
कभी-कभी जिंदगी इंसान को ऐसी परीक्षा के सामने खड़ा कर देती है, जहां डरने या पीछे हटने का समय नहीं होता। कुछ पल का फैसला सैकड़ों जिंदगियों का भविष्य तय कर देता है। फ्लाईदुबई की उड़ान में ऐसा ही एक पल भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार के सामने आया। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी और विमान में सवार यात्रियों की जान बचाने के लिए आखिरी दम तक मुकाबला किया।
2 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अस्पताल में इलाज करा रहे कैप्टन स्मित मच्छार से बातचीत की। इस दौरान स्मित ने घटना के बारे में अपना अनुभव बताया और यह भी बताया कि उस बेहद मुश्किल समय में उन्हें आगे बढ़ने की ताकत कहां से मिली। प्रधानमंत्री ने उनकी बहादुरी, सूझबूझ और साहस की सराहना करते हुए उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की।
‘आपने सबको बचाया, बहुत बड़ा काम किया’
प्रधानमंत्री मोदी ने बातचीत के दौरान कहा कि अगर उस दिन स्थिति कुछ और होती तो न जाने भारत और भारतीय पायलटों को किन सवालों और मुश्किलों का सामना करना पड़ता। उन्होंने स्मित से कहा कि उन्होंने सभी की जान बचाई और बहुत बड़ा काम किया। मोदी की यह बात केवल एक विमान में सवार यात्रियों की जिंदगी बचाने तक सीमित नहीं थी। उन्होंने उस व्यापक जिम्मेदारी की ओर भी इशारा किया, जो उस समय कैप्टन स्मित के कंधों पर थी। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत गर्व से यह कह सकता है कि भारतीय दूसरे लोगों की जान लेने वाले नहीं, बल्कि दूसरों की जान बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डालने वाले लोग हैं।
खुद घायल थे, फिर भी कॉकपिट खोल दिया
फ्लाईदुबई की दुबई से तेल अवीव जा रही उड़ान में सह-पायलट ने कथित तौर पर कैप्टन स्मित मच्छार पर हमला किया। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद स्मित ने विमान को बचाने के लिए संघर्ष जारी रखा। उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफलता हासिल की, जिसके बाद यात्रियों और चालक दल के सदस्यों को हमलावर को काबू करने का मौका मिला। विमान को बाद में सऊदी अरब के ताबुक में सुरक्षित उतारा गया। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, विमान में सवार सभी 174 यात्री सुरक्षित रहे।
‘मैं हनुमान चालीसा पढ़ रहा था…’
प्रधानमंत्री से बातचीत के दौरान कैप्टन स्मित ने बताया कि जब वह हमले का सामना कर रहे थे, तब वह हनुमान चालीसा का पाठ कर रहे थे। उन्होंने बताया कि उन्हें कई चोटें आई थीं, लेकिन उनके मन में यह बात थी कि उन्हें उठकर कुछ करना ही होगा। अगर वह ऐसा नहीं करते तो स्थिति बेहद गंभीर हो सकती थी। स्मित के इस अनुभव ने उस घटना को केवल विमान हादसे को टालने की कहानी नहीं रहने दिया, बल्कि यह साहस, विश्वास और कर्तव्य के बीच खड़े एक इंसान की कहानी बन गई।
‘अगर विमान गिर जाता तो…’ सोशल मीडिया पर उठे सवाल
घटना के बाद सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट में यह सवाल उठाया गया कि अगर विमान सुरक्षित नहीं बच पाता तो क्या भारतीय पायलट को भी जिम्मेदार ठहराया जाता। इन पोस्ट में तरह-तरह के दावे किए गए, हालांकि ऐसे सोशल मीडिया दावों को स्वतंत्र रूप से प्रमाणित तथ्य के रूप में नहीं माना जा सकता। इसी पृष्ठभूमि में प्रधानमंत्री मोदी की वह टिप्पणी भी चर्चा में आई, जिसमें उन्होंने कहा कि अगर घटना का परिणाम अलग होता तो भारतीय पायलटों की छवि को लेकर भी सवाल खड़े हो सकते थे।
एक पायलट की बहादुरी ने बदल दी पूरी कहानी
आज कैप्टन स्मित मच्छार अस्पताल में इलाज करा रहे हैं। लेकिन उनके सामने वह पल शायद जिंदगी भर रहेगा, जब एक तरफ उनकी अपनी जान खतरे में थी और दूसरी तरफ विमान में सवार सैकड़ों लोगों की जिंदगी।
उन्होंने अपने लिए नहीं, दूसरों के लिए लड़ने का फैसला किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने भी उनके साहस को देश के लिए गर्व का विषय बताया है। इससे पहले उन्होंने कैप्टन स्मित को ‘हीरो’ बताते हुए कहा था कि उनकी बहादुरी और दृढ़ संकल्प ने बड़ी त्रासदी को टालने में मदद की। एक घायल पायलट का कॉकपिट में खड़े होकर आखिरी कोशिश करना शायद यही बताता है कि वर्दी और जिम्मेदारी का असली अर्थ क्या होता है—जब अपनी जिंदगी बचाना सबसे आसान रास्ता हो, तब भी दूसरों की जिंदगी के लिए खड़े रहना।


