गाजियाबाद में चलती कार में ‘क्लिनिक’, अवैध भ्रूण लिंग जांच का भंडाफोड़, 4 आरोपी गिरफ्तार

Illegal fetal sex determination racket busted in Ghaziabad

बेटियों के अधिकारों और कानून की सख्ती के बावजूद गाजियाबाद से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने समाज और प्रशासन दोनों के सामने कई असहज सवाल खड़े कर दिए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने मुखबिर की सूचना पर एक चलती कार में कथित रूप से पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन के जरिए अवैध भ्रूण का लिंग बताए जाने के मामले का खुलासा किया है। 

 

कोतवाली थाना क्षेत्र में कार संख्या UP14 FL 9355 को रोककर 4 लोगों को हिरासत में लिया गया है। आरोप है कि संदीप, सलमान, शाहिद और तस्लीम कार के अंदर ही पोर्टेबल मशीन के माध्यम से गर्भस्थ शिशु का लिंग जांच करते थे। प्रथम दृष्टया यह मामला केवल कानून के उल्लंघन का नहीं, बल्कि उस सामाजिक मानसिकता का भी आइना है, जो आज भी बेटी और बेटे के बीच भेदभाव की सोच को जीवित रखे हुए है।

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सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि यदि चलती कार के भीतर इस तरह का अवैध नेटवर्क संचालित हो रहा था, तो स्वास्थ्य विभाग की नियमित टीम कैसी निगरानी जिले में कर रही थी? साथ ही यह जानना भी आवश्यक है कि वह कब से संचालित हो रहा था और और पीसीपीएनडीटी कानून का पालन करने के लिए गठित एजेंसियों की नजर से आरोपी और उनका नेटवर्क अब तक कैसे बचा रहा?

सूत्रों के अनुसार, मुख्य आरोपी संदीप के खिलाफ पहले से कई मुकदमे दर्ज बताए जा रहे हैं। यदि यह तथ्य जांच में सही पाया जाता है, तो यह मामला केवल एक व्यक्ति के अपराध तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि निगरानी, खुफिया सूचना तंत्र और कानून के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगाएगा।

 

स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि पुलिस के सहयोग से पूरे नेटवर्क की गहनता के साथ जांच की जा रही है। आरोपियों से पूछताछ के आधार पर यह पता लगाया जा रहा है कि इस अवैध कारोबार से और कौन-कौन लोग जुड़े हैं, कितने समय से यह गतिविधि चल रही थी तथा इसके तार किन क्षेत्रों तक फैले हुए हैं?

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यह घटना केवल एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि समाज के लिए चेतावनी भी है। भ्रूण लिंग जांच पर प्रतिबंध इसलिए लगाया गया था ताकि बेटियों को जन्म लेने का समान अधिकार मिल सके। यदि अपराधी तकनीक और नए तरीकों का इस्तेमाल कर कानून को चुनौती दे रहे हैं, तो व्यवस्था को भी उतनी ही सतर्क, आधुनिक और जवाबदेह बनना होगा।

 

अब सभी की निगाहें आने वाले जांच के परिणामों और प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। वहीं जांच से यह स्पष्ट होगा कि यह मामला कुछ लोगों तक सीमित था या फिर इसके पीछे एक बड़ा संगठित नेटवर्क काम कर रहा था। फिलहाल गाजियाबाद की यह घटना प्रशासन के लिए चुनौती और समाज के लिए चिंतन का विषय है कि बेटियों को दुनिया में न लाकर लिंगानुपात का संतुलन बिगाड़ना है।
Edited By : Chetan Gour