दिल्ली पुलिस नहीं रोक सकी प्रदर्शन

नई दिल्ली। जंतर मंतर पर पिछली बार हुए प्रदर्शन से सबक लेकर इस बार दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के भरपूर प्रयास किए। इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग प्रदर्शन के लिए इकट्ठा हुए। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग करते हुए हजारों की संख्या में लोग नई दिल्ली में अलग अलग जगहों पर जमा हुए। पुलिस ने लोगों को जंतर मंतर पर पहुंचने से रोकने के लिए कई किलोमीटर पहले से रास्ते बंद कर दिए थे और 11 मेट्रो स्टेशन भी बंद कर दिए थे। फिर भी देर शाम तक हजारों लोग कनॉट प्लेस और आसपास के इलाके में जमा रहे। कई जगह पुलिस के साथ लोगों की झड़प हुई और कई जगह जम कर बवाल हुआ।

शुक्रवार की सुबह से ही जंतर मंतर के आसपास हजारों की संख्या में पुलिसकर्मी और अर्धसैनिक बलों के जवान तैनात थे। सुबह सबसे पहले आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज और पार्टी के विधायक संजीव झा पहुंचे थे। पुलिस ने उनको तत्काल हिरासत में लेकर बस में बैठाया और वहां से हटा दिया। आप की नेता व पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी, सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव और आईसा की नेता नेहा बोरा को भी पुलिस ने हिरासत में लेकर वहां से हटाया। पुलिस ने करीब सात सौ लोगों को हिरासत में लिया। सबको जबरदस्ती बसों में भर कर जंतर मंतर से हटाया गया।

पुलिस ने इस प्रदर्शन को रोकने के लिए जंतर मंतर से पांच किलोमीटर दूर कर रास्ते बंद किए थे। लोगों को लोधी रोड पर रोका जा रहा था तो तीन मूर्ति के पास भी रास्ता बंद कर दिया गया था। सेंट्रल दिल्ली के आसपास के सारे मेट्रो स्टेशन बंद थे। कनॉट प्लेस से लेकर पटेल चौक, जीपीओ, टॉल्स्टॉय मार्ग, जंतर मंतर रोड, संसद मार्ग और आसपास की सड़कों पर ट्रैफिक बंद कर दिया गया था।

गौरतलब है कि 30 सितंबर को विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ ब्लॉक के नेताओं की बैठक हुई थी, जिसमें दो से आठ अक्टूबर तक चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन का फैसला हुआ था। शुक्रवार को गांधी जयंती के मौके पर युवाओं, छात्रों और अलग अलग समूहों के लोगों ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। इसमें एसआईआर के जरिए वोट काटने से लेकर रोजगार की समस्या तक का मुद्दा उठाया गया। पुलिस ने हालांकि इस प्रदर्शन की इजाजत नहीं दी थी। तब भी देर शाम तक हजारों नौजवान कनॉट प्लेस और आसपास के इलाके में जमा रहे।

इस प्रदर्शन में आम आदमी पार्टी और वामपंथी दलों के अलावा सीपीआई माले के छात्र संगठन आइसा, सीपीएम के छात्र संगठन एसएफआई और कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई के सदस्य शामिल हुए। इसके अलावा कई और सामाजिक समूहों के लोग प्रदर्शन में शामिल होने के लिए पहुंचे थे। प्रदर्शन में लोगों की मुख्य मांग मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की थी। गौरतलब है कि एसआईआर में अब तक 13 करोड़ से ज्यादा नाम कट चुके हैं। राजनीतिक दल इसे चुनौती दे रहे हैं।