
भोपाल। राजधानी के आवासीय भूखंडों पर व्यावसायिक गतिविधियों को संचालित करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त तेवर दिखाए है। बुधवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से 10 सदस्यीय समिति पर रोक लगाते हुए इसे सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हस्तक्षेप बताते हुए चेतावनी दी है कि अगर भविष्य में सरकार या किसी अधिकारी ने कोर्ट के आदेश में दखल दिया तो अवमानना की कार्रवाई की जाएगी। कोर्ट ने कहा कि पूरा मामला उसकी निगरानी में है, इसलिए सरकार समानांतर समिति नहीं बना सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने पूरे मामले पर अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि उसके आदेश पूरे देश में लागू होंगे।
सरकार के दखल के बाद रोकी गई कार्रवाई-बुधवार को सुप्रीम कोर्ट मे भोपाल नगर निगम द्वारा दाखिल एक्शन टेकन रिपोर्ट पर चर्चा हुई जिसमे नगर निगम की ओर से बताया गया की भोपाल में आवासीय परिसरों में एक हजार से अधिक अवैध निर्माण चिन्हित कर कार्यवाही की जा रही है और अब तक 100 से ज्यादा भवनों को सील किया गया है। ऑनलाइन सुनवाई के दौरान नगर निगम की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता ने कोर्ट के बताया कि हाईकोर्ट की जबलपुर पीठ द्वार जारी स्टे ऑर्डर और राज्य सरकार के हस्ताक्षेप के बाद बनी 10 सदस्यों की कमेटी ने हमारे हाथ बांध दिए है और आगे की कार्रवाई अवरुद्ध हुई है।
सुप्रीम कोर्ट ने दिखाए सख्त तेवर-सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की खंडपीठ ने सरकार के दखल पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की और टिप्पणी करते हुए कहा की ये टकराव की स्थिति निर्मित कर रहा है, यहाँ सर्वोच्च न्यायलय के स्वतः संज्ञान का महतवपूर्ण विषय है इसमें किसी प्रकार का हस्तक्षेप मंजूर नहीं है।
इस प्रकरण में अमेकस क्युरी आधिवक्ता एके सिन्हा ने बताया की नगर निगम निगम द्वारा बंद करवाए गए भवनों को पुनः खोल दिया गया है तो न्यायलय ने नाराजगी व्यक्त करते हुए तत्काल आदेश पारित किया और जबलपुर न्यायलय के द्वारा दिए गए अवैध भवनों पर कार्यवाही के स्टे ऑर्डर को तत्काल निरस्त किया साथ ही प्रदेश सरकार द्वारा निर्मित जाँच समिति के हस्तक्षेप पर अंकुश लगा दिया| सुप्रीम कोर्ट पूरे मामले पर 15 सितंबर को अगली सुनवाई करेगा। कोर्ट में अगली सुनवाई पर भोपाल नगर निगम को अब तक एक्शन रिपोर्ट और आगे की कार्ययोजना पेश करनी होगी।
भोपाल के इन रहवासी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियां-राजधानी भोपाल के अरेरा कोलोनी के साथ रोहित नगर, बावड़ियां कलां, त्रिलंगा, गौतम नगर, कोलार रोड़, नेहरु नगर, रचना नगर, साकेत नगर में बड़े पैमाने पर आवासीय भूखंडों व्यावसियक गतिविधयां संचालित हो रही है।
रहवासी क्षेत्रों में चल रही कमर्शियल एक्टिविटी को लेकर रहवासी लंबे समय से अपना विरोध दर्ज करा रहे है। संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति के तत्वाधान में हो रहे लगातार प्रदर्शन में लगातार कमर्शियल एक्टिविटी को बंद करने की मांग की जा रही है।
कैसे पूरे मुद्दें ने पकड़ा तूल?-आवासीय इलाकों में कमर्शियल एक्टिविटी को प्रतिबंध करने का पूरा मामला तमिलनाडु में आवासीय भवनों के अवैध व्यावसायिक उपयोग और बिल्डिंग बाय-लॉज (भवन उपनियमों) के उल्लंघन से शुरू हुआ था। सुप्रीम कोर्ट न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने पूरे मामले की सुनवाई करते हुए मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे देशव्यापी मुद्दा बना दिया।कोर्ट ने साफ कहा कि “रहने की जगह, व्यापार का अड्डा नहीं बन सकती”। सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की राजधानियों के नगर निगम आयुक्तों को आदेश दिया कि वे अपने क्षेत्रों में सर्वे करें और हलफनामा दायर कर बताएं कि कितने रिहायशी इलाकों का अवैध रूप से कमर्शियल इस्तेमाल हो रहा है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर क्या बोले रहवासी?-सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भोपाल के पॉश इलाके माने जाने वाले अरेरा कॉलोनी के रहवासियों ने हर्ष व्यक्त करते हुए न्यायलय का आभार जताया है। गौरतलब है कि अरेरा कॉलोनी में आवासीय भूखंडों पर बड़े पैमाने पर व्यासायिक गतिविधियां संचालित हो रही है। अरेरा कॉलोनी निवासी और याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी कहते है कि आवासीय इलाके में अवैध तरीके के व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होने से अरेरा कॉलोनी के रहवासियों का जीवन दुश्वार हो गया है। यहाँ भूमाफियाओ के लालच के चलते आम आदमी का सडक पर चलना मुश्किल हो गया है। अवैध इमारतों ने सड़को के फुटपाथ तक निगल लिए है इनके पास खुद की कोई पार्किंग न होने के कारण कॉलोनी के आए दिन अन्दर तक जाम की हालत निर्मित होते है| वहीं रहवासी लवनिश भाटी ने बताया की हम लंबे समय से कॉलोनी की बदहाली को ले कर जिला प्रशासन से गुहार लगा रहे है परन्तु नगर निगम एव अन्य जिम्मेदारो की उदासीनता के चलते भूमाफिया इतना मजबूत हुआ की मंदिर के सामने शराब की दुकान खुल गई |

