Sonam Wangchuk Story : 3 Idiots के फुनसुख वांगडू से भी आगे है असली कहानी, जानिए कैसे बदली लद्दाख की तस्वीर

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सोनम वांगचुक आज देश के सबसे चर्चित सामाजिक कार्यकर्ताओं में शामिल हैं। 59 वर्षीय वांगचुक की पहचान सिर्फ एक इंजीनियर के रूप में नहीं, बल्कि नवोन्मेषक, शिक्षा सुधारक, पर्यावरण कार्यकर्ता और रेमन मैगसायसाय पुरस्कार विजेता के तौर पर भी है। पिछले कुछ वर्षों में उनकी छवि को लेकर अलग-अलग राजनीतिक और सामाजिक नजरिए सामने आए। शिक्षा सुधारक से पर्यावरण नवप्रवर्तक और अब सामाजिक आंदोलन के चेहरे तक, सोनम वांगचुक की सार्वजनिक यात्रा लगातार बदलती रही है। कभी उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का समर्थक बताया गया, बाद में उनके आंदोलनों को लेकर आलोचनाएं हुईं और अब कई लोग उन्हें लद्दाख और देश की 'सामूहिक चेतना' की आवाज के रूप में देख रहे हैं। 

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हालांकि वांगचुक खुद कई बार इन पहचान और आरोपों को अलग-अलग संदर्भों में स्पष्ट कर चुके हैं। उनकी पूरी यात्रा एक ऐसे व्यक्ति की कहानी है, जिसने लद्दाख जैसे कठिन भौगोलिक क्षेत्र में शिक्षा, पर्यावरण और स्थानीय विकास के लिए दशकों तक काम किया।

 

लद्दाख की कठिनाइयों से शुरू हुई कहानी

 

सोनम वांगचुक का जन्म 1966 में लद्दाख के अलची के पास उलेतोकपो गांव में हुआ था। वह जम्मू-कश्मीर के पूर्व मंत्री सोनम वांग्याल के पुत्र हैं। दूरदराज के हिमालयी क्षेत्र में बचपन बिताने वाले वांगचुक ने शुरुआती शिक्षा के दौरान भाषा और व्यवस्था से जुड़ी कठिनाइयों का सामना किया। इन्हीं अनुभवों ने उनके भीतर यह विचार पैदा किया कि शिक्षा स्थानीय जरूरतों और परिस्थितियों के अनुसार होनी चाहिए।

 

इंजीनियरिंग छोड़ चुना शिक्षा सुधार का रास्ता

वर्ष 1987 में उन्होंने श्रीनगर के रीजनल इंजीनियरिंग कॉलेज (अब NIT श्रीनगर) से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। लेकिन उन्होंने पारंपरिक इंजीनियरिंग नौकरी करने के बजाय लद्दाख के छात्रों की शिक्षा सुधारने का रास्ता चुना। 1988 में उन्होंने अपने भाई और दोस्तों के साथ स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख (SECMOL) की स्थापना की। SECMOL ने 1994 में ‘ऑपरेशन न्यू होप’ शुरू किया, जिसका उद्देश्य सरकारी स्कूलों में शिक्षा के स्तर को बेहतर बनाना था। 1998 में उन्होंने लेह के पास SECMOL वैकल्पिक स्कूल की स्थापना की। यह स्कूल:

 

व्यावहारिक शिक्षा,

सौर ऊर्जा आधारित परिसर,

आत्मनिर्भर जीवन शैली के लिए दुनियाभर में चर्चा में आया।

 

‘आइस स्तूप’ से बदली जल संरक्षण की सोच

सोनम वांगचुक का सबसे प्रसिद्ध नवाचार ‘आइस स्तूप’ तकनीक है। vइस तकनीक में सर्दियों के दौरान पानी को शंकु के आकार की बर्फीली संरचनाओं के रूप में जमा किया जाता है और गर्मियों में खेती के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यह तकनीक लद्दाख जैसे ठंडे और सूखे इलाकों में जल संकट से निपटने का एक नया मॉडल बनी।

 

इसके अलावा उन्होंने: सौर ऊर्जा आधारित इमारतों, जलवायु अनुकूल तकनीकों,

ऊंचाई वाले क्षेत्रों के लिए टिकाऊ विकास मॉडल पर भी काम किया।

 

अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित

 

वांगचुक के काम को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली।

 

उन्हें मिले प्रमुख सम्मान:

 

2008: CNN-IBN Real Heroes Award

2016: Rolex Award for Enterprise

2016: International Terra Award

2017: Global Award for Sustainable Architecture

2018: Ramon Magsaysay Award

HIAL से आगे बढ़ाया वैकल्पिक शिक्षा मॉडल

 

2016 में उन्होंने Himalayan Institute of Alternatives, Ladakh (HIAL) की सह-स्थापना की।

 

इसका उद्देश्य अनुभव आधारित शिक्षा और स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए युवाओं को तैयार करना था।

 

लद्दाख को लेकर बदली सरकार से दूरी

 

2019 में जम्मू-कश्मीर से अलग कर लद्दाख को केंद्रशासित प्रदेश बनाने के फैसले का वांगचुक ने शुरुआती दौर में स्वागत किया था। लेकिन बाद में वह लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग करने वाले प्रमुख चेहरों में शामिल हो गए। उनका कहना है कि इससे: जमीन की सुरक्षा,

रोजगार के अवसर, जनजातीय पहचान, पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिलेगी।

 

आंदोलन और भूख हड़ताल से फिर चर्चा में

 

2023 से वांगचुक लद्दाख के अधिकारों को लेकर कई आंदोलनों, पदयात्राओं और भूख हड़तालों में शामिल रहे। सितंबर 2025 में लद्दाख आंदोलन के दौरान उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में लिया गया और जोधपुर केंद्रीय कारागार भेजा गया। बाद में केंद्र सरकार ने आदेश वापस लिया और मार्च 2026 में उन्हें रिहा कर दिया गया।

 

NEET विवाद को लेकर नई भूमिका

 

हालिया समय में सोनम वांगचुक NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ आंदोलन से जुड़े। उन्होंने 28 जून को प्रदर्शनकारियों के समर्थन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की। 20 दिन से ज्यादा लंबे उपवास के बाद डॉक्टरों ने बताया कि उनका वजन करीब 9.5 किलोग्राम तक कम हो गया। स्वास्थ्य बिगड़ने की चिंता के बीच दिल्ली पुलिस उन्हें सफदरजंग अस्पताल लेकर गई।

 

‘3 Idiots’ के फुनसुख वांगडू से जुड़ी कहानी

 

सोनम वांगचुक का नाम अक्सर फिल्म ‘3 Idiots’ के किरदार फुनसुख वांगडू से जोड़ा जाता है। हालांकि अभिनेता आमिर खान और निर्देशक राजकुमार हिरानी ने हाल ही में कहा कि फिल्म बनाते समय वे वांगचुक से परिचित नहीं थे। इसके बाद सोशल मीडिया पर 2008 का एक वीडियो फिर वायरल हुआ, जिसमें वांगचुक CNN-IBN Real Heroes Award लेते नजर आए।