
झारखंड में हजारों छात्र-छात्राएं बीते कई दिनों से आंदोलन और भूख हड़ताल कर रहे हैं। छात्रों की मांग कोई एक परीक्षा रद्द कराना नहीं, बल्कि सरकारी नौकरियों के लिए नियुक्ति की प्रक्रिया को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की है। ALSO READ: क्या स्वस्थ रहने के लिए 8 घंटे सोना सच में जरूरी है?
राजधानी रांची के जयपाल सिंह स्टेडियम से लेकर अल्बर्ट एक्का चौक तक स्टूडेंट्स अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। इनकी मांग किसी का इस्तीफा या कोई जांच नहीं बल्कि पूरी नियुक्ति प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की है।
झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की भर्ती परीक्षाओं का नोटिफिकेशन के बाद सालों तक लंबित रहने, पेपर लीक और कथित धांधली से तंग आ चुके अभ्यर्थियों का आंदोलन और तेज हो गया है। झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की ओर से 19 अप्रैल को ली गई 14वीं प्रारंभिक परीक्षा (पीटी) में कथित धांधली और ओएमआर शीट में की गई गड़बड़ी की बात सामने आने के बाद छात्रों की नाराजगी भड़क उठी। ALSO READ: पृथ्वी पर ऑक्सीजन की उत्पत्ति की पहेली थोड़ी और सुलझी
सफल अभ्यर्थियों की योग्यता पर सवाल
इस परीक्षा का परिणाम आने के बाद मेरिट लिस्ट की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए। इसी बीच सोशल मीडिया पर एक ओएमआर शीट वायरल हुई। इसके अनुसार पेपर-1 में एक परीक्षार्थी ने सौ में केवल 48 प्रश्न हल किए थे, फिर भी उसे सफल घोषित कर दिया गया।
हंगामा बढऩे पर राज्य सरकार ने सीआईडी जांच की घोषणा की। इस बीच आयोग के अध्यक्ष एल। खियांग्ते ने इस्तीफा दे दिया। विवाद बढ़ा तो जेपीएससी ने संयुक्त सिविल सेवा (मुख्य) परीक्षा सहित नौ अन्य भर्ती परीक्षाएं रद्द कर दी।
जेपीएससी की तरह ही जेएसएससी भी विवादों में रहा है। जेएसएससी-सीजीएल (ग्रेजुएट लेवल) परीक्षा में पेपर लीक के साथ कई तरह की अनियमितताओं के आरोप लगे। 2026 की फील्ड वर्कर भर्ती परीक्षा को लेकर भी कई तरह की शिकायतें सामने आईं।
उम्र निकल जा रही है परीक्षाएं रद्द होने से
झारखंड में इससे पहले भी सरकारी नौकरियों के लिए ली जाने वाली परीक्षाएं या तो रद्द हुईं हैं या फिर टाल दी गईं हैं। इस कारण लाखों युवाओं की उम्र सीमा खत्म हो रही है। इस वजह से उनके भीतर आक्रोश चरम पर है और वे पिछले सात सालों में जेपीएससी और जेएसएससी की सभी बड़ी परीक्षाओं की निष्पक्ष जांच सीबीआई और ईडी से कराने की मांग कर रहे हैं।
प्रदर्शन में वैसे अभ्यर्थी भी शामिल हैं, जिन्होंने 2015 से ही फॉर्म भरना शुरू किया, लेकिन आज तक वे बेरोजगार हैं। अल्बर्ट एक्का चौक पर प्रदर्शन कर रहे जेएसएससी-सीजीएल परीक्षार्थी प्रदीप तिर्की कहते हैं, ‘‘कब तक इंतजार करेंगे। दस परीक्षाएं दीं, सात में सफल रहे लेकिन, आज भी बेरोजगार हैं। परीक्षाओं का कोई निश्चित वार्षिक कैलेंडर नहीं है, जिसके अनुसार समय पर भर्ती हो सके। राज्य में स्थानीय नियोजन नीति भी तय नहीं है, इसलिए बाहरी अभ्यर्थी जगह पा जा रहे।''
दूसरी तरफ मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन लगातार सभी आरोपों की जांच और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कह रहे हैं। इसके बावजूद स्टूडेंट्स का असंतोष कम नहीं हो रहा। ALSO READ: गुलामी की जंजीरों से निकला आइसक्रीम को स्वाद देने वाला वनीला
कई परीक्षाओं के 500 से अधिक ओएमआर शीट में हेरफेर
इस बीच जेपीएससी की बैकलॉग परीक्षा-2025 के रिजल्ट में भी बड़ा खेल सामने आया। सीआईडी की जांच में एक ऐसी ओएमआर शीट मिली, जिसमें एक अभ्यर्थी ने सौ में से केवल 32 सवाल हल किए थे। इनमें भी 17 गलत थे। लेकिन उस परीक्षार्थी को सफल घोषित कर दिया गया था। राजधानी रांची के नगड़ी थाना में दर्ज शिकायत के अनुसार परीक्षा समाप्त होने के बाद ओएमआर शीट में बदलाव किया गया या फिर रंग भरकर उत्तर बदले गए।
आरोप यह भी है कि परीक्षा का संचालन कर रही एजेंसी टीडीपीएल के कर्मियों की मदद से सर्वर में सेंध लगा कर कुछ परीक्षार्थियों के अंक बढ़ा दिए गए। आरोप के मुताबिक फॉरेस्ट रेंज अफसर परीक्षा की 350 तथा असिस्टेंट कंजर्वेटर ऑफ फारेस्ट परीक्षा की 150 ओएमआर शीट में गड़बड़ी की गई। सिविल सेवा अभ्यर्थी अन्वी मुर्मु कहती हैं, ‘‘ओएमआर शीट में पांचवां विकल्प 'प्रयास नहीं किया गया' वाला होना चाहिए। इससे खाली छोड़ी गई ओएमआर शीट को बाद में भरने की गुंजाइश खत्म हो जाएगी।''
सफल अभ्यर्थी ने गलत तरीके से परीक्षा पास करने की बात स्वीकारी
कथित रूप से जिस सुमन सौरभ की ओएमआर शीट की कार्बन कॉपी सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी, उसने गलत तरीके से परीक्षा पास करने की बात स्वीकार कर ली है। उसे गिरफ्तार किया जा चुका है। इस मामले की जांच कर रही सीआईडी ने अब तक उत्तर प्रदेश के एक आरोपी समेत 19 लोगों को गिरफ्त में लिया है।
इस बीच झारखंड सरकार ने छात्रों से बातचीत की पेशकश करते हुए इसके चार मंत्रियों तथा चार विभागीय सचिवों की एक समिति बनाई है, वहीं छात्रों ने भी बातचीत के लिए 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का गठन किया है।
इस्तीफा नहीं सुधार चाहते हैं छात्र
रांची में चल रहा प्रदर्शन दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन से अलग है। यहां हजारों छात्र-छात्राएं सडक़ पर हैं, लेकिन कोई भी प्रदर्शनकारी किसी का इस्तीफा नहीं मांग रहा है। प्रदर्शन कर रहे छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित धांधली की निष्पक्ष जांच कराने, नियुक्ति प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने तथा योग्य अभ्यर्थियों के लिए न्याय सुनिश्चित कराने की ही मांग कर रहे हैं।
प्रदर्शनकारी ठोस तर्कों और सबूतों के साथ संयमित भाषा में अपनी बात मीडिया के सामने रख रहे हैं। वे विरोध कर रहे हैं तो सरकार की कार्यप्रणाली या फिर उनकी नीतियों का।
राजनीतिक दल भले ही इन्हें समर्थन दे रहे, किंतु छात्रों ने किसी राजनेता से मंच साझा नहीं किया। नाराजगी के बीच भी वे सरकार के साथ टकराव की बात नहीं कर रहे और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से आग्रह करते हुए सभी परीक्षाओं की सीबीआई और ईडी से जांच की मांग करते हुए इंसाफ मांग रहे हैं।

