
सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद के ध्वस्तीकरण को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन और सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए। ALSO READ: सहारनपुर में मस्जिद पर चला बुलडोजर, सपा सांसद इकरा हसन हाउस अरेस्ट
इकरा हसन ने आरोप लगाया कि मस्जिद के मामले में सभी संबंधित लोगों को दरकिनार करते हुए बुलडोजर की कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा कि यह मस्जिद वर्ष 1947 से पहले से बनी हुई थी और इतने पुराने धार्मिक स्थल को बिना सभी पक्षों की बात सुने ढहा दिया गया।
सांसद ने कहा हमें तानाशाही के तहत हाउस अरेस्ट किया गया है। हमारे संविधान का गला घोंटा जा रहा है। इस मामले में कोई मोहलत नहीं दी गई, जबकि टेररिस्ट को मोहलत दी जा रही है।
उन्होंने आगे कहा कि देश में नियम-कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। इकरा हसन ने कहा, संविधान का गला घोंटा जा रहा है और नियम-कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। इस मामले को लेकर हम लोग कोर्ट जाएंगे।
सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि जिस जमीन पर मस्जिद बनी है, वह गाटा संख्या 539 है और यह जमीन वालिद खां तथा याकूब खां के नाम पर थी। उनके मुताबिक, इन लोगों ने यह जमीन कलेक्ट्रेट, कोषागार और तहसील के निर्माण के लिए दान की थी।
इमरान मसूद ने यह भी दावा किया कि जमीन से संबंधित वर्ष 1911 का बिजली का बिल अदालत में साक्ष्य के तौर पर पेश किया गया है, जिसे पोर्टल से प्राप्त किया गया था। उनका कहना है कि इसी जमीन पर एक मंदिर भी मौजूद है।
मस्जिद ध्वस्तीकरण पर Aimim के राष्ट्रीय प्रवक्ता शादाब चौहान ने मीडिया से कहा कि इकरा हसन रील मास्टर है, यदि वह सही मायने में सहारनपुर जा रही थी और उन्हें हाउस अरेस्ट किया गया है तो अखिलेश यादव अपने विधायकों के साथ वहां आयें।
कलेक्ट्रेट परिसर में चला बुलडोजर
सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद को लेकर प्रशासन और मस्जिद प्रबंधन के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। प्रशासन ने मस्जिद के निर्माण को सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा बताते हुए इसे हटाने की कार्रवाई शुरू की थी। मामले में न्यायालय में भी कानूनी लड़ाई चली।
मिली जानकारी के मुताबिक जिला अदालत ने 4 सितंबर को मस्जिद प्रबंधन की अपील खारिज कर दी और इससे पहले जारी हटाने के आदेश को बरकरार रखा। इसके बाद प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच मस्जिद को ध्वस्त कर दिया। कार्रवाई के दौरान पुलिस बल तैनात रहा और इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई।
प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई न्यायालय के आदेश के अनुपालन में की गई है और विवादित निर्माण सरकारी भूमि पर था। वहीं, सांसद इकरा हसन सहित विरोध करने वाले पक्ष का आरोप है कि मामले में पर्याप्त मोहलत और सभी पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर नहीं दिया गया।
कार्रवाई के बाद बढ़ा राजनीतिक तापमान
मस्जिद के ध्वस्तीकरण के बाद इस मुद्दे ने राजनीतिक रंग ले लिया है। इकरा हसन ने इसे महज एक निर्माण हटाने की कार्रवाई न मानते हुए संविधान और कानून-व्यवस्था से जुड़ा गंभीर सवाल बताया है। उन्होंने साफ किया है कि वह इस मामले को न्यायालय में उठाएंगी।
अब इस पूरे विवाद की अगली कड़ी अदालत में देखने को मिलेगी। एक तरफ प्रशासन न्यायालय के आदेश के अनुपालन की बात कर रहा है, तो दूसरी ओर सांसद इकरा हसन कार्रवाई को चुनौती देने की तैयारी में हैं। ऐसे में सहारनपुर का यह मस्जिद विवाद आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है।


