
Varanasi Urban Transport Ropeway: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी (काशी) को एक ऐतिहासिक सौगात मिलने जा रही है। शहर में 800 करोड़ रुपए की लागत से तैयार देश का पहला अर्बन पब्लिक ट्रांसपोर्ट रोपवे आम जनता के लिए खुलने को तैयार है। अनुमान है कि यह महत्वाकांक्षी परियोजना देव दीपावली 2026 (24 नवंबर) के आसपास शुरू कर दी जाएगी। इसके चालू होते ही वाराणसी कैंट से गोदौलिया तक का 45 मिनट का थकाऊ सफर महज 16 मिनट में तय हो जाएगा। इस सुविधा के साथ ही वाराणसी, बोलीविया के ला पाज और मैक्सिको सिटी के बाद सार्वजनिक परिवहन के रूप में रोपवे का इस्तेमाल करने वाला दुनिया का तीसरा और भारत का पहला शहर बन जाएगा।
रोजाना 96 हजार यात्री करेंगे सफर
करीब 3.85 किलोमीटर लंबे इस रोपवे कॉरिडोर को शहर के सबसे व्यस्त इलाकों के ऊपर बनाया गया है। वाराणसी विकास प्राधिकरण (VDA) के अनुसार, इससे जमीनी सड़क यातायात का दबाव लगभग 40% तक कम हो जाएगा। प्रतिदिन लगभग 96 हजार यात्री इस आधुनिक और आरामदायक सेवा का लाभ उठा सकेंगे। इस पूरे मार्ग में कुल 5 अत्याधुनिक स्टेशन बनाए गए हैं। इनमें वाराणसी कैंट, काशी विद्यापीठ, रथयात्रा, गिरजाघर (तकनीकी टर्निंग स्टेशन) और गोदौलिया चौक शामिल हैं।
आम जनता और श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए किराया बेहद किफायती रखा गया है। न्यूनतम किराया (कैंट से काशी विद्यापीठ) 10 रुपए है, जबकि कैंट से अंतिम स्टेशन तक का किराया 50 रुपए है। वर्तमान में ऑटो या ई-रिक्शा से इसी दूरी का किराया 30 से 40 लगता है और घंटों ट्रैफिक में फंसना पड़ता है, जबकि रोपवे से एसी केबिन में सुरक्षित सफर के साथ समय और पैसा दोनों बचेगा।
आंधी और खराब मौसम में भी पूरी तरह सुरक्षित
यह रोपवे अत्याधुनिक सुरक्षा मानकों और स्वचालित तकनीकों से लैस है। इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि सामान्य आंधी और खराब मौसम में भी इसका संचालन बाधित न हो। पूरे कॉरिडोर की 24×7 निगरानी के लिए एक कंट्रोल सेंटर बनाया गया है, जो किसी भी आपात स्थिति से निपटने में सक्षम है।
वैश्विक पटल पर चमकेगी काशी
शहरी परिवहन के रूप में रोपवे की शुरुआत के साथ ही वाराणसी भारत में आधुनिक अर्बन ट्रांसपोर्टेशन का एक नया मॉडल पेश करेगा और दुनिया के चुनिंदा शहरों की सूची में गर्व से शामिल होगा।


