सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने क्लोजिंग ऑक्शन सेशन के बारे में 10 सितंबर को बड़ी बात कही। उन्होंने कहा कि CAS की व्यवस्था जारी रहेगी और सेबी सिर्फ इस पर विचार कर रहा है कि क्या एफएंडओ सेटलमेंट प्राइस के लिए क्या कोई दूसरा तरीका हो सकता है।
अगस्त की शुरुआत में लागू हुआ था CAS
Closing Auction Session यानी CAS का सिस्टम पिछले महीने की शुरुआत में लागू हुआ था। इसके बाद बाजार के प्रमुख सूचकांकों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला था। मुंबई में ग्लोबल फिनटेक फेस्ट से इतर पत्रकारों से बातचीत में पांडेय ने कहा, “MSCI ने यह माना है कि CAS के तहत हाल में हुई रीबैलेंसिंग में कोई दिक्कत नहीं आई। CAS लागू रहेगा। एक्सपायरी के दिन डेरिवेटिव्स के लिए CAS के तहत क्लोजिंग प्राइस तय करने के तरीके पर फिर से विचार हो रहा है।”
CAS की शुरुआत में मुश्किल आती है
उन्होंने कहा कि कई देशों के शेयर बाजारों में CAS लागू करने के दौरान चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। हर जगह शुरुआत में लिक्विडिटी को लेकर प्रॉब्लम आई है। आने वाले समय में लिक्विडिटी बढ़ेगी। सेबी चेयरमैन का यह बयान काफी अहम है, क्योंकि 10 सितंबर को CAS के दौरान निफ्टी 50 और बीएसई सेंसेक्स का इंडिकेटिव क्लोजिंग प्राइस कुछ समय के लिए 1 फीसदी से ज्यादा उछल गया था।
सूचकांकों में उतार-चढ़ाव की समस्या
8 सितंबर को भी CAS के दौरान निफ्टी का इंडिकेटिव क्लोजिंग प्राइस 1.8 फीसदी तक गिर गया था, जबकि CAS से पहले 3:15 बजे निफ्टी 0.58 फीसदी गिरकर बंद हुआ था। पिछले हफ्ते भी सेबी ने कहा था कि वह डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट्स के सेटलमेंट प्राइस तय करने के तरीके पर फिर से विचार करेगा। उसने कहा था कि उसे इस बारे में मार्केट पार्टिसिपेंट्स से फीडबैक मिले हैं। वह उन पर विचार करेगा।
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कई एशियाई देशों के शेयर बाजारों में CAS का सिस्टम
सेबी ने 3 अगस्त को CAS की शुरुआत की थी। इसका मकसद सिक्योरिटीज के क्लोजिंग प्राइसेज तय करना है। CAS कारोबार के आखिर में कुछ समय का एक ऑक्शन है, जिसमें किसी शेयर के ऑफिशियल प्राइस को तय करने के लिए बाय और सेल (buy and sell) ऑर्डर्स मैच कराए जाते हैं। यह व्यवस्था चीन, हांगकांग, ताइवना और दक्षिण कोरिया सहित कई एशियाई देशों के शेयर बाजारों में लागू है।

