BADMINTION ASIA CHAMPIONSHIPS : 61 साल बाद फाइनल में पहुंचा भारत, आयुष शेट्टी ने जीता ऐतिहासिक सिल्वर

Asia Championships Final : भारतीय युवा शटलर आयुष शेट्टी (Ayush Shetty) ने बैडमिंटन एशिया चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करते हुए इतिहास रच दिया। 20 साल के इस खिलाड़ी ने मेंस सिंगल्स में सिल्वर मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया। हालांकि फाइनल में उन्हें चीन के वर्ल्ड नंबर-2 खिलाड़ी शी यू की के खिलाफ 8-21, 10-21 से हार का सामना करना पड़ा।

 

 

61 साल बाद भारतीय खिलाड़ी फाइनल में

 

आयुष शेट्टी से पहले आखिरी बार 1965 में कोई भारतीय खिलाड़ी इस टूर्नामेंट के मेंस सिंगल्स फाइनल में पहुंचा था। उस समय दिनेश खन्ना ने गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रचा था।

अब 61 साल बाद आयुष ने फाइनल में जगह बनाकर इस लंबे इंतजार को खत्म किया।

 

सिल्वर जीतने वाले पहले भारतीय शटलर

 

इस हार के बावजूद आयुष शेट्टी ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की। वह बैडमिंटन एशिया चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष खिलाड़ी बन गए हैं। इससे पहले भारत को इस कैटेगरी में सिर्फ 1965 में दिनेश खन्ना के रूप में गोल्ड मिला था।

 

 भारत का 19वां मेडल

 

1962 से खेले जा रहे इस टूर्नामेंट में यह भारत का कुल 19वां मेडल है।

भारत ने अब तक:

 

  • 2 गोल्ड
  • 1 सिल्वर (आयुष शेट्टी)
  • 16 ब्रॉन्ज मेडल जीते हैं

मेंस सिंगल्स में 1965 में दिनेश खन्ना ने गोल्ड जीता था, जबकि 2023 में सात्विक-चिराग की जोड़ी ने मेंस डबल्स में गोल्ड अपने नाम किया था।

 

 

पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन

 

आयुष शेट्टी का प्रदर्शन पूरे टूर्नामेंट में शानदार रहा। उन्होंने कई बड़े खिलाड़ियों को हराकर फाइनल तक का सफर तय किया।

 

  • वर्ल्ड नंबर 1
  • वर्ल्ड नंबर 4
  • वर्ल्ड नंबर 7

 

जैसे टॉप खिलाड़ियों को हराकर उन्होंने अपनी काबिलियत साबित की। सेमीफाइनल में उन्होंने डिफेंडिंग चैंपियन कुन्लावत वितिदसर्न को हराकर फाइनल में जगह बनाई।

हार से सीखेंगे आयुष

 

फाइनल के बाद आयुष ने माना कि वह अपने प्रदर्शन से थोड़ा निराश हैं, लेकिन उन्होंने इसे सीखने का मौका बताया। उन्होंने कहा कि उन्हें अपनी फिटनेस, ताकत और गेम में सुधार करने की जरूरत है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यह पूरा हफ्ता उनके करियर के लिए शानदार रहा और वह अपने प्रदर्शन से खुश हैं।

 

 भविष्य का बड़ा सितारा

 

आयुष शेट्टी ने इस टूर्नामेंट में साबित कर दिया कि वह भारतीय बैडमिंटन के उभरते हुए सितारे हैं। 61 साल बाद फाइनल तक पहुंचना और सिल्वर जीतना एक बड़ी उपलब्धि है। अगर वह इसी तरह मेहनत करते रहे, तो आने वाले समय में भारत के लिए गोल्ड मेडल भी जीत सकते हैं। आयुष शेट्टी ने भले ही फाइनल नहीं जीता, लेकिन उन्होंने अपने प्रदर्शन से दिखा दिया कि भारतीय बैडमिंटन का भविष्य मजबूत हाथों में है।