
- मध्यप्रदेश में पीपीपी मॉडल पर होगा बसों का संचालन
- नई बस सेवा में एआईसीटीएसएल को भी किया गया है मर्ज
- इंदौर से चलेंगी 145 बसें, कुल 15 हजार बसें चलाने का लक्ष्य
- जानिए क्या है इन आधुनिक बसों की खासियत
मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री सुगम बस सेवा का श्रीगणेश होने जा रहा है। बता दें कि मुख्यमंत्री सुगम बस सेवा की शुरुआत हो चुकी है। इस बस सेवा से इंदौर के आसपास के शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों से कनेक्टिविटी और मजबूत होगी। ऐसे में सबसे ज्यादा फायदा इंदौर के यात्रियों को मिलने की उम्मीद है। शासन ने करीब 15 हजार बसें चलाने का लक्ष्य रखा है।
बता दें कि शुक्रवार को इस सेवा के तहत 351 बसें चलेंगी, इनमें से 145 बसें इंदौर से चलेंगी। इसका साफ मतलब है कि इतनी संख्या में बसें चलने से इंदौर के यात्रियों को फायदा होगा।
पीपीपी मॉडल पर होगा संचालन : बता दें कि इंदौर में एआईसीटीएसएल का पहले से आसपास के कई शहरों में नेटवर्क है। नई बस सेवा में एआईसीटीएसएल को मर्ज कर लिया गया है। इस कारण इंदौर में पहले से चल रही बसों की संख्या बढ़ गई है। नया मॉडल पीपीपी पर होगा।
बता दें कि जन-निजी भागीदारी को गति देने के लिए पारदर्शी अनुबंध प्रणाली और प्रोत्साहन योजनाएं लागू की जाएगी। इस मॉडल से निजी बस ऑपरेटरों को राजस्व रिसाव रोकने, नॉन-फेयर रेवेन्यू (जैसे विज्ञापन व कार्गो सेवाएं) बढ़ाने और आधुनिक डिपो व टर्मिनलों के उपयोग की सुविधाएं मिलेंगी साथ ही प्रशासन का पूर्ण सहयोग भी मिलेगा।
40 नए रूट जुड़ेंगे : मुख्यमंत्री सुगम बस सेवा में 40 नए रूट जुड़ेंगे। इन रूटों पर 60 से ज्यादा नई बसों का संचालन होगा। इससे इंदौर से आसपास के इलाके भी जुड़ जाएंगे। अभी इंदौर से उज्जैन, खंडवा, झाबुआ, धार, आलीराजपुर, कुक्षी, खरगोन सहित अन्य शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों तक बसों का संचालन होता है। अभी प्रदेश में 351 बसों से शुरुआत हो रही है, लेकिन तीन साल में डेढ़ हजार बसों का नेटवर्क पूरे प्रदेश में रहेगा। बसों का संचालन एक निजी ऑपरेटर के जरिए किया जा रहा है और संचालन का पैटर्न एआईसीटीएसएल की तर्ज पर ही होगा। इस सेवा की बसों के टिकट ऑनलाइन भी मिल सकेंगे।
7 शहरों से 351 बसों से शुरुआत : पहले चरण में सबसे ज्यादा बसें इंदौर में 145 और भोपाल में 106 चलेंगी। जबलपुर में 67, रीवा में 18, देवास में 10, कटनी में 3 और भिंड में 2 बसें शुरू होंगी। इनमें शहर के भीतर चलने वाली इंट्रासिटी और शहरों को जोड़ने वाली इंटरसिटी बसें शामिल हैं। इंदौर में 50 इंटरसिटी और 95 इंट्रासिटी, जबकि भोपाल में 23 इंटरसिटी और 83 इंट्रासिटी बसें रहेंगी। जबलपुर में 14 इंटरसिटी और 53 इंट्रासिटी बसों का संचालन होगा। रीवा, देवास, कटनी और भिंड में फिलहाल इंटरसिटी सेवाएं शुरू की जा रही हैं।
क्या है सुगम सेवा बसों की खासियत : इस सेवा की खासियत सिर्फ बसों की संख्या नहीं, बल्कि इनमें इस्तेमाल होने वाली तकनीक भी है। बसों में सीसीटीवी कैमरे, पैनिक बटन और व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस लगाए गए हैं। इसका उद्देश्य खासतौर पर महिलाओं और बच्चों समेत सभी यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाना है। यात्रा के दौरान बस कहां पहुंची, इसकी जानकारी भी तकनीक के जरिये मिल सकेगी। बसों में पैसेंजर इनफॉरमेशन सिस्टम भी लगाया गया है, जिससे यात्रियों को यात्रा से जुड़ी जरूरी जानकारी मिल सकेगी।
कंट्रोल रूम से होगी बसों की निगरानी : बसों को सिर्फ सड़क पर उतारकर छोड़ने के बजाय उनके संचालन पर कमांड सेंटर से नजर रखी जाएगी। इसके लिए इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) का इस्तेमाल होगा। बस की लोकेशन, संचालन और समयबद्धता की रियल टाइम निगरानी की जाएगी। हर बस में लगी लोकेशन ट्रैकिंग व्यवस्था से यह भी पता लगाया जा सकेगा कि बस निर्धारित रूट पर कहां चल रही है। किसी आपात स्थिति में पैनिक बटन के जरिये मदद मांगी जा सकेगी। बता दें कि इंदौर से चलने वाली बसों में अभी सबसे ज्यादा भोपाल की कनेक्टिविटी है। दिव्यांग यात्रियों को किराए में 50 प्रतिशत छूट मिलेगी। इस सेवा में प्रति किलोमीटर किराया 2 रुपए तक रहेगा। यात्रियों को ऐप की सुविधा भी मिलेगी, जिसमें वे बसों की समय-सारणी और आने-जाने की स्थिति की जानकारी भी ले सकेंगे।


