अगर आप म्यूचुअल फंड में इन्वेस्ट करना चाहते हैं तो ये खबर आपके लिए काम की है। म्यूचुअल फंड से जुड़े कुछ नियमों में बदलाव हुआ है। SEBI के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे की घोषणा के अनुसार, आज 1 नवंबर 2026 से म्यूचुअल फंड कंपनियों के अपने ऐप और वेबसाइट पर डायरेक्ट प्लान डिफॉल्ट ऑप्शन बन गया है। यानी निवेश करने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म खोलने पर सबसे पहले डायरेक्ट प्लान दिखाई देगा। यानी निवेश करने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म खोलने पर सबसे पहले डायरेक्ट प्लान दिखाई देगा।
वहीं, अगर कोई निवेशक रेगुलर प्लान चुनता है, तो उसे पहले ही बता दिया जाएगा कि इसमें डायरेक्ट प्लान के मुकाबले ज्यादा खर्च (एक्सपेंस रेशियो) देना पड़ता है। इसका मकसद निवेशकों को खर्च और निवेश से जुड़े फैसलों की बेहतर जानकारी देना है।
10 हजार की SIP से करें शुरुआत
अगर आप म्यूचुअल फंड में निवेश की योजना बना रहे हैं 10,000 रुपये की SIP से आपको भविष्य में काफी फायदा हो सकता है। अगर आप हर महीने 10,000 रुपये की SIP करते हैं, तो सही म्यूचुअल फंड प्लान चुनकर लंबे समय में लाखों रुपये का फायदा मिल सकता हैं। डायरेक्ट और रेगुलर प्लान के खर्च में थोड़ा अंतर होता है, जिसका असर लंबे समय में मिलने वाले रिटर्न पर पड़ता है। एक कैलकुलेशन के मुताबिक, 20 साल में इस अंतर से आपको 9 लाख रुपये से ज्यादा का फायदा हो सकता है। आइए जानते हैं कि यह कैसे संभव है। आइए समझते हैं कि ये कैलकुलेशन कैसे काम करता है और कैसे उठा सकते हैं इसका फायदा।
उदाहरण से समझिए
इसे समझने के लिए तीन म्यूचुअल फंड स्कीम का उदाहरण लेते हैं, जिनमें डायरेक्ट और रेगुलर प्लान का खर्च अलग-अलग है। मान लीजिए कोई निवेशक हर महीने 10,000 रुपये निवेश करता है और तीनों स्कीम में खर्च घटाने से पहले सालाना 12 फीसदी रिटर्न मिलता है। ऐसे में दोनों प्लान के एक्सपेंस रेशियो में अंतर का असर 10 और 20 साल के निवेश पर साफ दिखाई दे सकता है। लंबे समय तक निवेश करने पर खर्च में मामूली अंतर भी कुल रिटर्न में बड़ा फर्क पैदा कर सकता है।
उदाहरण के तौर पर Groww Large Cap Fund को देखें तो अगर कोई व्यक्ति 20 साल तक हर महीने 10,000 रुपये की SIP करता है, तो उसका कुल निवेश 24 लाख रुपये होगा। दिए गए अनुमान के मुताबिक, डायरेक्ट प्लान में यह रकम बढ़कर करीब 84.53 लाख रुपये हो सकती है, जबकि रेगुलर प्लान में लगभग 75.06 लाख रुपये मिलने का अनुमान है। यानी दोनों प्लान के खर्च में अंतर के कारण निवेशक को करीब 9.47 लाख रुपये का फायदा हो सकता है। इससे साफ है कि लंबे समय तक निवेश करने पर कम खर्च वाला प्लान चुनना फायदेमंद साबित हो सकता है।
जानें डायरेक्ट और रेगुलर म्यूचुअल फंड के बारे में
किसी भी म्यूचुअल फंड में निवेश करते समय उसके खर्चों पर ध्यान देना भी बेहद जरूरी है। डायरेक्ट और रेगुलर म्यूचुअल फंड दोनों में पैसा एक ही जगह निवेश किया जाता है और इन्हें एक ही फंड मैनेजर संभालता है। इन दोनों के बीच सबसे बड़ा अंतर इनके खर्च का होता है। डायरेक्ट प्लान में डिस्ट्रीब्यूटर या एजेंट का कमीशन नहीं देना पड़ता, इसलिए इसका खर्च कम होता है। वहीं, रेगुलर प्लान में बिचौलियों को कमीशन दिया जाता है, जिसके कारण इसकी लागत बढ़ जाती है। इन खर्चों की कटौती फंड के कुल पैसे से होती है, जिसका असर उसकी NAV और निवेशकों को मिलने वाले रिटर्न पर पड़ता है।
किसके लिए कौन सा प्लान सही
डायरेक्ट म्यूचुअल फंड प्लान उन लोगों के लिए बेहतर ऑप्शन हो सकते हैं, जो खुद फंड चुनने और अपने निवेश पर नजर रखने की जानकारी रखते हैं। वहीं, जिन निवेशकों को निवेश से जुड़े फैसले लेने में किसी एक्सपर्ट की मदद चाहिए, वे रेगुलर प्लान चुन सकते हैं। SEBI के नए नियम से रेगुलर प्लान बंद नहीं होंगे और न ही पहले से किए गए निवेश अपने आप डायरेक्ट प्लान में बदलेंगे। निवेशक अपनी जरूरत और सुविधा के अनुसार दोनों में से किसी भी प्लान को चुन सकते हैं।
निवेशकों को ये ध्यान रखना चाहिए कि बेस एक्सपेंस रेशियो ही म्यूचुअल फंड का पूरा खर्च नहीं होता। SIP शुरू करने से पहले म्यूचुअल फंड के खर्चों की तुलना जरूर करें, क्योंकि इसका असर लंबे समय में आपके रिटर्न पर पड़ता है।
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