बहन के फर्जी इलाज के नाम पर क्राउड फंडिंग! X पर ट्रेंड हो रहा जय सिंह राठौर कौन?

सोशल मीडिया पर मदद की एक अपील ने कुछ ही घंटों में सैकड़ों लोगों को भावुक कर दिया। X पर Jay Singh Rathore नाम के एक यूजर ने दावा किया कि उसकी 12 साल की छोटी बहन की आंखों की रोशनी खतरे में है और उसे तत्काल इलाज की जरूरत है। पोस्ट के साथ मेडिकल दस्तावेज भी साझा किए गए थे और लोगों से छोटी-छोटी रकम, यहां तक कि ₹10 या ₹20, देने की अपील की गई थी। अपील तेजी से वायरल हुई। अगले दिन Rathore ने दावा किया कि लोगों की मदद से ₹1.5 लाख से अधिक जुट चुके हैं। इसके बाद उन्होंने भुगतान से जुड़ी जानकारी हटाते हुए कहा कि जरूरत से ज्यादा रकम मिल चुकी है।

कहानी में आया अचानक मोड़

मामला तब बदल गया, जब सोशल मीडिया यूजर्स ने पोस्ट में लगाए गए मेडिकल दस्तावेजों पर सवाल उठाने शुरू किए। खास तौर पर Shroff Eye Centre के नाम और लेटरहेड वाले दस्तावेज चर्चा में आ गए। इसके बाद अस्पताल की ओर से एक सार्वजनिक चेतावनी सामने आई। अस्पताल ने कहा कि किसी ने कथित तौर पर उसके लेटरहेड का इस्तेमाल कर फर्जी मरीज रिकॉर्ड, प्रिस्क्रिप्शन और इलाज का अनुमान तैयार किया और आर्थिक सहायता के लिए लोगों तथा संस्थाओं से संपर्क किया। यही वो क्षण था, जब मदद की अपील से शुरू हुई कहानी संदेह और सवालों के घेरे में आ गई। मामला तब बदल गया,जब सोशल मीडिया यूजर्स ने पोस्ट किया की जिवन मरन सब वहीं सिमित है।

X Spaces में आमने-सामने हुए सवाल

बढ़ते विवाद के बीच राठौर कई X Spaces में शामिल हुए। वहां यूजर्स ने उनसे मेडिकल दस्तावेजों, मरीज की पहचान और जुटाई गई रकम को लेकर सवाल किए। रिपोर्टों के मुताबिक, एक बातचीत में राठौर ने कथित तौर पर कहा कि वास्तव में उनके परिवार में उनके पिता की तबीयत खराब थी और बहन के नाम का इस्तेमाल ज्यादा ध्यान आकर्षित करने के लिए किया गया। उन्होंने इसे गलती बताया और परिवार की आर्थिक परेशानी का भी जिक्र किया। एक अन्य चर्चा में उनके “मजाक के लिए” ऐसा करने के कथित बयान की भी बात सामने आई। हालांकि, सोशल मीडिया पर सामने आए इन अलग-अलग बयानों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

पैसे लौटाने का दावा, लेकिन सवाल बरकरार

विवाद बढ़ने के बाद राठौर ने कथित तौर पर दानदाताओं को पैसा वापस करने की बात कही और कुछ भुगतान के स्क्रीनशॉट भी साझा किए। कुछ यूजर्स ने बैंक बैलेंस में बदलाव के स्क्रीनशॉट भी पोस्ट किए। लेकिन केवल बैंक बैलेंस में कमी दिखने से यह साबित नहीं होता कि रकम वास्तव में सभी दानदाताओं को वापस कर दी गई।  विवाद बढने के बाद राठैर ने कथित तौर पर ये समझ लिया कि एसा करना कितना सही है और कितना गलत।

(डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।)

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