
Nepal landslide: नेपाल में एक बार फिर कुदरत का कहर टूट पड़ा है। बीते तीन दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश और भूस्खलन ने देश के कई हिस्सों में भारी तबाही मचाई है। स्थानीय मीडिया और प्रांतीय रिपोर्टों के अनुसार, बारिश और लैंडस्लाइड से जुड़ी घटनाओं में अब तक 24 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 14 लोग लापता बताए जा रहे हैं। नदियां उफान पर हैं और मनांग जिले में हिमस्खलन की चपेट में आने से दो पर्वतारोहियों की भी दर्दनाक मौत हो गई है।
नेपाल में कुदरत का खौफनाक रूप देखने को मिला, जहां एक पूरा पहाड़ भरभराकर काली गंडकी नदी में समा गया।
पहाड़ का विशाल हिस्सा नदी में गिरते ही आसपास का इलाका भी प्रभावित हुआ।
देखिए, नेपाल में पहाड़ के नदी में समाने का यह डरावना मंजर…#nepal #landslide #river #kaligandaki pic.twitter.com/dXOvLHoZxa— Webdunia Hindi (@WebduniaHindi) September 28, 2026
दरअसल, नेपाल में मानसून की विदाई से पहले एक बार फिर मौसम ने विकराल रूप धारण कर लिया है। देश के विभिन्न हिस्सों में पिछले तीन दिनों से जारी भारी बारिश, भूस्खलन और अचानक आई बाढ़ ने जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। राहत और बचाव कार्य में जुटी टीमों के अनुसार, स्थिति तेजी से बिगड़ रही है और प्रभावित क्षेत्रों से लगातार नुकसान की खबरें सामने आ रही हैं। लैंगटांग की घटना के एक महीने बाद मुस्तांग जिले के पास रविवार शाम करीब 5:30 बजे पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा टूटकर घाटी में गिर गया। इससे काली गंडकी नदी का रास्ता कुछ समय के लिए अवरुद्ध हो गया। ALSO READ: क्या नेपाल में आई प्रलयंकारी बाढ़ के पीछे जलवायु परिवर्तन की निर्णायक भूमिका रही? रिसर्च में बड़ा खुलासा
सरकारी इमारत बही, नदियां उफान पर
बाढ़ और बारिश का सबसे घातक असर बागलुंग जिले के गलकोट क्षेत्र में देखने को मिला, जहां पानी के प्रचंड बहाव में एक पूरी सरकारी इमारत ताश के पत्तों की तरह ढहकर बह गई। इसके अलावा, कालीगंडकी नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जिससे तटीय इलाकों में बाढ़ का संकट गहरा गया है। प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सख्त चेतावनी जारी की है।
मनांग में दो पर्वतारोहियों की मौत
मनांग जिले के नार फू क्षेत्र में रविवार को 7,126 मीटर ऊंची हिमलुंग हिमाल चोटी के आधार शिविर में हिमस्खलन हुआ। इसमें वह तंबू बर्फ में दब गया, जिसमें पर्वतारोही और सहायक कर्मचारी शरण लिए हुए थे। इसके बाद कई कर्मचारी और गाइड लापता हो गए। इस हादसे में 2 पर्वतारोहियों की मौत हो गई। खराब मौसम के कारण ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ट्रैकिंग और पर्वतारोहण पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। ALSO READ: नेपाल तबाही के बावजूद नहीं माना चीन : ब्रह्मपुत्र पर 14 लाख करोड़ का ‘सदी का बांध’ बनाने की ज़िद, भारत के पूर्वोत्तर पर बड़ा संकट?
140 से ज्यादा मकान पूरी तरह तबाह
आपदा प्रबंधन अधिकारियों के अनुसार, इस तबाही से अब तक लगभग 747 परिवार सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। 143 से अधिक मकान पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए हैं, जिससे सैकड़ों लोग बेघर होने पर मजबूर हो गए हैं। कई मुख्य मार्ग और राजमार्ग लैंडस्लाइड के मलबे के कारण बंद हो चुके हैं, जिससे संपर्क कट गया है।
इन जिलों में स्थिति बेहद गंभीर
रिपोर्टों के मुताबिक मनांग, म्याग्दी, पर्वत और पाल्पा जिलों में हालात सबसे ज्यादा गंभीर बने हुए हैं। सड़कों पर भारी मलबा जमा होने से राहत और बचाव दल को प्रभावित इलाकों तक पहुंचने में खासी मशक्कत करनी पड़ रही है। स्थानीय पुलिस और सेना की टीमें लापता 14 लोगों की तलाश में रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं। प्रशासन ने मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है।


