
Passport : विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारतीय पासपोर्ट नागरिकता का निर्णायक प्रमाण नहीं बल्कि एक यात्रा दस्तावेज है। सरकार के अनुसार इसका मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय यात्रा और विदेश में पहचान स्थापित करना है। 2025 में 1.5 करोड़ लोगों को पासपोर्ट सेवाएं प्रदान की गईं। ALSO READ: 1 जुलाई से ट्रेन में बेटिकट सफर पड़ेगा भारी, 500 रुपये जुर्माना; दूसरे के टिकट पर यात्रा करने वालों पर भी सख्ती
सरकार ने पासपोर्ट और मोबिलिटी इकोसिस्टम पर विस्तृत ब्रीफिंग के दौरान कहा कि पासपोर्ट भारतीय नागरिकों को जारी किया जाता है, लेकिन इसका मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय यात्रा को आसान बनाना और विदेश में पहचान स्थापित करना है।
A Passport to Trust, Technology and Transformation.
On the occasion of the 14th Passport Seva Divas, I extend my appreciation to all passport officials across India and in our Missions and Posts abroad for their dedicated service and unwavering commitment to citizens.
Over the… pic.twitter.com/AXd01xE5Zv
— Kirti Vardhan Singh (@KVSinghMPGonda) June 24, 2026
गौरतलब है कि देशभर में अब 545 से अधिक पासपोर्ट केंद्र कार्यरत हैं। 2025 में 1.5 करोड़ लोगों को पासपोर्ट तथा संबंधित सेवाएं प्रदान की गई हैं। इनमें से केवल पासपोर्टों की संख्या 1.39 करोड़ रही। उल्लेखनीय है कि पासपोर्ट मुख्य रूप से यात्रा का दस्तावेज है, न कि नागरिकता का प्रमाण। ALSO READ: E20 पेट्रोल से इंजन खराब हुआ तो क्या इंश्योरेंस क्लेम मिलेगा? सरकार ने बताई सचाई, क्या बोलीं बीमा कंपनियां
पुलिस सत्यापन को छोड़कर पासपोर्ट जारी करने में औसतन छह कार्य दिवस लगते हैं। पासपोर्ट सेवा केंद्रों और पोस्ट आफिस पासपोर्ट सेवा केंद्रों में आवेदकों द्वारा बिताया जाने वाला समय 45 मिनट से भी कम है।
इससे पहले भी आधार कार्ड और मतदाता पहचान पत्र सहित अन्य दस्तावेजों को नागरिकता के प्रमाण के रूप में इस्तेमाल करने पर सवाल उठाए जा चुके हैं।
edited by : Nrapendra Gupta

