
भारत सरकार ने भारत-पाकिस्तान के बीच चल रहे कथित Track 2 Dialogue को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए इससे दूरी बना ली है। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा कि इस तरह की बैठकें पूरी तरह निजी पहल होती हैं और इनमें भारत सरकार की कोई आधिकारिक भागीदारी या समर्थन नहीं होता। उन्होंने बताया कि जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच व्यापार समझौते को तेजी से आगे बढ़ाने पर सहमति बनी थी।
मीडिया सवालों के जवाब में उन्होंने कहा कि ऐसे अनौपचारिक संवाद नए नहीं हैं और न ही इन्हें भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दुनियाभर में इस तरह की कई निजी बैठकें विभिन्न विषयों पर होती रहती हैं, जिनका सरकार से कोई संबंध नहीं होता। विक्टोरिया (सेशेल्स) में पत्रकारों से बातचीत करते हुए विदेश सचिव ने बताया कि कोलंबो में हुए हालिया कार्यक्रम में भारत और पाकिस्तान के पूर्व सैन्य अधिकारी, पूर्व राजनयिक और अन्य विशेषज्ञ शामिल हुए थे, लेकिन यह एक निजी स्तर का आयोजन था।
उन्होंने कहा कि ऐसे दर्जनों आयोजन दुनिया भर में होते रहते हैं। इनमें कुछ भी नया या विशेष नहीं है। ये पूरी तरह निजी संस्थाओं द्वारा आयोजित निजी कार्यक्रम होते हैं। भारत सरकार की इसमें कोई आधिकारिक भागीदारी या समर्थन नहीं है।
मिस्री ने यह भी साफ किया कि इनमें शामिल भारतीय प्रतिभागी- चाहे वे पूर्व राजनयिक हों या पूर्व सैन्य अधिकारी- अपनी व्यक्तिगत क्षमता में हिस्सा लेते हैं और उनके विचार सरकार की आधिकारिक नीति को नहीं दर्शाते। इसके अलावा विदेश सचिव ने भारत- अमेरिका व्यापार वार्ता का भी जिक्र किया। Edited by : Sudhir Sharma

