
उत्तराखंड के चंपावत जिले में खेतीखान क्षेत्र के तपनीपाल गांव के पास नरसिंगडांडा में स्थित श्री सिद्ध नरसिंह मंदिर आस्था, प्रकृति और पहाड़ी संस्कृति का सुंदर संगम है। यह उत्तराखंड के सबसे ऊंचे और सुंदर धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। ALSO READ: उत्तराखंड सरकार का बड़ा कदम: पहले दो बच्चों के जन्म पर महिलाओं को मिल रही 'महालक्ष्मी किट', जानिए क्या है इस योजना में खास
सीएम धामी ने एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा, जनपद चम्पावत में स्थित श्री सिद्ध नरसिंह मंदिर आस्था, प्रकृति और पहाड़ी संस्कृति का सुंदर संगम है। यह पावन स्थल घने बांज के जंगलों से घिरा हुआ है, जहां शांत वातावरण के साथ हिमालय की मनोरम चोटियों के दर्शन भी होते हैं। मंदिर में वर्षभर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है, जबकि नवरात्रि के अवसर पर यहां विशेष धार्मिक आयोजन होता है। अपने चम्पावत भ्रमण के दौरान इस भव्य मंदिर के दर्शन अवश्य करें।
जनपद चम्पावत में स्थित श्री सिद्ध नरसिंह मंदिर आस्था, प्रकृति और पहाड़ी संस्कृति का सुंदर संगम है। यह पावन स्थल घने बांज के जंगलों से घिरा हुआ है, जहां शांत वातावरण के साथ हिमालय की मनोरम चोटियों के दर्शन भी होते हैं।
मंदिर में वर्षभर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है, जबकि… pic.twitter.com/IfpF9j9t9y
— Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) September 9, 2026
समुद्र सतह से 2050 मीटर ऊंचाई पर स्थित श्री सिद्ध नरसिंह मंदिर के परिसर से हिमालय का विहंगम दृष्य दिखता है। बांज के घने पेड़ों से घिरा और प्राकृतिक सुदंरता के बीच स्थित इस मंदिर में दर्शन करने क लिये पूरे वर्ष भर श्रद्धालु आते हैं।
लोगों का मानना है कि इस सिद्ध पीठ में आने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इस मंदिर में किसी भी प्रकार की बलि नहीं दी जाती। यहां पर घंटियों और कपड़े से बने लिसान का चढ़ावा होता है। विजयादशमी के मौके पर यहां मेले का भी आयोजन किया जाता है। ALSO READ: बाबा नीम करौली के जीवन पर बनी 'हनुमान अंश' देखकर भावुक हुए सीएम धामी, कलाकारों की जमकर की तारीफ
यह मंदिर 14वीं सदी में चंद शासकों के समय बना था। इसका पास के गांव में ही एक ताम्रपत्र भी मिला है। 2021 में 22 गांव के लोगों ने बिना किसी सरकारी मदद के यह भव्य मंदिर बनाया है।


