सागर में जहरीली शराब से अब तक 22 की मौत, 100 से अधिक की हालत गंभीर, मजिस्ट्रियल जांच के आदेश

सागर में जहरीली शराब से अब तक 22 की मौत, 100 से अधिक की हालत गंभीर, मजिस्ट्रियल जांच के आदेश

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भोपाल। सागर में जहरीली शराब से हो रही मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। अब तक जहरीली  शराब के पीने से 22 लोगों  की मौत हो चुकी है। वहीं 100 से अधिक लोग बीमार है, जिसमें कई की हालत गंभीर है। इस बीच पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने जहरीली शराब से 50 लोगों की मौत का दावा किया है। वहीं मौते के लगातार बढ़ते आंकड़ों के बीच सागर कलेक्टर प्रतिभा पाल ने पूरे मामले की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दे दिए है।  

 

वहीं डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा ने कहा कि पूरे मामले की जांच हो रही है और किसी भी दोषी को छोड़ा नहीं जाएगा। उन्होंने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि लापरवाही बरतने वाले तीन अधिकारियों को निलंबित किया गया है। वहीं नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के बयाान पर पटलवार करते हुए जगदीश देवड़ा ने कहा कि शराब पीने की घटना को जाति के आधार पर देखना उचित नहीं है। ऐसे मुद्दों पर सियासी रोटियं सेंकने की कोशिश नहीं होनी चाहिए और लाशों  के उपर राजनीति नहीं करना चाहिए। इसके साथ ही डिप्टी सीएम ने लोगों से अपील कीी यदि कहीं अवैध या जहरीली शराब बनाए जाने या बेचे जाने की जानकारी मिलती है तो इसकी सूचना  सरकार और प्रशासन को दें। 

 

गौरतलब है कि इससे पहले नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सागर में जहरीली शराब से हो रही मौतों पर सरकार पर हमला बोलते हुए कहा था कि मध्यप्रदेश में लगाातार हिंदुओं की मौत हो रही है और सरकार के जिम्मेदार अधिकारी जहरीली शराब के मामले में डिस्टलरी मालिकों को बचाने में लगे है। सिंघार ने आबकारी विभाग के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि विभाग ने पहले जहरीली शराब की बिक्री पर बैन लगाया गया और फिर  को पीने योग्या बताया। फिर क्यों नहीं बिक्री पर रोक नहीं लगाई गए। उन्होंने मृतकों के परिजनों के लिए 25 लाख के मुआवजे की मांग की। 

 

सस्ती शराब के कारोबार पर सवाल-घटना के बाद अवैध शराब के कारोबार को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर ऐसी शराब लाइसेंसी दुकानों से कम कीमत पर उपलब्ध होने के दावे सामने आए हैं। जांच में नकली शराब की बोतलों के रैपर और क्यूआर कोड के इस्तेमाल की बात भी सामने आई है। प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए कुछ शराब दुकानों को सील किया है।  
 

जहरीली शराब से हुई मौतों ने एक बार फिर मध्य प्रदेश में अवैध शराब के नेटवर्क और उसकी निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल पुलिस और प्रशासन शराब की सप्लाई के स्रोत और इस पूरे नेटवर्क से जुड़े लोगों की तलाश में जुटे हैं।