
Sonam Wangchuk Apple Wine Dispute: लद्दाख में शराब नीति को लेकर जारी विवाद अब नया मोड़ लेता दिख रहा है। शराब कारोबारियों ने जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उन पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया है। लेह में पत्रकारों से बातचीत में कारोबारियों ने सवाल उठाया कि एक तरफ वांगचुक लद्दाख में शराब पर प्रतिबंध लगाने की मांग का समर्थन कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उनके परिवार से जुड़ा एप्पल वाइन ब्रांड ‘उले टोपो’ कारोबार कर रहा है।
एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि वांगचुक और उनके परिवार से जुड़े कारोबार में ‘उले टोपो’ नाम से सेब की वाइन तैयार कर बेची जा रही है, जबकि इसके लिए आवश्यक कमर्शियल लाइसेंस होने पर संदेह है। कारोबारियों ने विशेष रूप से वांगचुक के भाई द्वारा संचालित उले एथनिक रिसार्ट में इसकी बिक्री का मुद्दा उठाया और प्रशासन से जांच तथा कार्रवाई की मांग की। हालांकि, लाइसेंस नहीं होने का आरोप अभी स्वतंत्र रूप से प्रमाणित नहीं हुआ है।
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब महिला संगठनों ने शराब नीति के विरोध में आंदोलन स्थगित किया है। प्रशासन ने मांगों पर सहमति जताते हुए लिखित आश्वासन के लिए एक सप्ताह का समय मांगा है।
क्या कहती है आबकारी नीति?
गौरतलब है कि एक जून को घोषित आबकारी नीति 2026-27 में शराब की दुकानों की संख्या दो से बढ़ाकर 20 करने का प्रस्ताव था, लेकिन विरोध के बाद 26 अगस्त को इसे वापस ले लिया गया। पुरानी नीति बहाल होने के बाद प्रशासन के अनुसार पूरे लद्दाख में अब केवल एक शराब की दुकान चालू है। इसके अलावा रेस्तरां से जुड़े 50 शराब बिक्री केंद्र और दो बीयर बार संचालित हैं।
कारोबारियों ने कहा कि शराब व्यापारियों की आजीविका और निवेश को निशाना बनाने के बजाय नियम सभी पर समान रूप से लागू होने चाहिए। अब विवाद का असली सवाल यह है कि क्या प्रशासन ‘उले टोपो’ के लाइसेंस और उत्पादन की जांच कर आरोपों की सच्चाई सार्वजनिक करेगा।


