
Haldwani Shuddhikaran Controversy: हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की जनसभा के बाद हुए कथित 'शुद्धीकरण' विवाद ने अब राष्ट्रीय राजनीति में तूल पकड़ लिया है। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने इस घटना को लेकर भाजपा और आरएसएस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने इसे महज एक धार्मिक अनुष्ठान मानने से इंकार करते हुए सीधे तौर पर 'छुआछूत की संकीर्ण मानसिकता' करार दिया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से दोषियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश देने की मांग की है।
'शुद्धीकरण' छुआछूत का ही दूसरा नाम
हल्द्वानी के रामलीला मैदान में मल्लिकार्जुन खरगे की रैली के बाद हुए कथित शुद्धीकरण कांड पर राहुल गांधी ने आक्रामक रुख अपनाया है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान गांधी ने कहा कि यह देश में चल रही दो विपरीत विचारधाराओं की लड़ाई का जीता-जागता उदाहरण है— एक तरफ बाबा साहेब आंबेडकर, महात्मा गांधी और संविधान की सोच है, तो दूसरी तरफ भाजपा और आरएसएस का एजेंडा।
भारत को आजाद हुए करीब 80 साल हो गए, लेकिन आज भी देश में घड़ा छू लेने, मूंछ रखने, मूर्ति छू लेने और घोड़े पर बारात निकालने पर दलित के अत्याचार किया जाता है।
यहां तक कि देश की वर्तमान राष्ट्रपति को दिल्ली के मंदिर में अंदर तक नहीं जाने दिया गया।
हाल ही में, कांग्रेस अध्यक्ष… pic.twitter.com/sQmIJxkzic
— Congress (@INCIndia) August 29, 2026
राहुल गांधी ने स्पष्ट लहजे में कहा कि शुद्धीकरण असल में छुआछूत का ही दूसरा रूप है। जब कोई दलित नेता किसी स्थान पर जाता है और उसके बाद वहां अनुष्ठान कराकर 'पवित्रता' की बात की जाती है, तो समाज में यह विषैला संदेश दिया जाता है कि दलित अशुद्ध है। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 17 इसे गंभीर अपराध मानता है, लेकिन इसे खुलेआम अंजाम दिया जा रहा है। ALSO READ: राहुल गांधी के सामने छात्रा ने उठाया AI और Cyber Security का मुद्दा, पूछा- महंगी पढ़ाई से गरीब छात्रों का क्या होगा
जातिगत भेदभाव पर सवाल, FIR की मांग
हल्द्वानी की घटना को देश की व्यापक सामाजिक स्थिति से जोड़ते हुए कांग्रेस नेता ने कई जमीनी उदाहरण रखे। उन्होंने कहा कि आज भी कई जगहों पर दलित बच्चों से स्कूलों में झाड़ू लगवाने और शौचालय साफ कराने जैसे काम कराए जाते हैं, जिससे बाल मन पर गहरा सामाजिक भेदभाव घर कर जाता है। गांवों में आज भी दलितों को सार्वजनिक कुओं से पानी नहीं लेने दिया जाता और चाय की दुकानों पर उनके लिए अलग डिस्पोजेबल कप रखे जाते हैं।
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि सरकार की जिम्मेदारी है कि वह दलितों के स्वाभिमान की रक्षा करे। उन्होंने मांग की कि इस असंवैधानिक कृत्य में शामिल लोगों पर तुरंत आपराधिक मामला दर्ज किया जाए। उन्होंने कहा कि इस घटना को 20 दिन हो गए हैं, लेकिन अभी तक कोई एक्शन नहीं हुआ है, जो कि बहुत ही शर्मनाक है।
क्या है पूरा हल्द्वानी विवाद?
दरअसल, हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस की 'विजय शंखनाद रैली' आयोजित हुई, जिसे मल्लिकार्जुन खरगे ने संबोधित किया था। 10 अगस्त 2026 को श्री राम सेना नामक संगठन ने मैदान में हवन कर कथित 'शुद्धीकरण' किया। राहुल ने कहा कि खरगे के दलित होने के कारण जानबूझकर उनका और दलित समाज का अपमान किया गया। हालांकि, केन्द्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने घटना की निंदा करते हुए भाजपा का इससे कोई संबंध होने से इनकार किया था। दूसरी ओर, उत्तराखंड भाजपा अध्यक्ष महेंद्र भट्ट का तर्क है कि सभा में मर्यादा के विपरीत नारे लगने के कारण स्थानीय लोगों ने यह कदम उठाया।


