
भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) के शीर्ष तीन अधिकारियों के बीच कथित अंदरूनी कलह और मतभेदों की खबरों के बाद देश का राजनीतिक तापमान चढ़ गया है। विपक्ष के बाद अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले एनडीए (NDA) के प्रमुख सहयोगी दल भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने लगे हैं।
शनिवार को जनता दल (सेक्युलर) यानी JDS के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी (H.D. Kumaraswamy) ने चुनाव आयोग से पूरे मामले पर सार्वजनिक स्पष्टीकरण जारी करने और देश की जनता के सामने तथ्य रखने की मांग की है।
1. “क्या है मतभेदों का कारण?”: कुमारस्वामी का बड़ा बयान
मीडिया से बातचीत करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने कहा कि चुनाव आयोग पिछले 78 वर्षों से देश में लोकतंत्र का मुख्य स्तंभ रहा है।
“मीडिया में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और दोनों अन्य चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेदों की खबरें हैं। चुनाव आयोग से मेरी अपील है कि वे देश को बताएं कि इन मतभेदों के पीछे की सच्चाई क्या है? आयोग को जनता के सामने सभी तथ्य रखकर संस्था की गरिमा और विश्वसनीयता की रक्षा करनी चाहिए।”
कांग्रेस द्वारा किए जा रहे विरोध प्रदर्शनों पर पूछे गए सवाल के जवाब में कुमारस्वामी ने कहा कि मुद्दा किसी राजनीतिक दल के बयानों को तवज्जो देने का नहीं है, बल्कि यह समझने का है कि संवैधानिक संस्था के तीनों सदस्यों के बीच ऐसा तनावपूर्ण माहौल क्यों बना?
2. NDA के भीतर बंटे सुर: BJP बनाम सहयोगी दल
इस मुद्दे पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के भीतर भी अलग-अलग राय देखने को मिल रही है:
सहयोगियों की मांग: JDS के अलावा लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), तेलुगु देशम पार्टी (TDP) और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) ने भी चुनाव आयोग से पारदर्शिता और अधिक स्पष्टता लाने का आग्रह किया है।
भाजपा का बचाव: दूसरी तरफ, भारतीय जनता पार्टी ने चुनाव आयोग का बचाव किया है। बीजेपी ने चुनाव आयुक्तों के बीच सामने आए मतभेदों को “शुद्ध लोकतंत्र” (Pure Democracy) करार देते हुए इसे एक स्वाभाविक बहस बताया है।
3. विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
यह पूरा विवाद अंग्रेजी अखबार ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की उन खोजी रिपोर्टों के बाद शुरू हुआ, जिनमें आरोप लगाया गया था कि मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने बाकी दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों और असहमति के बावजूद कई बड़े फैसले एकतरफा (Unilaterally) लिए। इस खुलासे के बाद कांग्रेस सहित समूचा विपक्ष देशभर में चुनाव आयोग के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाए हुए है।
4. कांग्रेस का तीखा हमला: “शहंशाह थे या अमित शाह?”
इस बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मीडिया पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर आरटीआई (RTI) कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज द्वारा दायर याचिका पर मिले जवाब का हवाला देते हुए केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला।
पवन खेड़ा ने सवाल उठाया कि मतदाता सूचियों के देशव्यापी विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR – Special Intensive Revision) के क्रियान्वयन की मंजूरी किसने दी थी?
खेड़ा ने पोस्ट में लिखा: “क्या पूरे देश में एसआईआर (SIR) कराने को मंजूरी दी गई है? चुनाव आयोग के आरटीआई जवाब के अनुसार: नहीं! तो फिर इसके पीछे कौन था—शहंशाह थे या अमित शाह?”
मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों के बीच खींचतान की खबरों ने संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता पर एक बार फिर बहस छेड़ दी है। जहाँ विपक्ष आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहा है, वहीं एनडीए के भीतर से उठी स्पष्टीकरण की मांग ने केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है।


