
एक नीले ड्रम में बंद लाश… सीमेंट की मोटी परत के पीछे छिपा था पत्नी की घिनौनी हरकत का राज। पति की हत्या के बाद प्रेमी के साथ घूमने निकलने की कहानी। मेरठ के सौरव राजपूत हत्याकांड ने जब पर्दे के पीछे से निकलकर दुनिया के सामने दस्तक दी, तो हर कोई सन्न रह गया। पुलिस फाइल के पन्नों के मुताबिक इस मामले में सौरव की पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला पर हत्या का आरोप है।
अब इस सनसनीखेज मामले में करीब 13 महीने चली अदालती कार्रवाई के बाद 30 सितंबर को कोर्ट अपना फैसला देने वाली है।
फैसले की घड़ियां जैसे-जैसे करीब आ रही है, जेल में बंद मुस्कान की दिनचर्या भी चर्चा में भी परिवर्तन होता जा रहा है। जेल सूत्रों वह सुबह-शाम भगवान की पूजा-अर्चना कर रही है। उधर, सौरभ के परिजन उस क्षण का इंतजार कर रहे हैं, जब अदालत इस मामले में अपना फैसला सुनाएगी।
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126 पेशियां, 22 गवाह और तमाम सबूत
17 मार्च 2025 से शुरू हुई सुनवाई के दौरान मामले में करीब 126 पेशियां हुईं। अभियोजन पक्ष ने अदालत में 22 गवाहों के बयान दर्ज कराए। जिला शासकीय अधिवक्ता कृष्ण कुमार चौबे के मुताबिक, वैज्ञानिक साक्ष्यों और गवाहों के बयानों को सिलसिलेवार तरीके से अदालत के सामने रखा गया है।
अब दोनों पक्षों की बहस पूरी हो चुकी है और 30 सितंबर को जिला अदालत के न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा फैसला सुनाएंगे। अदालत के इस निर्णय पर सौरव के परिवार के साथ-साथ पूरे मामले पर नजर रखने वालों की निगाहें टिकी हैं।
प्रेम विवाह से शुरू हुई कहानी में कब आया तीसरा किरदार?
पुलिस और अभियोजन पक्ष के मुताबिक, मुस्कान रस्तोगी उर्फ सोभी ने 2016 में सौरव राजपूत से प्रेम विवाह किया था। 2019 में दोनों की बेटी हुई। इसी दौरान मुस्कान की मुलाकात उसके पुराने सहपाठी साहिल शुक्ला से हुई। दोनों के बीच नजदीकियां बढ़़ने लगी, जिसको लेकर कई बार सौरव और मुस्कान के रिश्ते में विवाद भी हुआ।
सौरव मर्चेंट नेवी की नौकरी छोड़कर लंदन चला गया था और अपनी बेटी और पत्नी के पास वापस मेरठ लौट कर आया। सौरव ने अपनी बेटी को शॉपिंग करवाई, मुस्कान के साथ जन्मदिन पार्टी में जमकर डांस किया, लेकिन उसे जरा भी अहसास नही था कि यह खुशियां कुछ समय की मेहमान है। इसी दौरान घटनाक्रम उस मोड़ पर पहुंचा, जिसने पूरे मामले को हत्या के मुकदमे में बदल दिया।
3 मार्च की रात क्या हुआ था?
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 3 मार्च 2025 की रात सौरभ की हत्या कर दी गई। आरोप है कि हत्या के बाद शव के तीन टुकड़े किए गए और उन्हें एक नीले ड्रम में डालकर सीमेंट से सील कर दिया गया। इसके बाद मुस्कान और साहिल के हिमालय घूमने चले गये।
मामले का राज तब खुला, जब सौरव की बेटी ने अपने पिता से मिलने की जिद की। पुलिस के मुताबिक मुस्कान के परिजनों को कुछ संदेह हुआ, उन्होंने सख्ती के साथ मुस्कान से पूछताछ की और फिर दिल दहलाने वाला खुलासा हुआ। मुस्कान के माता-पिता के पैरों तले जमीन खिसक गई, लेकिन वह अपनी बेटी के गुनाहा में शामिल नही हुए, खुद थाने ले जाकर बेटी को पुलिस के हवाले कर दिया गया।
अब अदालत बताएगी आरोपों का कानूनी अंजाम
ब्रह्मपुरी थाने में मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस ने मुस्कान और साहिल को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। इसके बाद शुरू हुई कानूनी प्रक्रिया 13 महीने तक चली। अभियोजन पक्ष ने 22 गवाहों और वैज्ञानिक साक्ष्यों के जरिए अपना पक्ष रखा। पुलिस ने नीले ड्रम विक्रेता, दवा विक्रेता, छुरी और सीमेंट बेचने वालों की गवाही देकर मजबूत साक्ष्य प्रस्तुत किये। अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता ने इसे जघन्य अपराध मानते हुए मजबूत पैरवी की है
अब 30 सितंबर को अदालत का फैसला इस मामले का अगला अध्याय तय करेगा। मुस्कान और साहिल पर लगाए गए आरोप अदालत में किस हद तक साबित होते हैं और अदालत क्या निर्णय सुनाती है, इसका जवाब अब फैसले के दिन मिलेगा।


