैं; इन पर संबंधित पक्षों के तर्कों और आधिकारिक तथ्यों को अलग-अलग देखना जरूरी है।


