US-Iran war : ईरान का सनसनीखेज दावा- अमेरिका ने बुशेहर परमाणु संयंत्र पर किया हमला

मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। अमेरिका द्वारा ईरान पर ताजा सैन्य हमले किए जाने के बाद ईरान ने दावा किया है कि गुरुवार को अमेरिकी सेना ने बुशेहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र (Bushehr Nuclear Power Plant) को निशाना बनाया। हालांकि, अमेरिका ने अभी तक इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है और न ही हमले को स्वीकार किया है।

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ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA ने एक स्थानीय अधिकारी के हवाले से बताया कि हमला गुरुवार दोपहर के आसपास किया गया। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि इस कथित हमले में परमाणु संयंत्र को कितना नुकसान पहुंचा या कोई हताहत हुआ है। इस बीच, सोशल मीडिया पर हमले से जुड़े कई वीडियो और तस्वीरें वायरल हो रही हैं। हालांकि, इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

रूस की मदद से बना है बुशेहर परमाणु संयंत्र

बुशेहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र ईरान का प्रमुख परमाणु बिजलीघर है, जिसे रूस के सहयोग से विकसित किया गया था। यह राजधानी तेहरान से करीब 1,200 किलोमीटर दूर स्थित है। गौरतलब है कि वर्ष 2025 में अमेरिका और इजरायल के साथ 12 दिनों तक चले संघर्ष के दौरान इस संयंत्र को निशाना नहीं बनाया गया था। हालांकि, ईरान का दावा है कि इस वर्ष अब तक अमेरिका कम से कम पांच बार इस संयंत्र को निशाना बना चुका है।

 

ईरान के अनुसार, इन लगातार हमलों में संयंत्र के एक कर्मचारी की मौत भी हो चुकी है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के मुताबिक अब तक किसी भी हमले के बाद विकिरण (रेडिएशन) स्तर में वृद्धि दर्ज नहीं की गई है।

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ईरान ने अमेरिका पर साधा निशाना

 

ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने अमेरिका की आलोचना करते हुए कहा कि बुशेहर जैसे परमाणु संयंत्र पर हमला पूरे खाड़ी क्षेत्र के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। उन्होंने पहले भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा था कि यदि रेडियोधर्मी रिसाव होता है तो उसका असर तेहरान से अधिक खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के देशों की राजधानियों पर पड़ सकता है। उन्होंने ईरान के पेट्रोकेमिकल प्रतिष्ठानों पर हमलों को भी अमेरिका की रणनीति का हिस्सा बताया।

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अमेरिका ने 90 सैन्य ठिकानों पर हमले का किया दावा

 

ईरान के आरोप ऐसे समय आए हैं जब अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने घोषणा की कि उसने ईरान के खिलाफ एक और बड़े सैन्य अभियान को पूरा किया है। CENTCOM के अनुसार, अमेरिकी सेना ने 90 ईरानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, जिनमें एयर डिफेंस सिस्टम, तटीय निगरानी केंद्र, मिसाइल और ड्रोन भंडारण स्थल, नौसैनिक क्षमताएं और सैन्य लॉजिस्टिक्स ढांचा शामिल हैं।

 

अमेरिका का कहना है कि इन हमलों का उद्देश्य ईरान की होरमुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में व्यावसायिक जहाजों को निशाना बनाने की क्षमता को कमजोर करना था। दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल का परिवहन इसी समुद्री मार्ग से होता है। इससे पहले 7 जुलाई को भी अमेरिका ने ईरान के 80 सैन्य ठिकानों पर हमले किए थे। अमेरिकी सेना ने कहा कि उसकी सेनाएं हर स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

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शांति समझौते पर फिर मंडराया संकट

 

ताजा हमलों के बाद मध्य पूर्व में एक बार फिर बड़े संघर्ष की आशंका बढ़ गई है। यदि हालात और बिगड़ते हैं तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन पर इसका व्यापक असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि होरमुज जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ने से वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है और कई देशों की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

पाकिस्तान के सेना प्रमुख से अराघची की बातचीत

इसी बीच ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर से टेलीफोन पर बातचीत की। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, अराघची ने अमेरिका के ताजा हमलों की कड़ी निंदा करते हुए इसे संयुक्त राष्ट्र चार्टर और युद्धविराम से जुड़े समझौतों का उल्लंघन बताया। उन्होंने अमेरिका के 'एडवेंचरिज्म' (आक्रामक सैन्य नीति) के खिलाफ चेतावनी भी दी।