
विजयनगर में अवंतिका गैस पाइप लाइन में हुए ब्लास्ट के मामले में एक चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। इस हादसे में झुलसी एक सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर गिरि राजकुमारी उर्फ जिनी झाला ने बताया कि कैसे जब वे आग से झुलसी हुई मदद के लिए चीख रही थी तो वहां खडा कोई भी उनकी मदद के लिए आगे नहीं आया। न किसी ने उन्हें अस्पताल पहुंचाया और न ही आग बुझाने की कोशिश ही की।
विजयनगर के बॉम्बे अस्पताल में भर्ती जिनी झाला ने मीडिया को बताया कि हादसे में करीब 25 प्रतिशत तक झुलस गई है। अभी बॉम्बे हॉस्पिटल में उनका इलाज चल रहा है। उनके बाएं हाथ की सर्जरी हो चुकी है, जबकि डॉक्टरों का कहना है कि पूरी तरह स्वस्थ होने में तीन से चार महीने लग सकते हैं।
वीडियो जारी कर बयां किया दर्द : आईसीयू से एक वीडियो जारी कर जिनी ने बताया कि अगर उस वक्त वे खुद को बचाने की कोशिश नहीं करती तो वे बच नहीं पाती। जिनी ने बताया कि 23 जून की शाम वह टू-व्हीलर से अकेले अपनी नानी के घर जा रही थीं। जैसे ही वह सुमन नगर जैन मंदिर के पास पहुंचीं, अचानक धमाका हुआ। आग की लपटें उठने लगीं। वहां कोई बैरिकेडिंग नहीं थी। देखते ही देखते मैं और मेरी बाइक आग की चपेट में आ गए। मैंने लोगों से कहा- मुझ पर पानी डालो, लेकिन कोई आगे नहीं आया। सभी डरे हुए थे। सड़क पर बारिश का पानी जमा था। ऐसे में खुद ही कूदकर अपने शरीर पर पानी डालना शुरू कर दिया। कुछ देर बाद एक भैया आए। उन्होंने मुझ पर दो बाल्टी पानी डाला, तब तक मेरा पूरा बायां हाथ जल चुका था।
किसी ने अस्पताल नहीं पहुंचाया : जिनी ने बताया कि हादसे के बाद मैंने राहगीरों से अस्पताल पहुंचाने की गुहार लगाई, लेकिन कोई तैयार नहीं हुआ। मैं लगातार लोगों से कह रही थी कि अस्पताल पहुंचा दो, लेकिन लोग डर रहे थे। आखिर मैंने एक रैपिडो बाइक सवार को रोका। उनके साथ बॉम्बे हॉस्पिटल पहुंची। अस्पताल पहुंचते ही मैंने हाथ हिलाकर डॉक्टरों से कहा- जल्दी मेरा इलाज शुरू करें। बता दें कि जिनी के शरीर का एक हिस्सा और चेहरा भी बुरी तरह झुलस गया है।
सवाल यह है कि इंदौर जैसा शहर जहां इतने पढे लिखे लोग है, अपनी मदद करने की तासीर के लिए जाना जाता है, लेकिन इस केस में किसी ने पीडित लडकी की मदद नहीं की। वे देखते रहे, कुछ लोग वीडियो बनाते रहे, लेकिन कोई मदद के लिए आगे नहीं आया।
Edited By: Naveen R Rangiyal

