मकान या जमीन खरीदने, किराया देने या किसी ठेकेदार और प्रोफेशनल को भुगतान करने वालों के लिए TDS जमा करने का तरीका बदल गया है। इनकम टैक्स विभाग ने ऐसे लेनदेन पर TDS के भुगतान और उसकी जानकारी देने के लिए Form 141 शुरू किया है, जिसने 4 पुराने फॉर्म की जगह ले ली है। लेकिन इसमें एक पेच है। एक Form 141 में सिर्फ एक तरह के लेनदेन का शेड्यूल भरा जा सकता है। यानी अगर आपने मकान भी खरीदा है और किसी को किराया भी दिया है, तो आपको दो अलग-अलग Form 141 भरने होंगे।
एक फॉर्म, चार पुराने फॉर्म की छुट्टी
Form 141 एक चालान-कम-स्टेटमेंट है। मतलब इसी एक फॉर्म के जरिए संबंधित लेनदेन पर काटे गए TDS का भुगतान भी होता है और उसकी रिपोर्टिंग भी। यह फॉर्म इनकम टैक्स एक्ट, 2025 के तहत लागू किया गया है और टैक्स ईयर 2026-27 से जुड़े लेनदेन के लिए इस्तेमाल होता है।
पहले इन खास लेनदेन के लिए अलग-अलग दरवाजे खटखटाने पड़ते थे। अचल संपत्ति की खरीद पर TDS के लिए Form 26QB था, किराये के भुगतान पर TDS के लिए Form 26QC, ठेकेदारों और प्रोफेशनल्स को भुगतान पर TDS के लिए Form 26QD और वर्चुअल डिजिटल एसेट के ट्रांसफर पर TDS के लिए Form 26QE।
अब इन चारों को एक साझा व्यवस्था में लाकर Form 141 के अंदर अलग-अलग शेड्यूल में बांट दिया गया है। इसका मकसद TDS की रिपोर्टिंग और भुगतान की प्रक्रिया को आसान बनाना है। फॉर्म भले एक हो गया हो, लेकिन हर लेनदेन के लिए सही शेड्यूल चुनना अब भी जरूरी है।
पांच शेड्यूल, पांच अलग रास्ते
Form 141 को एक इमारत की तरह समझिए, जिसमें अलग-अलग कमरे हैं और हर कमरे का काम तय है। फॉर्म भरने वाले को अपने भुगतान की प्रकृति देखकर सही कमरे यानी सही शेड्यूल में जाना होता है।
Schedule A किसी व्यक्ति या हिंदू अविभाजित परिवार यानी HUF की ओर से किए गए निर्धारित किराया भुगतान पर TDS की रिपोर्टिंग के लिए है। Schedule B अचल संपत्ति की खरीद या ट्रांसफर पर लागू TDS के लिए है। Schedule C व्यक्ति या HUF की ओर से ठेकेदारों और प्रोफेशनल्स को किए गए निर्धारित भुगतान पर TDS के लिए है। वहीं Schedule D क्रिप्टोकरेंसी जैसे वर्चुअल डिजिटल एसेट यानी VDA के ट्रांसफर पर लागू TDS के लिए है।
इन चारों के अलावा 1 अक्टूबर 2026 से एक नया Schedule E भी जोड़ा गया है। इसका इस्तेमाल तब किया जा सकता है, जब कोई निवासी व्यक्ति या HUF किसी गैर-निवासी विक्रेता से अचल संपत्ति खरीदता है और उस लेनदेन पर TDS काटना जरूरी होता है।
यहीं है असली पेच, एक फॉर्म में एक ही तरह का लेनदेन
चार फॉर्म के एक में बदलने से बहुत से लोगों को लग सकता है कि अब सारे लेनदेन एक ही बार में निपट जाएंगे। ऐसा नहीं है। एक Form 141 में सिर्फ एक तरह के लेनदेन से जुड़ा शेड्यूल ही भरा जा सकता है।
मान लीजिए अमित ने इस टैक्स ईयर में एक मकान खरीदा और साथ ही किसी को किराया भी दिया। दोनों पर TDS लागू होता है, तो अमित को मकान खरीद के लिए एक Form 141 और किराये के लिए दूसरा Form 141 भरना होगा।
एक राहत भी है। एक ही कैटेगरी के कई भुगतान पाने वालों की जानकारी कुछ शर्तों के साथ एक ही फॉर्म में दी जा सकती है। इसके लिए सभी लोगों की कैटेगरी और TDS कटौती का महीना एक जैसा होना चाहिए। अगर कटौती अलग-अलग महीनों में हुई है या भुगतान पाने वाले अलग-अलग कैटेगरी के हैं, तो अलग फॉर्म की जरूरत पड़ सकती है।
हर भुगतान पर नहीं कटता TDS
Form 141 भरने की नौबत तभी आती है, जब लेनदेन पर TDS लागू हो। हर भुगतान पर TDS नहीं कटता। इसके लिए संबंधित लेनदेन की तय सीमा और दूसरे नियम पूरे होने जरूरी हैं।
इनकम टैक्स विभाग की जानकारी के मुताबिक, सामान्य तौर पर किराये के भुगतान के लिए सीमा 50,000 रुपये प्रति माह या महीने के किसी हिस्से का किराया है। अचल संपत्ति के ट्रांसफर में यह सीमा 50 लाख रुपये या उससे ज्यादा की है। ठेकेदार, प्रोफेशनल, कमीशन या ब्रोकरेज भुगतान के लिए 50 लाख रुपये की सीमा है। वहीं वर्चुअल डिजिटल एसेट के ट्रांसफर के लिए कोई न्यूनतम रकम की सीमा तय नहीं है।
इन सीमाओं के साथ संबंधित प्रावधानों की बाकी शर्तें भी लागू होती हैं। खास तौर पर ठेकेदारों और प्रोफेशनल्स को भुगतान के मामले में यह देखना जरूरी है कि भुगतान करने वाला व्यक्ति या HUF किस कैटेगरी में आता है।
फॉर्म भरने की जिम्मेदारी किसकी
यह फॉर्म आम तौर पर उस व्यक्ति या संस्था को भरना होता है, जिस पर संबंधित भुगतान से TDS काटने और उसे सरकार के खाते में जमा करने की जिम्मेदारी है। जैसे प्रॉपर्टी खरीदने वाला व्यक्ति, किराया देने वाला किरायेदार या कोई निर्धारित भुगतान करने वाला व्यक्ति।
सभी शेड्यूल हर तरह के करदाता के लिए नहीं हैं। Schedule A, C और D में व्यक्ति या HUF की पात्रता से जुड़ी शर्तें लागू होती हैं। Schedule B और Schedule E के नियम भी अलग हैं। इसलिए फॉर्म चुनने से पहले अपने लेनदेन और अपनी करदाता श्रेणी की जांच जरूर कर लें।
पोर्टल पर कैसे भरें फॉर्म और कब तक
Form 141 इनकम टैक्स विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल पर PAN लॉगिन के जरिए भरा जा सकता है। सबसे पहले पोर्टल पर अपने PAN से लॉगिन करें। इसके बाद e-File में जाकर e-Pay Tax का विकल्प चुनें। फिर Income-tax Act, 2025 चुनकर New Payment पर जाएं। यहां Form 141 चुनें और अपने लेनदेन के हिसाब से संबंधित शेड्यूल भरें। आखिर में जरूरी जानकारी दर्ज करके TDS का भुगतान करें और फॉर्म जमा कर दें।
समय का ध्यान रखना यहां सबसे जरूरी है। विभाग के निर्देशों के मुताबिक, जिस महीने TDS काटा गया, उस महीने के अंत से 30 दिनों के भीतर फॉर्म जमा करना होता है। मिसाल के तौर पर, अगर TDS नवंबर में काटा गया है, तो नवंबर खत्म होने के बाद 30 दिन के अंदर फॉर्म जमा हो जाना चाहिए। देरी होने पर लागू नियमों के तहत फीस या ब्याज लग सकता है।
गलती से बचने के लिए आखिरी जांच
Form 141 से 4 पुराने फॉर्म की रिपोर्टिंग एक साझा व्यवस्था में जरूर आ गई है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर लेनदेन पर एक जैसा नियम लागू होगा। सही शेड्यूल चुनना, भुगतान पाने वाले की श्रेणी और रिहायशी स्थिति देखना और समयसीमा का पालन करना जरूरी है।
अगर आप किसी गैर-निवासी विक्रेता से प्रॉपर्टी खरीद रहे हैं, तो 1 अक्टूबर 2026 से लागू Schedule E के नए नियमों को खास तौर पर ध्यान में रखें। अंतिम फाइलिंग से पहले इनकम टैक्स विभाग के आधिकारिक निर्देश जरूर जांच लें, ताकि गलत शेड्यूल या गलत जानकारी की वजह से बाद में परेशानी न हो।

