
प्रभाकर मणि तिवारी
भारत में कॉलेजों के परिसर और आसपास के इलाकों में छात्राओं के साथ होने वाले यौन उत्पीड़न और बलात्कार तक की खबरें समय-समय पर सामने आती रही हैं। बीते एक दशक में देश में करीब दस ऐसी घटनाएं हुई हैं जिनकी राष्ट्रीय और कुछ मामलों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी खूब आलोचना हुई। वहीं, शैक्षणिक परिसर में हॉस्टल में रहने वाली छात्राओं पर अनुशासन के नाम पर तमाम तरह की पाबंदियां और उनके खिलाफ होने वाले विरोध प्रदर्शन कम ही प्रमुखता पाते हैं। ALSO READ: तेल कंपनियों का मुनाफा फिर बंपर, देशों की हालत खस्ता
कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कालेज अस्पताल में एक इंटर्न डाक्टर के साथ रेप के बाद उसकी हत्या का मामला अब भी लोगों के जेहन में ताजा है। उस मामले में बड़े पैमाने पर महीनों चलने वाले विरोध प्रदर्शन तत्कालीन ममता बनर्जी सरकार की साख पर बट्टा लगाने के साथ ही उनके सत्ता से बाहर जाने की एक प्रमुख वजह रही थी। इस मामले में एक अभियुक्त को उम्रकैद की सजा सुना दी गई थी। लेकिन पीड़िता की मां के बीजेपी के टिकट पर विधायक बनने के बाद अब इस मामले की नए सिरे से जांच शुरू हो गई है।
लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी वाला ताजा मामला क्या है?
सबसे ताजा मामला पंजाब की लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी का है। बीते सप्ताह वहां हास्टल में रहने वाली एक छात्रा के साथ बलात्का की शिकायत आई। इसके खिलाफ स्टूडेंट्स ने वहां बड़े पैमाने पर धरना-प्रदर्शन शुरू किया। विश्वविद्यालय प्रबंधन की सफाई और इंकार के बावजूद मामला शांत नहीं हुआ। फिलहाल प्रशासन ने मिड टर्म परीक्षाएं टालते हुए दस दिनों के लिए कक्षाएं स्थगित कर दी हैं। पुलिस भी इस मामले की जांच कर रही है। हालांकि अब तक उस छात्रा का पता नहीं चला है। उसे लापता बताया जा रहा है। कुछ खबरों में दावा किया जा रहा है कि छात्रा ने आत्महत्या कर ली है। लेकिन पुलिस ने अब तक ऐसे किसी आरोप की पुष्टि नहीं की है।
रविवार को छात्रों का प्रदर्शन हिंसक हो गया और उन्होंने कई जगह तोड़-फोड़ की। हालांकि प्रबंधन कैंपस में ऐसी किसी घटना की खबर को ही खारिज करता रहा है। रजिस्ट्रार मोनिका गुलाटी ने पत्रकारों से कहा, “परिसर में रेप की कोई घटना नहीं हुई है। यह आरोप निराधार हैं। यह विश्वविद्यालय की छवि खराब करने की कोशिश है।”
पहले भी की गई है पढ़ने गई लड़कियों से हिंसा
कोलकाता का आर जी कर कांड न तो पहला था और न ही आखिरी। उसके पहले और बाद में भी ऐसी घटनाएं सामने आती रही हैं। बीते साल कोलकाता के ही एक लॉ कालेज में एक छात्रा के साथ रेप का मामला सामने आया था।
वर्ष 2015 में ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी में एक छात्रा ने सीनियरों पर रेप और ब्लैकमेल का आरोप लगाया था। इस मामले में दो छात्रों को 20-20 साल की सजा सुनाई गई थी। उसके बाद वर्ष 2019 में हैदराबाद के मल्ला रेड्डी इंजीनियरिंग कालेज की प्रयोगशाला में एक सहायक प्रोफेसर पर एक दलित छात्रा से रेप का आरोप लगा था। नवंबर, 2021 में पश्चिम बंगाल के कूचबिहार जिले में तूफानगंज कालेज में कक्षाएं चलने के दौरान ही परिसर में एक छात्रा के साथ रेप की घटना सामने आई थी। वर्ष 2024 में चेन्नई की अन्ना यूनिवर्सिटी में इंजीनियरिंग की एक छात्रा से एक बाहरी व्यक्ति के रेप की घटना की शिकायत सामने आई थी।
ठीक एक साल पहले पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर स्थित एक निजी मेडिकल कॉलेज की छात्रा के साथ भी परिसर के नजदीक ही गैंगरेप की घटना ने भी ध्यान खींचा। इसके बाद पता चला कि उड़ीसा की वह छात्रा बीच में ही पढ़ाई छोड़ कर घर लौट गई। इसी तरह बीएचयू और दिल्ली विश्वविद्यालय में भी ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं। ALSO READ: भारत की तेज आर्थिक वृद्धि में भी युवा क्यों परेशान हैं
लड़कियों को सुरक्षा के नाम पर कैद करना कैसी व्यवस्था है?
अब इस ताजा घटना के बाद यह सवाल उठ रहा है कि आखिर शैक्षणिक परिसरों में रेप और यौन उत्पीड़न की घटनाओं पर अंकुश क्यों नहीं लग पा रहा है? किसी भी कॉलेज में छात्राओं के हॉस्टल में कड़ी पाबंदियां होती हैं। वो कब तक बाहर रह सकती हैं, इसके नियम और कड़े कर दिए जाते हैं। लेकिन इससे तो दुर्व्यवहार और हिंसा की घटनाएं कम नहीं हुईं।
कई सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि शैक्षणिक परिसर में अगर ऐसी कोई घटना होती है तो इसके लिए सीधे प्रबंधन ही जिम्मेदार है। इनसे साफ है कि परिसर में सुरक्षा के समुचित इंतजाम नहीं हैं। महिला अधिकार कार्यकर्ता देवांजना चक्रवर्ती डीडब्ल्यू से कहती हैं, “खासकर विश्वविद्यालय परिसर में लड़के-लड़कियां साथ पढ़ाई करते हैं। वो परिसर और कक्षा में साथ रहते हैं। लेकिन प्रबंधन के पास खासकर छात्राओं की सुरक्षा के लिहाज से निगरानी का कोई तंत्र नहीं है।”
कोलकाता के एक कालेज में समाज विज्ञान पढ़ाने वाली सुदीप्ता सेन डीडब्ल्यू से कहती हैं, “एक ओर से हॉस्टल में रहने वाली छात्राओं पर तमाम किस्म की बंदिशें लगाई जाती हैं और दूसरी ओर परिसर में ऐसी घटनाएं होती रहती हैं। यह प्रबंधन के लापरवाह रवैये का सबूत है।” विशेषज्ञों का मानना है कि छात्राओं के हॉस्टल की कड़ी पाबंदियां भी कुछ हद तक ऐसी घटनाओं के लिए दोषी हैं। इनमें कुछ ढील देने के साथ ही परिसर में निगरानी का ठोस तंत्र विकसित करना और समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाना भी जरूरी है।
देवांजना कहती हैं, “ऐसे मामलों में सरकार की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। संबंधित राज्य सरकार इन घटनाओं का स्वतः संज्ञान लेकर प्रबंधन के खिलाफ कड़ा कदम उठाते हुए जवाबदेही तय कर सकती हैं। इससे उनमें छात्राओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी की भावना मजबूत होगी।” ALSO READ: भारत की सड़कों पर मर्दानगी से जूझती महिलाएं
पंजाब के एक निजी विश्वविद्यालय में इसी साल बेटी का दाखिला कराने वाले कोलकाता के समरेश मंडल ताजा घटना से बेहद चिंतित हैं। वो कहते हैं कि बेटी घर से इतनी दूर है कि हमेशा चिंता बनी रहती है। वो डीडब्ल्यू से कहते हैं, सरकार आधारभूत ढांचे और सुरक्षा व्यवस्था या निगरानी तंत्र पर ध्यान दिए बिना धड़ल्ले से निजी कालेजों और विश्वविद्यालयों को मंजूरी दे रही है। आरजी कर की घटना के बाद भी देश में करीब सौ निजी विश्वविद्यालयों को मंजूरी मिल चुकी चुकी है। शैक्षणिक परिसर में छात्राओं की सुरक्षा के लिए प्रबंधन की मानसिकता बदलने के साथ ही इसकी जवाबदेही तय करना भी जरूरी है।


