राम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO बने एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा, अब सामने होंगी ये बड़ी चुनौतियां

राम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO बने एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा, अब सामने होंगी ये बड़ी चुनौतियां

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श्री राम जन्मभूमि मंदिर में हालिया चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद हुई ट्रस्ट की अहम बैठक में संचालन व्यवस्था को लेकर एक ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है। मणिरामदास छावनी में महंत नृत्यगोपालदास की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में सेवानिवृत्त एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को 'श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट' का पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया गया है।

 

​लड़ाकू विमान के पायलट के रूप में वायुसेना में 39 वर्षों की बेदाग सेवा देने वाले जितेंद्र मिश्रा 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान वेस्टर्न कमांड के चीफ रहे हैं और कारगिल युद्ध में भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वायुसेना में विषम परिस्थितियों का मुकाबला करने के बाद अब अयोध्या में उनकी दूसरी पारी शुरू हो रही है, जहाँ उनके सामने चुनौतियों का नया मैदान तैयार है।

 

​प्रमुख चुनौतियाँ और नया प्रशासनिक खाका

 

​वित्तीय पारदर्शिता व सुरक्षा : मई माह में सामने आए दान और चढ़ावे में हेराफेरी के मामले के बाद ट्रस्ट की वित्तीय व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे थे। नए CEO का पहला ध्येय मंदिर के आर्थिक लेखा-जोखा को पूरी तरह डिजिटल, सुरक्षित और पारदर्शी बनाना होगा।

 

​जनता और श्रद्धालुओं का विश्वास: हालिया विवाद से ट्रस्ट की साख पर पड़े प्रभाव को मिटाना और देश-विदेश के रामभक्तों के बीच पारदर्शिता का भरोसा बहाल करना सबसे प्राथमिक कार्य है।

 

​भीड़, सुरक्षा व वीआईपी प्रबंधन: अयोध्या में हर दिन उमड़ते लाखों श्रद्धालुओं के सुगम दर्शन, सुरक्षा व्यवस्था और वीआईपी प्रोटोकॉल के बीच तालमेल बिठाना एक बड़ी प्रशासनिक परीक्षा होगी।

 

​प्रशासनिक अनुशासन व जवाबदेही : अब तक राम मंदिर से जुड़े फैसले ट्रस्टियों के स्तर पर लिए जाते थे। सीईओ की नियुक्ति से दैनिक प्रबंधन, कर्मचारियों की कार्यप्रणाली और विभागीय समन्वय में सीधी जवाबदेही तय होगी।

 

​रामलला के दर्शन और ट्रस्ट सदस्यों के साथ पहली औपचारिक मुलाकात के बाद जितेंद्र मिश्रा ने स्पष्ट किया कि वे पहले पूरी कार्यप्रणाली और व्यवस्था की बारीकियों को गहराई से समझेंगे, जिसके बाद प्रशासनिक कमान पूर्ण रूप से संभालेंगे। सैन्य अनुशासन और दूरदर्शिता के बल पर राम मंदिर के इस नए प्रशासनिक अध्याय से व्यवस्था में बड़े सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।