कंप्यूटर साइंस फैकल्टी ने पद्मश्री डॉ. जनक पलटा मगिलिगन से सीखे सतत जीवनशैली के गुर

कंप्यूटर साइंस फैकल्टी ने पद्मश्री डॉ. जनक पलटा मगिलिगन से सीखे सतत जीवनशैली के गुर

acropolis janak palta mcgilligan

इन्दौर: एक्रोपोलिस इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड रिसर्च, इन्दौर के कंप्यूटर साइंस विभाग के फैकल्टी सदस्यों के एक समूह ने 'जिम्मी मगिलिगन सेंटर फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट' का शैक्षणिक दौरा किया। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य प्रकृति के अनुकूल और सतत (सस्टेनेबल) जीवनशैली को व्यावहारिक रूप से सीखना और समझना था।

 

प्राकृतिक जैव विविधता और पर्यावरण-अनुकूल आवास का अवलोकन

सेंटर की निदेशिका, पद्मश्री डॉ. (श्रीमती) जनक पलटा मगिलिगन ने सभी फैकल्टी सदस्यों का आत्मीय स्वागत किया। संक्षिप्त परिचय के उपरांत उन्होंने अपने जैव विविधता फार्म का भ्रमण करवाया, जहाँ विभिन्न प्रकार के फूलों, फलों, सब्जियों, वनस्पतियों और जीवों की जानकारी दी गई।

प्रकृति के पाँच तत्वों का सामंजस्य: डॉ. मगिलिगन ने बताया कि उनके स्वर्गीय पति श्री जिम्मी मगिलिगन ने इस आवास का निर्माण करते समय पंचतत्वों (मिट्टी, जल, अग्नि, वायु और आकाश) का विशेष ध्यान रखा था।

प्राकृतिक रोशनी और वेंटीलेशन: घर में बड़ी-बड़ी खिड़कियाँ इस प्रकार बनाई गई हैं कि दिन के समय बिजली की आवश्यकता नहीं पड़ती।

तापमान नियंत्रण: चारों ओर सघन वृक्षों से घिरे होने के कारण परिसर हवादार रहता है और यहाँ का तापमान प्राकृतिक रूप से संतुलित बना रहता है।

 

उन्नत हरित तकनीक और सोलर कुकिंग का लाइव प्रदर्शन

भ्रमण के दौरान नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों पर आधारित सरल, उन्नत और कुशल तकनीकों का लाइव प्रदर्शन किया गया, जो प्रकृति के साथ पूर्ण सामंजस्य में कार्य करती हैं:

विभिन्न सोलर कुकर: फैकल्टी सदस्यों ने सोलर थर्मल तकनीक पर आधारित दुनिया भर के 10 अलग-अलग प्रकार के सोलर कुकर देखे। डॉ. मगिलिगन ने सोलर कुकिंग, बेकिंग और डीप-फ्राइंग की प्रक्रियाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

ऊर्जा आत्मनिर्भरता: यह सेंटर न केवल 2 किलोवाट सोलर और पवन ऊर्जा से स्वयं आत्मनिर्भर है, बल्कि पिछले 15 वर्षों से आसपास के 50 आदिवासी परिवारों को 19 स्ट्रीट लाइट्स के माध्यम से नि:शुल्क बिजली भी प्रदान कर रहा है।

 

विभागाध्यक्ष डॉ. शिल्पा भलेराव के उद्गार

कंप्यूटर साइंस विभाग की अध्यक्ष डॉ. शिल्पा भलेराव ने इस अनुभव को अत्यंत प्रेरणादायक बताते हुए कहा:

“पद्मश्री डॉ. जनक पलटा मगिलिगन से मिलना और उनके दशकों के शोध, समर्पण व अनुभवों को उन्हीं के मुख से सुनना हमारे लिए परम सौभाग्य की बात रही। उनके जीवन का कार्य यह सिद्ध करता है कि सस्टेनेबिलिटी कोई वैकल्पिक जीवनशैली नहीं, बल्कि एक सचेत विकल्प है, जो एक स्वस्थ ग्रह और अधिक जिम्मेदार समाज का निर्माण करता है।”

 

उन्होंने आगे कहा कि:

ज़ीरो-वेस्ट प्रतिबद्धता: डॉ. जनक पलटा जी का पूरा जीवन सेवा पर आधारित है। उनके घर में कोई अनावश्यक सामान या प्लास्टिक नहीं है, जो ज़ीरो-वेस्ट जीवनशैली के प्रति उनके पूर्ण समर्पण को दर्शाता है।

पर्यावरणीय सिद्धांतों का क्रियान्वयन: इस दौरे ने यह समझने का दुर्लभ अवसर दिया कि किस प्रकार पर्यावरणीय सिद्धांतों को व्यक्तिगत घरों, शैक्षणिक संस्थानों, उद्योगों और समुदायों में प्रभावी ढंग से लागू किया जा सकता है।

जीवन का दर्शन: आदिवासी क्षेत्रों में 26 वर्षों तक सेवा देने के पश्चात, इस सेंटर के माध्यम से वे अब तक 1,87,430 से अधिक लोगों के साथ अपने अनुभव साझा कर चुकी हैं। उनकी यह फिलॉसफी कि “शरीर, मन और आत्मा जब एक साथ सामंजस्य में रहेंगे, तभी जीवन सस्टेनेबल होगा” और उनका विचार “सभी प्राणियों के साथ सद्भावना से रहने में ही पूरी दुनिया का भला है”, हृदय को गहराई से छू जाता है।

 

आभार व्यक्त

अकादमिक दौरे के अंत में फैकल्टी समूह ने डॉ. जनक पलटा मगिलिगन द्वारा दिए गए अमूल्य समय, स्नेह, मार्गदर्शन और प्रेरणा के लिए उनका हृदय से आभार व्यक्त किया।