
विश्वकप में भारतीय महिला और पुरुष हॉकी टीम केसरिया रंग की जर्सी पहनकर मैदान पर उतरी थी। इस निर्णय से कई राजनैतिक बहस खुल गई थी और कई पुर्व हॉकी खिलाड़ियों ने इसका विरोध किया था। शायद यही कारण है कि हॉकी इंडिया ने निर्णय लिया है कि जापान के आइची-नागोया में होने वाले आगामी एशियाई खेलों में भारतीय पुरुष और महिला हॉकी टीमें परंपरागत नीली जर्सी में ही मैच खेलेंगी।
हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप टिर्की ने कहा कि भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) ने टीम किट के रंगों को लेकर विकल्प दिए थे जिसके बाद हॉकी इंडिया ने भारतीय टीम की जर्सी के लिए नीले रंग को पहली पसंद बनाया।
इन पूर्व खिलाड़ियों ने उठाया सवाल
नीदरलैंड और बेल्जियम में 15 अगस्त से शुरू हो रहे विश्व कप से पहले भारतीय टीमों की जर्सी का रंग नीले से केसरिया कर दिया गया जिसे लेकर वीरेन रासकिन्हा, परगट सिंह, वी भास्करन, धनराज पिल्लै जैसे पूर्व खिलाड़ियों ने सवाल उठाया था। वहीं मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया और विपक्षी दलों ने इस पर सरकार को आड़े हाथों लिया था।

टिर्की सहित हॉकी इंडिया के पदाधिकारियों का कल तक कहना था कि खेल के मैदान पर इस्तेमाल होने वाली नीली पिच से रंग की समानता से बचने के लिए यह पूरी तरह से तकनीकी निर्णय था।
पूर्व कप्तान रासकिन्हा ने हालांकि जर्सी का रंग बदलने के फैसले पर सवाल किया था।उन्होंने एक्स पर लिखा था ,‘‘ हॉकी इंडिया ने खेल के लिये बहुत कुछ किया है लेकिन यह निराशाजनक है। भारतीय टीम की विरासत और पहचान नीला रंग रही है। मैने कई साल तक गर्व से नीली जर्सी पहनी है। प्रशंसक हमारी टीम को नीले रंग में देखना चाहते हैं।यह भगवा का क्या तुक है।’’
उन्होंने एक्स पर लिखा था ,‘‘ हॉकी इंडिया ने खेल के लिये बहुत कुछ किया है लेकिन यह निराशाजनक है। भारतीय टीम की विरासत और पहचान नीला रंग रही है। मैने कई साल तक गर्व से नीली जर्सी पहनी है। प्रशंसक हमारी टीम को नीले रंग में देखना चाहते हैं।यह भगवा का क्या तुक है।’’

