
मध्य प्रदेश के बालाघाट ज़िले के चार दूर-दराज़ के बैगा-बहुल गांवों में 6 बच्चों की मौत होने की खबर से आसपास के इलाकों में हड़कंप सा मचा हुआ है। बच्चों की मौत के अलावा 100 के बीमार पड़ने की भी खबर है।
हेल्थ डिपार्टमेंट ने कहा कि उन्हें इन मौतों के बारे में तब पता चला जब तीन बच्चों की पहले ही मौत हो चुकी थी। सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात है कि इन बच्चों की मौत कैसे हुई इस बारे में पता नहीं चल सका है। वहीं, अधिकारियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती दूर-दराज़ के इलाकों में बच्चों को ढूंढना और उनके माता-पिता को उन्हें हॉस्पिटल ले जाने के लिए मनाना था।
यहां सबसे ज्यादा मौतें : सबसे ज़्यादा प्रभावित गांवों में से कोरका, कुंडेकासा और बोंडारी हैं। यहां कम से कम 6 मौतें हुई हैं। बोंडारी से 3 मौतें हुईं, जबकि कुंडेकासा और कोरका से एक-एक मौत हुई। इसी बीच दो और बैगा-बहुल गांवों, मछुरदा और अडोरी से भी 17 साल तक के बच्चों में बीमारी की खबर मिली है।
बालाघाट ज़िले के चीफ़ मेडिकल और हेल्थ ऑफ़िसर (CMHO) डॉ. परेश उपलाप ने मीडिया को बताया कि जिन बच्चों की मौत हुई और जिन्हें हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है, उनमें मलेरिया बुखार, स्केबीज़ स्किन इन्फेक्शन जैसे कई इंफ़ेक्शन के लक्षण दिखे हैं, साथ ही पोषक तत्वों की कमी के लक्षण भी दिखे हैं। खून और पानी के सैंपल बाद में देश भर में कई एडवांस्ड टेस्टिंग सेंटर भेजे गए हैं, जिसमें कोलकाता में ICMR इंस्टीट्यूशन और नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ वायरोलॉजी (NIV-पुणे) शामिल हैं और रिपोर्ट का इंतज़ार है।
प्रभावित गांवों में कैंप शुरू : इसके अलावा ICMR-नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर ट्राइबल हेल्थ रिसर्च (NITHR) और इंटीग्रेटेड डिज़ीज़ सर्विलांस प्रोग्राम (IDSP-भोपाल) और जबलपुर मेडिकल कॉलेज की टीमों ने भी हाल ही में प्रभावित गांवों में कैंप किया है और सैंपल लेकर लौटी हैं। हम कई इन्फेक्शन और उनसे जुड़ी छह मौतों के असली कारण का पता लगाने के लिए खास सरकारी रिसर्च संस्थानों की रिपोर्ट का इंतज़ार कर रहे हैं। कुंडेकसा के एक सरकारी स्कूल में एक टेम्पररी हेल्थ सेंटर बनाया गया है, क्योंकि वहां मामले ज़्यादा आ रहे हैं।
ये लक्षण आ रहे सामने : अब तक बालाघाट डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल में 3 साल से 17 साल के 98 मरीज़ भर्ती हुए हैं, जिनमें से 51 को इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई है। बाकी 47 मरीज़ डॉक्टरों की चौबीसों घंटे निगरानी और इलाज में हैं। डॉ. उपलाप ने कहा। बच्चों का इलाज कर रहे डॉक्टरों ने कहा कि मरीज़ों ने तेज़ बुखार, रैशेज़, लाल धब्बे, पेट दर्द और अल्सर की शिकायत की है।


