
महाराष्ट्र के अमरावती जिले के डोमा गांव स्थित एक आदिवासी आवासीय स्कूल में कुछ छात्राओं के अचानक बेकाबू होकर रोने और हंसने की खबर के बाद 'भूत का साया' होने की अफवाह फैल गई। इस अफवाह के चलते करीब 600 छात्राओं ने स्कूल और हॉस्टल छोड़ दिया। शुरुआती रिपोर्टों में छात्राओं के इस तरह के व्यवहार के पीछे तनाव और चिंता (Stress and Anxiety) को संभावित कारण बताया गया है।
810 छात्र-छात्राएं रहती हैं स्कूल में
चिखलदरा तहसील के डोमा गांव स्थित इस आदिवासी आवासीय स्कूल में करीब 810 छात्र-छात्राएं रहती हैं। घटना की खबर फैलने के बाद बड़ी संख्या में छात्राओं ने हॉस्टल छोड़कर अपने घर जाने का फैसला किया। कुछ छात्राओं के कथित तौर पर बिना किसी स्पष्ट कारण के लगातार रोने और हंसने के बाद यह अफवाह तेजी से फैल गई कि उन पर किसी ‘अलौकिक शक्ति’ का प्रभाव है।
अंधविश्वास निर्मूलन समिति ने की छात्रों से बात
मामले की जानकारी सामने आने के बाद महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने भी स्कूल का दौरा किया। समिति अंधविश्वास और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाती है। समिति के सदस्यों ने छात्राओं से बातचीत की और उन्हें काउंसलिंग दी। इसका उद्देश्य छात्राओं के डर और भ्रम को दूर करना था।
अधिकारियों ने कहा- अलौकिक गतिविधि से कोई संबंध नहीं
आदिवासी विकास विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि छात्राओं में दिखाई देने वाले लक्षणों का किसी भी तरह की अलौकिक गतिविधि से कोई संबंध नहीं है।


