CJI सूर्यकांत की फटकार के बाद BCI चेयरमैन ने NALSAR छात्रों से मांगी माफी, बोले- ‘मुझे खेद है’

CJI सूर्यकांत की फटकार के बाद BCI चेयरमैन ने NALSAR छात्रों से मांगी माफी, बोले- 'मुझे खेद है'

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की ओर से बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) को NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के नामांकन विवाद में दखल देने को लेकर कड़ी फटकार लगाए जाने के एक दिन बाद BCI के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने कानून के छात्रों से माफी मांगी है। उन्होंने कहा कि विवाद से जुड़ी उनकी किसी बात या पत्र से छात्रों की भावनाएं आहत हुई हैं तो उन्हें इसका “ईमानदारी से खेद है और वह माफी मांगते हैं।”

ALSO READ: कतर ने ईरान के 3 पायलटों को हिरासत में लेने से किया इनकार, तेहरान के दावे को बताया गलत

स्वतंत्रता दिवस पर “मेरे प्यारे युवा मित्रों” के नाम लिखे पत्र में मिश्रा ने कहा कि पिछले कुछ दिनों के घटनाक्रम से छात्र समुदाय के एक वर्ग में चिंता और पीड़ा पैदा हुई है। उन्होंने कहा कि जब छात्रों को किसी बात से ठेस पहुंचे या वे खुद को पीड़ित महसूस करें, तो उनकी चिंताओं को धैर्य, संवेदनशीलता और सम्मान के साथ सुना जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “अगर मौजूदा विवाद से जुड़ी मेरी किसी बात या पत्र से हमारे कानून के छात्रों की भावनाएं आहत हुई हैं, तो मुझे इसका ईमानदारी से खेद है और मैं इसके लिए माफी मांगता हूं।”

 

‘माफी मांगना प्रतिष्ठा या अहंकार का सवाल नहीं’

 

BCI चेयरमैन ने कहा कि इस बात को स्वीकार करने में किसी तरह की झिझक नहीं होनी चाहिए। उनके मुताबिक, खेद व्यक्त करना प्रतिष्ठा या अहंकार का विषय नहीं है, बल्कि यह स्वीकार करना है कि छात्रों की भावनाएं और चिंताएं महत्वपूर्ण हैं।

 

मिश्रा ने कानून के छात्रों की स्वतंत्र सोच पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज और देश के अन्य प्रमुख कानूनी शिक्षा संस्थानों में पढ़ने वाले छात्र देश के सबसे जागरूक और विवेकशील युवाओं में शामिल हैं। वे संविधान, कानून का शासन, निष्पक्षता और किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी पक्षों को सुनने के महत्व का अध्ययन करते हैं। उन्होंने कहा कि छात्रों को अपने विचार बनाने के लिए किसी दूसरे व्यक्ति के निर्णय की जरूरत नहीं है।

 

शांतिपूर्ण विरोध और असहमति छात्रों का अधिकार

 

BCI चेयरमैन ने असहमति के अधिकार को भी संवैधानिक लोकतंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण असहमति, सवाल उठाना और विरोध प्रदर्शन लोकतंत्र की महत्वपूर्ण विशेषताएं हैं और छात्रों को अपने विचार व्यक्त करने की स्वतंत्रता हमेशा मिलनी चाहिए। यह माफी CJI सूर्यकांत की उस कड़ी टिप्पणी के एक दिन बाद आई है, जिसमें उन्होंने BCI से कहा था कि उसे NALSAR विवाद में दखल देने का “कोई काम नहीं” है। CJI ने स्पष्ट किया था कि छात्रों को विरोध करने का अधिकार है, बशर्ते उनका प्रदर्शन कानूनी और शांतिपूर्ण हो।

 

सुप्रीम कोर्ट ने BCI और राज्य बार काउंसिलों पर लगाई रोक

 

CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल थे। पीठ ने BCI और सभी राज्य बार काउंसिलों को NALSAR समेत नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज या अन्य विश्वविद्यालयों के छात्रों और शिक्षकों के खिलाफ विवाद के संबंध में किसी दंडात्मक या आपराधिक कार्रवाई को आगे बढ़ाने से रोक दिया था। यह मामला NALSAR हैदराबाद की 2026 में स्नातक होने वाली बैच के नामांकन को लेकर BCI के रुख में अचानक हुए बदलाव के बाद सामने आया था।

 

BCI ने गुरुवार को पहले सभी राज्य बार काउंसिलों को अगले आदेश तक 2026 बैच के छात्रों का नामांकन रोकने का निर्देश दिया था। कुछ घंटे बाद इस रोक को वापस ले लिया गया, लेकिन उन आरोपों की जांच जारी रखी गई कि कुछ शिक्षकों और बाहरी लोगों ने छात्रों को CJI के दीक्षांत समारोह में शामिल होने के विरोध के लिए उकसाया या गुमराह किया।

 

इसके बाद शुक्रवार को मनन कुमार मिश्रा ने घोषणा की कि 2026 बैच के सभी छात्रों के खिलाफ कार्यवाही बंद की जा रही है।

 

NALSAR दीक्षांत समारोह में शामिल होना या नहीं, फैसला छात्रों का

 

BCI चेयरमैन ने NALSAR के दीक्षांत समारोह में CJI सूर्यकांत की मौजूदगी को लेकर भी छात्रों की स्वतंत्रता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि समारोह में शामिल होना या नहीं होना पूरी तरह छात्रों का अपना निर्णय होना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी छात्र को समारोह में शामिल होने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए और न ही किसी छात्र को इससे दूर रहने के लिए बाध्य महसूस करना चाहिए। छात्रों को पूरे मामले पर विचार करने के बाद स्वतंत्र रूप से निर्णय लेना चाहिए।

 

CJI को मुख्य अतिथि बनाए जाने के बाद शुरू हुआ था विवाद

 

NALSAR के कुछ छात्रों ने इस साल के दीक्षांत समारोह में CJI सूर्यकांत को मुख्य अतिथि बनाए जाने पर आपत्ति जताई थी। छात्रों ने दिल्ली में छात्र प्रदर्शनों के दौरान कथित पुलिस ज्यादती से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान CJI की कुछ टिप्पणियों का हवाला दिया था। छात्रों ने सवाल उठाया था कि CJI को दीक्षांत समारोह का निमंत्रण देना NALSAR की संवैधानिक अधिकारों, न्याय तक पहुंच और शिकायतों पर तर्कसंगत संवाद की प्रतिबद्धता के अनुरूप है या नहीं।

 

इसके बाद BCI ने NALSAR से एक प्रमाणित रिपोर्ट मांगी थी, जिसमें उन लोगों की पहचान करने को कहा गया था जिन्होंने CJI के दीक्षांत समारोह में शामिल होने के विरोध वाले अभियान को शुरू, आयोजित, समन्वित या छात्रों को इसके लिए लामबंद किया था।

 

CJI ने कहा- ‘छात्रों को अपनी आवाज उठाने का अधिकार’

 

सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता के. परमेश्वर ने इस मामले का जिक्र किया। इस पर CJI सूर्यकांत ने BCI की कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए कहा कि छात्र यदि किसी कारण या मुद्दे को लेकर विरोध करना चाहते हैं तो उन्हें इसका अधिकार है। CJI ने अपने छात्र जीवन के आंदोलनों के अनुभव का भी उल्लेख करते हुए कहा कि जब तक छात्र कानून के दायरे में और शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे हैं, तब तक उन्हें अपनी आवाज उठाने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि संस्थानों को छात्रों के प्रति उदार दृष्टिकोण रखना चाहिए और उन्हें बोलने की अनुमति देनी चाहिए। यहां तक कि यदि छात्र गलत भी हों, तब भी उन्हें अपनी बात रखने का अधिकार है।

 

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने यह भी सवाल उठाया था कि क्या NALSAR छात्रों से जुड़े इस फैसले को लेने के लिए BCI की परिषद की वास्तव में बैठक बुलाई गई थी। अदालत ने BCI से अपने जवाब में निर्णय लेने की प्रक्रिया स्पष्ट करने को कहा।

 

BCI ने टकराव के बजाय संवाद पर दिया जोर

 

शनिवार के पत्र में मनन कुमार मिश्रा ने अब टकराव के बजाय सुलह और संवाद पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका, बार, विश्वविद्यालयों और कानून के छात्रों के बीच संबंध किसी अस्थायी विवाद से कहीं ज्यादा गहरे और स्थायी हैं। उन्होंने कहा कि मतभेदों का समाधान अंततः संवाद, स्पष्टीकरण और आपसी सम्मान के माध्यम से किया जाना चाहिए। मिश्रा ने कहा कि BCI कानून के छात्रों को कानूनी पेशे का भविष्य मानता है और उनकी गरिमा, स्वतंत्र सोच तथा जायज चिंताओं का हमेशा सम्मान किया जाना चाहिए।

 

उन्होंने यह भी अपील की कि इस विवाद को बाहरी प्रभाव के कारण किसी राजनीतिक या अन्य मुद्दे का रंग नहीं दिया जाना चाहिए। छात्रों को तथ्यों की जांच करने, दिए गए स्पष्टीकरण पर विचार करने और स्वतंत्र रूप से अपना निर्णय लेने में सक्षम बताया।  उन्होंने कहा कि छात्रों को खुद इस मामले की जांच करने दें। हर संस्थान को उनकी स्वतंत्र सोच का सम्मान करना चाहिए।